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कार्रवाई करने के बाद भी किसानों की जगह भावांतर में तूल रहा है व्यापारियों का लहसुन

भास्कर संवाददाता | गरोठ/शामगढ़ कृषि उपज मंडी शामगढ़ में भावांतर में लहसुन खरीदी में गड़बड़ी हो रही हैं। किसानों के...

Dainik Bhaskar

May 18, 2018, 04:05 AM IST
कार्रवाई करने के बाद भी किसानों की जगह भावांतर में तूल रहा है व्यापारियों का लहसुन
भास्कर संवाददाता | गरोठ/शामगढ़

कृषि उपज मंडी शामगढ़ में भावांतर में लहसुन खरीदी में गड़बड़ी हो रही हैं। किसानों के नाम पर व्यापारियों की लहसुन खरीदी जा रही है। यह मंडी कर्मचारियों और तथाकथित व्यापारी व किसानों की मिली भगत से हो रहा हैं। शिकायत के बाद मंडी के जिम्मेदारों ने कुछ नहीं किया, तहसीलदार दो दिन पहले मंडी में जांच के लिए पहुंचे थे। व्यापारी का माल बेचते एक किसान को पकड़ा और पंचनामा बनाकर मंडी प्रशासन को कार्रवाई के लिए सौंपा था। दो दिन बाद भी जिम्मेदारों ने कुछ नहीं किया। मंडी में किसानों के नाम पर व्यापारियों का माल बेचा जा रहा हैं।

सरकार की किसान हितैषी योजनाओं का लाभ कुछ व्यापारी उठा रहे हैं । मंडी में भावांतर के तहत लहसुन आैर समर्थन मूल्य पर चने की खरीदी की जा रही हैं। दोनों उपज में मंडी के नीलामी प्रभारी (बोली लगवाने व पर्ची काटने) वाले कर्मचारियों और अधिकारी की मिली भगत से व्यापारी अपने माल पर किसी भी किसान को खड़ा कर बोली लगवाते हैं। किसान चंद रुपयों के लालच में व्यापारियों की मदद करता है। लगातार शिकायत के बाद मंगलवार को शामगढ़ मंडी कुछ व्यापारी अपना माल किसान को खड़ा कर खरीद रहे थे। तब तहसीलदार प्रेमशंकर पटेल मंडी पहुंचे और निरीक्षण किया। बिना मंडी लाइंसेस के पंकज-मांगीलाल बगुनिया कृषि उपज खरीद रहा है। शंका पर तहसीलदार पटेल ने पूछताछ की तो चने बेच रहे बगुनिया निवासी किसान रामचंद से पूछताछ की तो बताया वह पंजीयन पर 60क्विंटल चने बेचने आया है। जब सख्ती के साथ पूछताछ की तो बताया कि पंजीयन उसी का है, लेकिन व्यापारी पंकज से चने लेकर बेच रहा था। चने पंकज के है। प्रभारी मंडी सचिव रंगलाल डामोर ने तहसीलदार के आदेश पर पंचनामा बनाया और किसान के बयान लिए। प्रभारी मंडी सचिव ने उक्त चने जब्त करने की जगह छोड़ दिए और किसान चने लेकर चला गया। बताते हैं कि उक्त चने मंडी से व्यापारी के पास ही भेज दिए। लहसुन में भी किसानों को सामने रखकर व्यापारी अपना लहसुन खरीद रहे हैं। सुवासरा के आंबा निवासी किसान राघुसिंह सौंधिया राजपूत अपने पंजीयन पर लहसुन नीलाम कर रहा था। किसान ने पकड़ में आने पर व्यापारी को हाेना बताया। बाद भी मंडी अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं। बाद में जब अधिकारी मौके पर पहुंचे तो व्यापारी इधर-उधर हो गए। मंडी कर्मचारियों की मिली-भगत के कारण लहसुन के व्यापारी अब पकड़े में नहीं आ रहे। तीन दिन से तहसीलदार नजर रख रहे हैं, उसके बाद भी मंडी में भावांतर योजना में लहसुन खरीदी में गड़बड़ी हो रही हैं। मंडी के जिम्मेदारों की स्थिति यह है कि तहसीलदार की सख्ती के बावजूद मंडी प्रांगण में नीलामी के लिए आने वाली और नीलामी के बाद जाने वाली उपज पर नजरे नहीं रखी जा रही हैं। क्योंकि सारी गड़बड़ी मंडी प्रांगण में आवक-जावक से ही हो रही हैं। तहसीलदार पटेल ने गुरुवार को भी मंडी का निरीक्षण किया, लेकिन उनके आने के पहले ही व्यापारी इधर-उधर हो गए।

मंडी में लहसुन के ढेर के पीछे बारदान में व्यापारियों की लहसुन

व्यापारी-ऐसे भावांतर योजना का उठा रहे फायदा

मंडी में आने वाली लहसुन का रिकार्ड मंडी प्रशासन द्वारा नहीं रखा जा रहा। व्यापारी लहसुन खरीदी के बाद बोरियों में भरकर प्रांगण में रख देता है। कुछ व्यापारी बोरियों को अपने हम्मालों से रात में मंडी में फिर ढेर लगाते हैं और अगले दिन डमी किसान खड़ाकर नीलामी में स्वयं खरीदते हैं। व्यापारी विश्वसनीय किसान जिसका भावांतर में पंजीयन है, उसे प्रति क्विंटल 200 रुपए का लालच देते हैं। किसान इसी लालच में पंजीयन तथाकथित व्यापारी को उपयोग करने देता हैं। व्यापारी 100 से 200 रुपए क्विंटल में वह लहसुन बोली लगाकर खरीदता है। पता होने के कारण अन्य व्यापारी मिली भगत अनुरूप बोली लगाते हैं। भावांतर के कारण 600 से 700 रुपए व्यापारी को बचते हैं। उसमें से किसान को 200 रुपए देने के बाद शेष राशि में से तय राशि मंडी के तथाकथित कर्मचारी और अधिकारी तक पहुंचता हैं।


बिना लाइसेंस वाले मंडी व्यापारी के बारे में जांच के आदेश


शेड से माल हटाने के लिए व्यापारियों को निर्देश दिए

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कार्रवाई करने के बाद भी किसानों की जगह भावांतर में तूल रहा है व्यापारियों का लहसुन
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