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खनेता धाम संतों के समागम से बना तीर्थ: जयभान सिंह

विजयराम धाम खनेता रघुनाथ मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा का बुधवार को समापन किया गया। कथा के अंतिम दिन वृंदावन से...

Danik Bhaskar | Feb 01, 2018, 01:40 PM IST
विजयराम धाम खनेता रघुनाथ मंदिर परिसर में चल रही भागवत कथा का बुधवार को समापन किया गया। कथा के अंतिम दिन वृंदावन से पधारे व्यास प्रपन्नाचार्य महाराज की कथा सुनने पहुंचे केबिनेट मंत्री जयभान सिंह पवैया ने कहा खनेता धाम संतों के समागम से तीर्थ बन गया है। यहां हमेशा ज्ञान की गंगा बहती है। उन्होंने कहा ऐसी धरा पर व्यक्ति को अपने जीवन के कुछ पल अवश्य गुजारने चाहिए, जिससे उसका उद्धार हो सके। कथा के समापन पर राजस्थान, दिल्ली, गुजरात सहित अन्य स्थानों के महंत और श्रोताओं ने खनेता धाम में चल रही भागवत कथा का आनंद लिया।

कार्यक्रम

गोहद के विजयराम धाम खनेता में हुआ भागवत कथा का समापन

जहां कीर्तन होते हैं वह स्थान बैकुंठ है...

कथा सुनने पहुंचे केबिनेट मंत्री जयभान सिंह पवैया ने संत समागम के दौरान कहा जिस स्थान पर राम कथा और संतों का समागम हो वह स्थान तीर्थ के समान होता है। खनेता धाम संत समागम के चरणों के आगमन से तीर्थ के रूप में विकसित है। उन्होंने कहा सही कहूं तो आज खनेता धाम दूसरा अयोध्या धाम है। जहां कीर्तन होते हैं, वह स्थान भी बैकुंठ के समान होता है। मंत्री ने कहा मनुष्य जिस तरह अपने मोबाइल की बैटरी को रीचार्ज करता है, उसी तरह मनुष्य को रीचार्ज होने की आवश्यकता होती है और उसे संत ही ज्ञान की अनुभूति करा सकता है। वह भी किसी दिव्य स्थान पर यह चार्जिंग स्थल है। क्योंकि संतों की शरण में जाने से मनुष्य का कल्याण होता है।

मिथिला से हुई सीताराम की उत्पत्ति: कथा व्यास प्रपन्नाचार्य महाराज ने भक्तजनों से कहा सीताराम नाम की उत्पत्ति भारत में सर्व प्रथम मिथिला से हुई है। महाराज ने आगे कथा में बताया भगवान के धरती पर जब भी अवतार हुए हैं, उन्होंने लोगों को धर्म का मार्ग ही दिखाया है। कथा के दौरान विजयराम धाम के महामंडलेश्वर रामभूषणदास महाराज ने कहा मेरे गुर परमपूज्य बैकुंठधाम निवासी विजयरामदास महाराज ने खनेता मंदिर में जप-तप कर इसे तीर्थ के रूप में विकसित किया। जिसमें क्षेत्र के अन्य मंदिरों के महंतों ने अपना सहयोग देकर धाम को तीर्थ के रूप में विकसित कराया है।

धाम की मूर्तियां अलौकिक

खनेता धाम के महामंडलेश्वर महाराज ने बताया विजयराम धाम की चार शाखाएं स्थित हैं, जिसमें ग्वालियर में लक्ष्मण तलैया, जसावली, वृंदावन और चौथा खनेता धाम है। यहां की मूर्तियां दिव्य और अलौकिक हैं। इस धाम का करीब 500 साल पुराना इतिहास है। महाराज ने कहा गुरुजी कहते थे, जिस संत की माला में दम है वह कलयुग को जीतकर भव से पार हो जाएगा। उन्होंने कहा सियापिया मिलन समारोह प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है। कार्यक्रम में करीब दस हजार भक्तगण प्रतिदिन कथा का रसपान करने आए, इसके साथ ही आगे भी विजयरामदास महाराज का वार्षिकोत्सव कार्यक्रम धूमधाम से आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में रासलीला का आयोजन प्रतिदिन किया गया।