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जलस्रोत सूखने से बढ़ा संकट, 3 से 5 किमी दूर से लाना पड़ रहा है पानी

जिले के कई गांवों में अभी से जल संकट गहरा गया है। हालात बिगड़ने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों को देखे तो कई पेयजल स्रोत...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:30 AM IST
जिले के कई गांवों में अभी से जल संकट गहरा गया है। हालात बिगड़ने लगे हैं। सरकारी आंकड़ों को देखे तो कई पेयजल स्रोत सूखने लगे हैं। कुएं, हैंडपंप और ट्यूबवेल में पानी नहीं है। इसके अलावा कई जगह तो विभिन्न कारणों से भी यह संकट पैदा हुआ है। हालांकि अधिकारियों का दावा है कि वह इन्हें ठीक कर रहे हैं और कई जगह व्यवस्था भी बना दी गई है।

जिले के 32 गांवों में पेयजल के लिए परेशान हो पड़ रहा है। कहीं बिजली कनेक्शन नहीं मिलने तो कहीं मोटर पंप खराब होने से और कहीं पेयजल स्रोत सूखने से 32 गांवों और पंचायतों में नल- जल योजनाएं बंद पड़ी होने से ऐसे हालात बने हैं।

दरअसल जिले में 200 नल- जल योजनाए हैं, जिनमें 95 नल- जल योजनाएं और 19 स्पोर्ट सोर्स योजना व मुख्यमंत्री पेयजल योजना कह 86 योजनाओं सहित कुल 200 योजनाएं है। इनमें से मौजूदा वक्त में सिर्फ 168 चालू और शेष 32 योजनाएं बंद पड़ी हुई है।

योजनाएंं बंद होने से कई गांवों में खरीदकर पानी पीने मजबूर लोग

जल स्रोत सूखने से 3 और जीर्णशीर्ण होने से 8 योजनाएं बंद

जो नल- जल योजनाएं बंद है उनमें सर्वाधिक आठ योजनाएं जीर्णशीर्ण होने से बंद पड़ी हुई है। जबकि 3 योजनाएं जल स्रोत सूखने और 5 मोटर पंप खराब होने व 4 बिजली कनेक्शन नहीं मिल पाने के कारण बंद है। चार योजनाएं पाइप लाइन क्षतिग्रस्त होने से और एक वोल्टेज की कमी से एवं 2 योजनाएं बिजली ट्रांसफार्मर खराब होने से बंद है। एक योजना ऐसी है भी जिसे ग्राम पंचायत द्वारा नहीं चलाया जा रहा है, जिससे ग्रामीणों को पेयजल के लिए परेशान होना पड़ रहा है।

विभाग का दावा है कि ठीक करा रहे हैं

पीएचई विभाग दावा कर रहा है कि वह पेयजल संकट पैदा न हो, इसके लिए लगातार काम कर रहा है। हालांकि जिन जगहों पर हैंडपंप बंद थे, इनमें से कुछ को फिर से चालू करा दिया गया है। इसके अलावा अन्य जगह भी व्यवस्था की गई है। उधर कई गांवों में तो लोगों को 3 से 5 किमी तक पैदल चलकर पानी का इंतजाम करना पड़ रहा है।

लंबे समय से बंद पड़ी योजनाएं, फिर भी नहीं दे रहे ध्यान

जिन पंचायतों और गांवों में नल- जल योजनाएं बंद पड़ी हुई है। उनमें से कई योजनाएं तो बीते कई सालों से बंद बताई जाती है। इन योजनाओं को चालू कराने की मांग कई बार ग्रामीणों द्वारा की जा चुकी है, लेकिन इसके बाद भी अभी तक इन्हें चालू नहीं कराया गया है। ऐसे में लोगों की परेशानियां बढ़ गई है। कई गांवों में ऐसे हालात है कि ग्रामीणों को कई किमी दूर जाकर पानी भरकर लाना पड़ रहा है। वहीं कई गांवों के लोग रुपए लेकर निजी खर्च पर कनेक्शन लेकर सालाना 5 से 6 हजार रुपए चुकाकर अपनी और अपने परिवार की प्यास बुझा रहे हैं।