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नगर का हाल जानने रथ में निकलेंगे राधा कृष्ण, सुहागिन करती हैं लंबी उम्र की कामना

राधाष्टमी के लिए गोहद में सजने लगा रथ। कलेक्टर को लिखा पत्र मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य उमेश कांकर...

Danik Bhaskar | Sep 12, 2018, 02:56 AM IST
राधाष्टमी के लिए गोहद में सजने लगा रथ।

कलेक्टर को लिखा पत्र

मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य उमेश कांकर शोभायात्रा की तैयारियों को संभाल रहे हैं। उन्होंने एक कलेक्टर आशीष कुमार गुप्ता को एक पत्र भी लिखा है। जिसमें कहा गया है कि राधारानी के श्रंगार के सभी 38 आभूषण सरकारी कोषालय से उपलब्ध कराए जाएं। जिससे इस बार भ्रमण पर निकलने वाले रथ में राधा का पूरा श्रंगार किया जाए। मालूम हो कि राधाष्टमी के उत्सव पर विशेष रथ में राधा-कृष्ण की प्रतिमाएं सुंदर सजाई जाती हैं। नगर में जगह-जगह स्वागत सत्कार कर लोग पुष्प वर्षा करते हैं। नगर वासियों के लिए यह नजारा देखते ही बनता है। लोग इस दिन भारी संख्या में शोभायात्रा में शामिल होकर धर्म लाभ कमाते हैं।

गोहद में राणा भीम सिंह के किले के पास रानी गुरु मंदिर में राधाष्टमी को लेकर तैयारियां शुरू

भास्कर संवाददाता | गोहद

गोहद में राधाष्टमी का पर्व बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। नगर के उत्तर दिशा में राणा भीम सिंह के किले की प्राचीर से लगे रानी गुरु मंदिर में इन दिनों इस पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। मंदिर ट्रस्ट के सदस्यों द्वारा राधा-कृष्ण के रथ को सुंदर सजाया जा रहा है। आने वाली 17 सितंबर सोमवार की सुबह मंदिर परिसर से राधारानी भगवान श्रीकृष्ण के साथ रथ में सवार होकर नगर का हालचाल जानने निकलेंगे। सैकड़ों भक्तगण ढोल नगाड़ों के साथ इस शोभायात्रा में पैदल नगर का भ्रमण करेंगे। मंदिर ट्रस्ट के सदस्य उमेश कांकर बताते हैं कि 1984 में राधा रानी का सोने का मुकुट सहित श्रंगार के 38 आभूषण राजस्व विभाग के अधिकारियों की देखरेख में शासकीय कोषालय में जमा करा दिए हैं। इस बार उम्मीद की जा रही है कि राधाष्टमी पर पूरे श्रंगार के साथ यात्रा निकाली जाएगी।

12 साल से भक्त निकाल रहे हैं शोभायात्रा

जाट राजा राणा भीम सिंह ने रानी गुरु और राजा गुरु नाम से किला के पास दो अलग-अलग मंदिर का निर्माण कराया था। रानी गुरु मंदिर में राधा-कृष्ण की प्रतिमा विराजमान हैं। पूर्व में यहां देवी-देवताओं का पूरा श्रंगार रहता था। लेकिन सुरक्षा की दृष्टि को ध्यान में रखते हुए उसे सरकारी खजाने में जमा करा दिया गया है। मदनमोहन नाम से प्रसिद्ध रानी गुरु का यह ऐतिहासिक मंदिर साढ़े चार सौ साल पुराना है। जिससे मंदिर की करीब पांच सौ बीघा जमीन लगी है, जो खरौआ, गंगादास का पुरा, पिपरसाना, पांसड़ में है। ज्यादातर जमीन पर ग्रामीणों का कब्जा है। बता दें कि नगर में राधा-कृष्ण की राधाष्टमी पर शोभायात्रा निकालने की प्रथा पिछले बारह साल से चली आ रही है। यह उत्सव नगर वासियों द्वारा बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

नगर में 108 मंदिर हैं

मंदिर प्रबंधन समिति के सदस्य उमेश कांकर ने कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया लाखों रुपए की लागत से बने रथ पर राधा व कृष्ण की मनमोहक प्रतिमा प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी नगर का हालचाल जानने निकलेंगी। उन्होंने बताया नगर में 108 मंदिर हैं, लेकिन रानी गुरु का मंदिर प्रमुख मंदिरों में है। यहां नगर के बाहर से महिलाएं राधाष्टमी के दिन सुहाग की लंबी उम्र की कामना करने आती हैं। इस मंदिर की विभिन्न रोचक कहानियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। ऐसी अवधारणा है कि मंदिर में पूजा अर्चना करने से परिवार में बरकत आती है। इस लिहाज से उत्सव के दिन हजारों की संख्या में लोग एकत्रित होकर राधा-कृष्ण के रथ का दर्शन करने पहुंचते हैं।

मंदिर की जमीन पर कब्जा

मदनमोहन मंदिर की सैकड़ों बीघा जमीन, जो ग्रामीण इलाकों में फैली हुई है। उस पर आज दबंगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। मंदिर ट्रस्ट के पास महज 70 से 75 बीघा जमीन शेष रह गई है। खास बात यह है कि पिछले 19 साल से मंदिर ट्रस्ट का चुनाव नहीं कराया गया है। जिसके कारण इस धरोहर की देखरेख करने वाला कोई जिम्मेदार व्यक्ति नहीं है। ट्रस्ट के सदस्य कांकर ने एसडीएम से मांग की है कि मंदिर प्रबंधन समिति ट्रस्ट का चुनाव कराया जाए। जिससे मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठान व अन्य प्रयोजनों को ठीक से निभाने की प्रक्रिया चलती रहे।