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धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया | मुंबई

धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया | मुंबई बजट पेश होने के एक माह बाद रिटर्न के मामले में आम निवेशकों को निराश होना पड़ा है।...

Danik Bhaskar | Mar 04, 2018, 02:35 AM IST
धर्मेन्द्र सिंह भदौरिया | मुंबई

बजट पेश होने के एक माह बाद रिटर्न के मामले में आम निवेशकों को निराश होना पड़ा है। खासतौर पर शेयर बाजार, म्युचुअल फंड में निवेश करने वालों को। इस दौरान शेयर बाजार में करीब पांच फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त जहां सोना लगभग फ्लैट रहा वहीं दूसरी ओर रियल एस्टेट में बिक्री बढ़ी है। क्रेडाई के नेशनल प्रेसीडेंट जक्षय शाह के अनुसार रियल एस्टेट में जहां देश के सात प्रमुख बड़े शहरों में दिसंबर 2017 की तुलना में जनवरी 2018 में बिक्री 250 यूनिट से बढ़कर 500 यूनिट पर पहुंच गई। वहीं फरवरी माह के दौरान बिक्री जनवरी माह से 20 फीसदी अधिक हुए हैं।

बैंकों के द्वारा लोन ब्याज दरों में बढ़ोत्तरी का रियल एस्टेट पर प्रभाव पड़ सकता है। हालांकि बाजार विश्लेषकों के अनुसार उतार-चढ़ाव होने के बावजूद मार्च माह के दौरान शेयर बाजार के बेहतर होनेे की उम्मीद है। फरवरी माह के दौरान म्युचुअल फंड्स में भी निवेशकों को निगेटिव रिटर्न मिला है। रिसर्च फर्म्स के अनुसार लार्ज कैप इक्विटी म्युचुअल फंड्स ने एक फरवरी से एक मार्च 2018 तक 4.8 फीसदी का निगेटिव रिटर्न दिया है।

रियल एस्टेट कंसल्टेंट फर्म एनारॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने बताया कि फरवरी माह के दौरान बिक्री बढ़ी है। नवंबर-दिसंबर 2017 की तुलना में जनवरी-फरवरी 2018 माह के दौरान बिक्री दो गुना हुई है। बल्कि मुंबई और बेंगलुरु में नए प्रोजेक्ट लांच भी हुए हैं। दिसंबर 2018 तक बिक्री में बढ़ोत्तरी बनी रहने की उम्मीद है। अर्थव्यवस्था बेहतर कर रही है। बिल्डर को समझ आ गया है कि सरकार प्रीमीयम और लक्जरी श्रेणी के रियल एस्टेट क्षेत्र सरकार की प्राथमिकता नहीं रहे हैं बल्कि अफोर्डेबल हाउसिंग है। इसलिए बिल्डर्स ने भी जरूरत और मांग के अनुरूप बड़े और छोटे शहरों में अफोर्डेबल हाउसिंग प्रोजेक्ट ही किए। फ्लैट्स या घरों का साइज भी 900 वर्ग फुट से घटाकर 400-500 वर्ग फुट कर दिया गया। सरकार ने अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए भी जीएसटी दर 12 फीसदी से घटाकर आठ फीसदी कर दी है। पुरी ने कहा कि कैपिटल गैन टैक्स इक्विटी और फंड पर लगने का फायदा रियल एस्टेट में अभी देखने को नहीं मिला है, शायद यह असर एक अप्रैल से दिखे। वहीं दूसरी ओर बैंकों के द्वारा ब्याज दर बढ़ोत्तरी का नकारात्मक असर इस क्षेत्र पर पड़ेगा।

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