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भास्कर संवाददाता | गुना/बमोरी

भास्कर संवाददाता | गुना/बमोरी मथुरा-वृंदावन की लट्ठमार होली तो जग प्रसिद्ध है, लेकिन इससे मिलती-जुलती परंपरा...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 02, 2018, 03:00 AM IST

भास्कर संवाददाता | गुना/बमोरी

मथुरा-वृंदावन की लट्ठमार होली तो जग प्रसिद्ध है, लेकिन इससे मिलती-जुलती परंपरा बमोरी के कई गांवों में भी देखने मिलती है। हालांकि अब यह परंपरा कुछ भील व सहरिया बाहुल्य इलाकों तक सिमटकर रह गई है। इसी तरह चोरी की लकड़ी और कंडों से होलिका दहन की परंपरा भी अब खत्म होती जा रही है। लट्ठमार होली की झलक अब भी मोरखेड़ी, धुबघटा, बड़नपुर, आटाखेड़ी, डुमावन, बन्नी खेड़ा जैसे गांवों में दिखाई दे जाती है। होली पर अगर आप ऐसे ही किसी इलाके से गुजर रहे हों तो महिलाएं आपका रास्ता रोककर लाठियों से पीटना शुरू कर देंगी। रामनारायण भील बताते हैं कि यह पिटाई तब तक चलती है, जब तक कि पिटने वाले पुरुष पीटने वाली महिलाओं को गुड़ नहीं देते।

पारदी महिलाएं नए कपड़े पहनकर खेलती हैं होली : आजकल कुछ लोग होली के लिए खासतौर पर नए सफेद कपड़े बनवाते हैं। यह नया ट्रेंड है जो फिल्मों से आया है। पर एक समुदाय में तो यह ट्रेंड दशकों से चल रहा है। पारदी समुदाय में महिलाएं होली खेलने के लिए खासतौर पर नए कपड़े बनवाती हैं।

कंडों की हाेली का कारवां भी बढ़ चला : 10 साल पहल शहर में तलैया मोहल्ला की एक होलिका दहन समिति ने सबसे पहले कंडों की हाेली जलाने की नई परंपरा शुरू की थी। धीमी रफ्तार से ही सही, लेकिन यह सिलसिला बढ़ता जा रहा है। साल दर साल इसमें कोई न कोई नई समिति जुड़ जाती है।

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Web Title: भास्कर संवाददाता | गुना/बमोरी
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