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बोलिया में 7 दिन में एक बार मिल रहा पानी बाकी दिन डेढ़ किमी दूर जाकर लाना पड़ रहा

नगर से 18 किमी दूर और राजस्थान की सीमा से लगी करीब 15 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत बोलिया में इन दिनाें जलसंकट हो...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 06, 2018, 06:05 AM IST

  • बोलिया में 7 दिन में एक बार मिल रहा पानी बाकी दिन डेढ़ किमी दूर जाकर लाना पड़ रहा
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    नगर से 18 किमी दूर और राजस्थान की सीमा से लगी करीब 15 हजार की आबादी वाली ग्राम पंचायत बोलिया में इन दिनाें जलसंकट हो गया है। पंचायत के पेयजल स्रोत दम तोड़ चुके हैं। दो टंकियों के माध्यम से 20 वार्डों में 30 दिन में 3 से 4 दिन ही पेयजल सप्लाई हो रहा है। ऐसे में रहवासियों को निजी जलस्रोत और टैंकरों से पानी खरीदकर पूर्ति करना पड़ रही है। हालात यह हैं कि जो रोज-रोज पानी खरीद नहीं पाते हैं, वे नगर से 1 से डेढ़ किमी दूर जाकर हैंडपंप से पानी ला रहे हैं। सचिव बोले- क्या करें पानी ही नहीं है तो सरपंच का कहना है कि स्वयं के खर्च से दो ट्यूबवेल खुदवा चुका हूं। निजी लोगों के ट्यूबवेल से एक टंकी पानी भरवाता हूं। अब पानी ही नहीं है तो क्या करूं। लोगों का कहना है कि सबकुछ मालूम होते हुए भी जिम्मेदार पहले से कोई कदम नहीं उठाते और परेशानी जनता को उठाना पड़ रही है। निजी टैंकर से पानी भरने वाले मनमाना दाम वसूल रहे हैं।

    गरोठ की बड़ी ग्राम पंचायत में शामिल बोलिया का क्षेत्रफल बड़ा और पुराना नगर होने के कारण बसाहट भी ज्यादा है। वर्तमान में करीब 15 हजार की आबादी होने के साथ ग्राम पंचायत 20 वार्डों में विभिक्त है। यहां 15 से ज्यादा जाति के लोग रहते हैं। प्रशासन बोलिया को नगर परिषद बनाना चाहता है लेकिन यहां लाेगों को पानी तक छोड़िए 8 से 10 दिन में मिल रहा हैं।

    बोलिया से डेढ़ किमी दूर कंठाल नदी ईदगाह मसजिद के समीप बने हैंडपंप से कैन में पानी भरकर सिर पर रखकर लातीं महिलाएं।

    15 से ज्यादा निजी टैंकरों से हाेती है सप्लाई

    नगर व आस-पास के ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाल करीब 10 लोगों द्वारा 15 से ज्यादा टैंकरों से पानी बेचा जाता हैं। सप्लायर कचरूलाल विश्वकर्मा ने बताया वह तो केवल किराये पर टैंकर देता हैं। नगर में तेजपाल माली सहित रमेश विश्वकर्मा, राजराम अलावा, गोपाल बागवान, हेमंतकुमार बागवान, नरेंद्र बागवान, पवन श्रोत्रिय, भरतकुमार, दिनेश विश्वकर्मा सहित अन्य लोग पानी सप्लाई करते हैं। करीब 15 टैंकरों से रोज 50 से 60 टैंकर सप्लाई होते हैं। मांग पर कभी-कभी कम-ज्यादा भी होते हैं।

    सदर बाजार में टैंकर से पानी के ड्रम भरवाते रहवासी।

    स्वयं के खर्च से व्यवस्था की

    प्रशासन नप को जो देती है, उससे कुछ नहीं होता। दो ट्यूबवेल स्वयं के खर्च से खुदवाए आैर दो निजी ट्यूबवेल पर मोटर लगाकर स्वयं के खर्च से पानी की टंकियां भरवा रहा हूं। इसके बाद 7 से 8 दिन में सप्लाई कर पा रहे हैं। अब पानी ही नहीं है तो कहा से दें। कृपालसिंह पडियार, सरपंच ग्रापं बोलिया

    दाम बढ़ाने हड़ताल की, दो सौ का टैंकर तीन साै में

    जलसंकट में निजी पानी टैंकर संचालकों की मनमानी भी चरम पर है। पिछले दिनों टैंकरों के दाम बढ़ाने के लिए दाे दिन तक पानी सप्लाई रोक दी। रहवासी मोहम्मद इरफान, अनिल कचोलिया (जैन) सहित अन्य ने बताया अप्रैल तक 200 रुपए प्रति टैंकर ( 5 हजार लीटर) ले रहे थे। अचानक एक मई से कहा कि 300 रुपए लगेंगे। यही नहीं प्रति ड्रम (200 लीटर) पहले 10 से 15 रुपए लेते थे उसके भी बढ़ाकर 20 रुपए प्रति ड्रम की मांग करने लगे। जब नहीं दिए तो 2 मई तक सप्लाई ही बंद कर दी। मजबूरी में टैंकर संचालकों के सामने झुकना पड़ा तब जाकर अगले दिन सप्लाई शुरू की।

    अधिग्रहण के लिए लिखा

    ग्राम के दो कुओं व एक ट्यूबवेल मुश्किल से 15 मिनट चलते हैं। 20 वार्ड है रोजाना दो-दो वार्ड में पानी देते हैं। इसमें 8 से 10 दिन लग जाते हैं। निजी ट्यूबवेल अधिग्रहण के लिए लिखा है। अब पानी ही नहीं है तो कहां से लाएं। दो टैंकर हैं लेकिन ट्रैक्टर नहीं हैं। महेश पांडे, सचिव ग्राम पंचायत बोलिया

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