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गांधीसागर अभयारण्य के प्रेमपुरिया जंगल में 30 हेक्टेयर क्षेत्र में लगी आग

गांधीसागर अभयारण्य क्षेत्र के प्रेमपुरिया सेक्टर के जंगल में सोमवार सुबह आग लग गई। वन विभाग का आमला पहुंचता तब तक...

Danik Bhaskar | Apr 24, 2018, 03:45 AM IST
गांधीसागर अभयारण्य क्षेत्र के प्रेमपुरिया सेक्टर के जंगल में सोमवार सुबह आग लग गई। वन विभाग का आमला पहुंचता तब तक हवा के कारण विकराल रूप लेते हुए करीब 30 हेक्टेयर क्षेत्र में फैल गई। आग को सुबह 11 बजे से बुझाने के लिए 70 से ज्यादा वन विभाग के कर्मचारी और स्थानीय ग्रामीण लगे। तीन फायर ब्रिगेड और 6 से ज्यादा पानी के टैंकर और अन्य साधन लगे। ग्रामीणों का कहना है कि आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। यह फैलती जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि शाम करीब 6 बजे आग पर काबू पा लिया। हवा के कारण फिर न लग जाए, इसके लिए कर्मचारियों को रातभर के लिए तैनात किया गया। इससे लापरी घास पूरी तरह जलने के साथ छोटे पौधों सहित कुछ पेड़ों को भी नुकसान हुआ है।

ग्रामीणों के अनुसार सुबह करीब 9 बजे कुछ महिलाएं घास काटने गई थीं। उन्हें आग दिखाई दी ताे ग्रामीणाें को बताया। उन्होंने भानपुरा रेंज के प्रेमपुरिया के जंगल क्षेत्र में आग की सूचना स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों को दी। भानपुरा रेंजर अनिल जोशी माैके पर पहुंचे। भानपुरा रेंज और गांधीसागर पश्चिम रेंज के कर्मचारियों आैर पानी के टैंकरों को बुलाया। साथ ही नगर परिषद भानपुरा व गरोठ तथा गांधीसागर पंचायत से फायर ब्रिगेड भेजने के लिए कहा। इस बीच ग्रामीणों की मदद से आग बुझाना शुरू किया, कुछ ही देर में 25 से ज्यादा कर्मचारी भी साजोसामान के साथ पहुंच गए।

तेज धूप व हवा से तीन बार भड़की आग

गांधीसागर अभयारण्य के प्रेमपुरिया सेक्टर के जंगल में लगी आग बुझाते वनकर्मी व ग्रामीण।

लापरी घास पूरी तरह नष्ट, पौधों को भी नुकसान

गांधीसागर वन अभयारण्य को बढ़ाने के लिए इस क्षेत्र में विभाग द्वारा 1994 में प्लांटेशन किया था। चारों तरफ से सुरक्षित क्षेत्र होने के कारण यह क्षेत्र में जंगल का वातावरण समय-समय पर पौधारोपण भी होता रहा। सोमवार को लगी आग के कारण लापरी घास तो पुरी तरह जल गई। इसके साथ ही कई जगह छोटे पौधों को ज्यादा नुकसान पहुंचा है। पेड़ों काे भी वहा ज्यादा नुकसान पहुंचा जहां झाड़ियां ज्यादा थीं। विभाग पेड़-पौधों का ज्यादा नुकसान नहीं मान रहा है।

24 घंटे रखेंगे निगरानी, फिर भड़क सकती है आग

विभाग ने स्टाफ व ग्रामीणों की मदद से देरशाम करीब 6 बजे आग पर काबू पाया। धुआं अभी भी उड़ रहा है। ऐसे में प्रभावित क्षेत्र में निगरानी रखने के लिए बीट गार्ड व कर्मचारी तो तैनात रहेंगे। साथ ही पानी के टैंकर भी रहेंगे।

आग भयानक थी, नुकसान ज्यादा नहीं


एक तरफ पेड़ व झाड़ियों की पत्तियों से आग बुझाने का प्रयास ग्रामीण करते रहे। दूसरी तरफ वन विभाग फायर लाइन कटिंग (रास्ता काटना) पद्धति अपनाते रहे। इसके तहत आग वाले क्षेत्र के आगे 5 से 6 फीट चौड़ी खाई बनाते हुए आगे बढ़ना होता है। इससे बीच में मिट्टी व गड्ढा हो ने से आग आगे नहीं बढ़ती है। तेज हवा के कारण घास व झाड़ियों में लगी आग की चिंगारी 10 से 12 फीट दूर तक उड़कर आ रही थी। ऐसे में खाई खाेदने के बाद भी उसके आगे आग लगती गई। अलग-अलग क्षेत्र में तीन-तीन बार के प्रयास फेल हो गए और हवा के कारण चिंगारी उड़कर आगे आती रही।

3 फायर फाइटर और 6 टैंकर लगे जंगली की आग बुझाने में

आग को बुझाने में गरोठ, भानपुरा व गांधी सागर के तीन फायर फाइटर (फायर ब्रिगेड) के साथ वन विभाग व निजी क्षेत्र के 6 टैंकर भी देरशाम लगे रहे। इस दौरान लापरी घास के साथ बहुतायत में फैली झाड़ियां आग बुझाने में बाधा बनीं। झाड़ियों के कारण फाइटर व टैंकर आगे नहीं बढ़ पा रहे थे।