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कंडों की जलाएं होली, पर्यावरण अनुकूलता के लिए टेसू, हल्दी और चंदन से रंग बनाएं

भास्कर संवाददाता| विजयपुर/ राघौगढ़ स्कूलों में छात्रों व ग्रामीणों से होली पर हानिकारकों तत्वों से बने रंगों...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 02:35 AM IST

भास्कर संवाददाता| विजयपुर/ राघौगढ़

स्कूलों में छात्रों व ग्रामीणों से होली पर हानिकारकों तत्वों से बने रंगों का उपयोग न कर प्राकृतिक सामग्री द्धारा बनाए गए पर्यावरण अनुकूल सूखे हर्बल रंगों से तिलक होली-रंगपंचमी उत्सव को प्राचीन परंपरा अनुसार पर्यावरण, जल संरक्षण अभियान चलाया गया। जिला पर्यावरण केंद्र गुना सुचेताहंबीर सिंह ने विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को पर्यावरण अनुकूल होली मनाने का संदेश दिया और केमिकल युक्त रंगों से होने वाले हानिकारक प्रभावों से ग्रामीणों को अवगत कराया।

ऐसे बनाएं पर्यावरण अनुकूल सूखे रंग

अभियान के तहत उन्होंने ग्रामीणों से टेसू के फूल से लाल रंग, चुकंदर से बैगनी रंग, हल्दी, चंदन, गैंदा के फूल, मुलतानी मिट्टी से पीला रंग, पालक से हरा रंग पर्यावरण अनुकूल सूखे रंगों को तैयार करें या बाजार से लाए हर्बल रंगों का उपयोग करने की समझाईश दी। होलिका दहन के लिए पेड़ों को न काटें और अधिक घास-फूस का भी अधिक उपयोग न करने की समझाईश दी। ग्रामीणों को ग्लोबल वार्मिंग व पानी के संकट को रोकने के लिए रंगों के उत्सव पर हर्बल/प्राकृतिक रंगों द्वारा तिलक होली मनाकर पानी की बचत के लिए हर योगदान करने की बात कही।

पर्यावरण केंद्र के अभियान के तहत विजयपुर, भुलाय, सकतपुर, उदयपुरी, भिंडू पहाड़ी, दौराना, राधौगढ़, एनएफएल, गेल, पगारा, रुठियाई, गुना, डोंगर, एनएफएल पालिका, बेलका, सार्वजनिक स्थलों व स्कूलों में समूह वार्ता व पोस्टर से जागरूकता अभियान चलाया।

ग्लोबल वार्मिंग और पानी के संकट से ग्रामीणों को किया जागरूकता

पानी बचाओ रैली निकालते एनएसएस छात्र।

भास्कर संवाददाता| विजयपुर/ राघौगढ़

स्कूलों में छात्रों व ग्रामीणों से होली पर हानिकारकों तत्वों से बने रंगों का उपयोग न कर प्राकृतिक सामग्री द्धारा बनाए गए पर्यावरण अनुकूल सूखे हर्बल रंगों से तिलक होली-रंगपंचमी उत्सव को प्राचीन परंपरा अनुसार पर्यावरण, जल संरक्षण अभियान चलाया गया। जिला पर्यावरण केंद्र गुना सुचेताहंबीर सिंह ने विभिन्न गांवों में जाकर लोगों को पर्यावरण अनुकूल होली मनाने का संदेश दिया और केमिकल युक्त रंगों से होने वाले हानिकारक प्रभावों से ग्रामीणों को अवगत कराया।

ऐसे बनाएं पर्यावरण अनुकूल सूखे रंग

अभियान के तहत उन्होंने ग्रामीणों से टेसू के फूल से लाल रंग, चुकंदर से बैगनी रंग, हल्दी, चंदन, गैंदा के फूल, मुलतानी मिट्टी से पीला रंग, पालक से हरा रंग पर्यावरण अनुकूल सूखे रंगों को तैयार करें या बाजार से लाए हर्बल रंगों का उपयोग करने की समझाईश दी। होलिका दहन के लिए पेड़ों को न काटें और अधिक घास-फूस का भी अधिक उपयोग न करने की समझाईश दी। ग्रामीणों को ग्लोबल वार्मिंग व पानी के संकट को रोकने के लिए रंगों के उत्सव पर हर्बल/प्राकृतिक रंगों द्वारा तिलक होली मनाकर पानी की बचत के लिए हर योगदान करने की बात कही।

पर्यावरण केंद्र के अभियान के तहत विजयपुर, भुलाय, सकतपुर, उदयपुरी, भिंडू पहाड़ी, दौराना, राधौगढ़, एनएफएल, गेल, पगारा, रुठियाई, गुना, डोंगर, एनएफएल पालिका, बेलका, सार्वजनिक स्थलों व स्कूलों में समूह वार्ता व पोस्टर से जागरूकता अभियान चलाया।

साडा चौराहे से सरकारी अस्पताल तक पानी बचाओ रैली निकाली

राघौगढ़|
महाविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों द्वारा साडा चौराहे से सरकारी अस्पताल तक जल बचाओ अभियान की रैली निकाली गई। रासेयो एवं इस्माइल केयर वेलफेयर एंड सोशल ग्रुप के संयुक्त तत्वाधान में निकाली गई रैली में स्वच्छता एवं जल बचाओ से संबंधित नारे भी लगाए। स्वयंसेवकों ने अस्पताल में पहुंचकर स्वयंसेवकों ने मरीजों को चाय एवं बिस्कुट बांटे। इस अवसर पर अस्पताल के बैठक कक्ष में विचार गोष्ठी हुई। मुख्य अतिथि के रुप में डॉ. जयराम यादव एवं अध्यक्षता डॉ. विकास गुप्ता ने की एवं विशिष्ट अतिथि डॉ. एचसी पाटनी रहे। जिसमें कविता राजपूत ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। डॉ. यादव ने राष्ट्रीय सेवा योजना की सराहना करते हुए कहा कि रासेयो के स्वयंसेवक ऐसे जनजागरण के कार्य निरंतर रूप से आगे भी करते रहे। डॉ. विकास गुप्ता, प्रियांश त्यागी, प्रीति केवट ने भी अपने विचार व्यक्त किए। डॉ. एचसी पाटनी ने होली पर पानी की होली की जगह गुलाल की होली खेलने व कंडों का प्रयोग कर होली जलाने का आह्वान किया। छात्रों ने स्वास्थ्य से संबंधित गीत का भी अभ्यास कराया। संचालन संदीप मेहरा ने किया। कार्यक्रम में संतो बघेल, प्रियंका सैनी, रानी सेलर, पूजा परिहार, आदर्श प्रजापति, शिवानी सैनी, दीपक सुमन आदि का विशेष योगदान रहा। आभार पूजा माली ने माना।

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Web Title: कंडों की जलाएं होली, पर्यावरण अनुकूलता के लिए टेसू, हल्दी और चंदन से रंग बनाएं
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