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बजट गुपचुप पेश, नाराज पार्षदों के डर से 15 मिनट में बैठक खत्म, कोई टैक्स नहीं बढ़ाया

नगर परिषद ने 2018-19 के लिए 36 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है, लेकिन जानकारी सार्वजनिक नहीं की। छोटी-छोटी बैठक की सूचना...

Danik Bhaskar | Apr 07, 2018, 02:45 AM IST
नगर परिषद ने 2018-19 के लिए 36 करोड़ रुपए का बजट पेश किया है, लेकिन जानकारी सार्वजनिक नहीं की। छोटी-छोटी बैठक की सूचना सार्वजनिक करने वाली नगर परिषद ने इतनी महत्वपूर्ण बजट बैठक को लेकर किसी को भनक नहीं लगने दी। भाजपा-कांग्रेस के कुछ पार्षदों के गुट द्वारा बैठक के दौरान हंगामा करने और बजट बैठक फेल करने के डर से जानकारी सार्वजनिक नहीं की चर्चा है। नपा सूत्रों के अनुसार नाराज पार्षदों को मनाने के बाद बैठक को मात्र 15 मिनट में ही खत्म कर दी गई।

नगर परिषद में लंबे समय से भाजपा-कांग्रेस के कुछ पार्षदों का एक गुट अध्यक्ष व सीएमओ से नाराज है। इसके पीछे अधिकारियों द्वारा तव्वजो नहीं देने सहित आर्थिक व अन्य कई कारण हैं। नया बस स्टैंड स्थित एक होटल में एक दिन पहले ही भाजपा-कांग्रेस के नाराज पार्षदों की बैठक हुई थी। इसमें दो सभापति भी शामिल थे। इसमें तय हुआ था कि बजट बैठक का विरोध करना है। इसकी खबर लगते ही नाराज पार्षदों को मनाने के लिए एक वरिष्ठ पार्षद सहित अन्य लग गए थे। यही नहीं बजट बैठक की सूचना देने वाले नप के कर्मचारी को भी खबरें नहीं देने के निर्देश दे। सीएमओ व अध्यक्ष सहित अन्य पार्षदों को अंदेशा था कि हर बार की तरह यदि बैठक के दौरान पत्रकार उपस्थित रहे और नाराज पार्षदों ने हंगामा खड़ा कर दिया तो जवाब देना मुश्किल हो जाएगा। जिस तरह पिछली बैठक के दौरान सफाई कामगारों ने स्थाई करने की मांग को लेकर नपाकर्मी पर अध्यक्ष के नाम पर 10-10 हजार रुपए मांगने का अारोप लगाया और खबर अखबारों की सुर्खियां बनी थीं। एक भाजपा पार्षद पति के अनुसार तो ऐसे में पत्रकारों को दूर रखने के साथ ही बजट बैठक भी मात्र 15 मिनट में खत्म कर दी और बजट पास हो गया।

इस तरह से नगर परिषद का काॅपी पेस्ट बजट पेश किया

इस बार फिर नगर परिषद ने काॅपी पेस्ट बजट पेश किया। आय और खर्च के लगभग आंकड़े पिछले वर्ष से उठाकर रख दिए। नई योजना के नाम पर केवल स्टेडियम निर्माण के लिए 1 करोड़ 26 लाख रुपए का प्रावधान रखा। पहली बार स्वच्छ भारत मिशन के तहत 35 लाख रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा है जबकि नगर विकास के लिए कोई बड़ी योजना दिखाई नहीं दे रही है। बैठक शुरू होते ही कुछ पार्षदों ने निर्माण की जानकारी उन्हें नहीं देने को लेकर सीएमओ को घेरा। पार्षदों ने बजट में रखे गए मुद्दों को लेकर भी कहा कि अधिकारियों ने उनसे पूछा तक नहीं और सीधे बजट सामने रख दिया गया। बजट बैठक में जब जलकर सहित बाजार उगाही की दर बढ़ाने का प्रस्ताव सीएमओ की तरफ से रखा गया तो पार्षदों ने इसका एक स्वर में विरोध किया। ऐसे में जनता पर कोई नया कर नहीं लगाया गया। बजट नगर परिषद अध्यक्ष अनोख पाटीदार ने पेश किया। बैठक में दो पार्षद को छोड़कर सभी पार्षद और सीएमओ बीएस सोलंकी व नपाकर्मी उपस्थित थे।

कचरा घरों के निर्माण व ट्रेचिंग ग्राउंड के लिए भी पिछली बार वाले ही प्रावधान

कचरा घरों का निर्माण व मरम्मत : इसके लिए 3 लाख 95 हजार का प्रावधान वर्ष 2017-18 में था लेकिन कोेई कार्य नहीं हुआ। 2018-19 में भी इसे काॅपी कर दिया।

ट्रेचिंग ग्राउंड विकास : इसके लिए 2017-18 में 15 लाख 20 हजार रुपए का प्रावधान रखा लेकिन खर्च कुछ नहीं किया। इस बार फिर से रख दिया बजट में।

शहर में गंदगी व मच्छर होते रहे खर्च, नहीं की राशि : नगर परिषद ने नगर में मच्छरों व गंदगी से निपटने के लिए कीटनाशक व पावडर खरीदने के लिए 8 लाख 50 हजार रुपए का प्रावधान किया था। इसके मुकाबले केवल 1 लाख 52 हजार 265 रुपए ही खर्च किए और इस वर्ष 2018-19 के लिए फिर से साढ़े लाख रुपए का प्रावधान रख दिया। इसी प्रकार कचरा दानपात्र व वाहन अादि खरीदने के लिए भी 41 लाख रुपए का प्रावधान था और मुकाबले में एक लाख रुपए भी खर्च नहीं किए। इस बार 2018-19 के बजट में फिर से 41लाख रुपए का प्रावधान रख दिया।

अनुमानित बजट पर एक नजर

आय : 35 करोड़ 99लाख 57हजार 400रुपए।

व्यय : 35 करोड़ 99लाख 33हजार 700रुपए।

संचित निधि 27 लाख 3हजार 900रुपए।

बचत : 23 हजार 700रुपए।

यह भी खर्च नहीं किया और कर दिया रिपीट

नगर परिषद ने स्वच्छता शाखा के कर्मचारियों को दी जाने वाली सुविधा पर 3 लाख 10 हजार रुपए खर्च करने का प्रावधान रखा था, पूरा वर्ष बीतने पर एक रुपए भी खर्च नहीं किया। इसी प्रकार कांजी हाउस, सामाजिक कल्याणकारी कार्यों पर भी कुछ खर्च नहीं किया।