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देश के 101 पिछड़े जिलों में हम 47वें नंबर पर स्वास्थ्य-कृषि, शिक्षा में स्थिति ज्यादा खराब

नीति आयोग ने 28 मार्च को देश के सबसे पिछड़े 101 जिलों की रैंकिंग जारी की है। इसमें गुना का स्थान 47वां है। रैंकिंग में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:00 AM IST

नीति आयोग ने 28 मार्च को देश के सबसे पिछड़े 101 जिलों की रैंकिंग जारी की है। इसमें गुना का स्थान 47वां है। रैंकिंग में मप्र के कुल पांच जिले शामिल किए गए हैं, जिनमें गुना सबसे नीचे रहा। अब नीति आयोग ने 2022 तक इन जिलों की कायापलट का लक्ष्य हाथ में लिया है।

इसलिए इन जिलों को पिछड़ा जिला न कहकर सरकार ने इन्हें ‘एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट’ या महत्वाकांक्षी जिलों का नाम दिया है। गुना की स्वास्थ्य में सबसे ज्यादा हालत खराब है। इसमें जिले को 47वंी रैंक मिली है। वहीं कृषि में भी हमें 32वीं रैंक मिली है।

मई माह से पता चलेगा कितनी हो रही है तरक्की : एक अप्रैल से हर जिले की रैंकिंग आॅनलाइन देखी जा सकेगी। विकास के पांच क्षेत्र में किसने कितनी तरक्की की इसकी स्कोरिंग मई माह से शुरू हो जाएगी। इसमें रोजाना बदलाव होगा। समूचे प्रशासनिक तंत्र को रोजाना डाटा फीड करना होगा।

इस चुनौती को पूरा करेंगे

2022 तक हमें जिले को नंबर एक पर लाना है। हमारी मौजूदा स्थिति एक चुनौती है तो अवसर भी है। हमने अस्पतालों में नर्सिंग व अन्य स्टाफ की मांग की है। वैसे यह रैंकिंग 2014 के आंकड़ों के आधार पर है। वर्तमान में हमारी स्थिति बेहतर है। -राजेश जैन, कलेक्टर

जिले में 50 फीसदी से ज्यादा डॉक्टरों और नर्सों के पद खाली पड़े हैं, पारंपरिक खेती से स्थिति खराब

गुना ओवर आल रेंकिंग 47, प्रतिशत 35.92

73

48

वित्तीय समावेशन

बुनियादी ढांचा

10

तीन सबसे कमजोर सेक्टर :नीति आयोग की सूची में मप्र के 4 और जिले भी शामिल इन जिलों को पिछड़ा न कहकर महत्वाकांक्षी कहा गया

स्वास्थ्य व पोषण (47वीं रैंकिंग )

जिले में सिर्फ 8 फीसदी गर्भवती महिलाओं की 4 प्रसव पूर्व जांच हो रही हैं।

50 फीसदी नर्सिंग व डॉक्टरों के पद खाली पड़े हैं

5 साल से कम उम्र वाले 43 फीसदी बच्चों का उनके उम्र के मुताबिक वजन व लंबाई कम है। यानि उनके पोषण की स्थिति खराब है।

71 फीसदी आंगनवाड़ी केंद्रों के पास अपने खुद के भवन ही नहीं है।

35 फीसदी बच्चों का अब भी टीकाकरण नहीं हो पाता है। यानि उन्हें पूरे टीके नही लग पाते हैं।

50 आंगनवाड़ी भवन स्वीकृत

आंगनवाड़ी केंद्रों को समय पर खुलवाना हमारी प्राथमिकता में होगा। इसके लिए अप्रैल माह से ही सघन निरीक्षण अभियान शुरू होगा। रैंकिंग के आधार पर हमें 50 आंगनवाड़ी केंद्रों के लिए भवन स्वीकृत हो गए हैं। इसके लिए पैसा भी आ गया है। यह काम जल्द शुरू होगा। -राम तिवारी, परियोजना अधिकारी महिला बाल विकास

48

15

कृषि/जलसंसाधन

शिक्षा

39

स्वास्थ्य

32

कार्ययोजना :इन जिलों में केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के लिए प्रभारी संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव स्तर के अधिकारी भी नियुक्त किए है।

राजगढ़

47

अन्य जिलों की रेंकिंग

छतरपुर

दमोह

19

15

विदिशा

26

गुना

47

42

कृषि व जल संसाधन (32 वीं रैंकिंग)

सबसे बड़ी कमी माइक्रो एरिगेशन को लेकर है। जो सिर्फ 7 फीसदी क्षेत्र में हो रही है।

उच्च मूल्य कृषि यानि फल, सब्जी और फूलों की खेती सिर्फ 2 फीसदी।

पीएम फसल बीमा का कवरेज कम है। अब भी 30 फीसदी किसान इस दायरे से बाहर

किसानों को परंपरागत खेती से ऊपर उठाने पर देंगे जोर

हमारा सबसे ज्यादा जोर सिंचाई के नए साधनों के इस्तेमाल पर रहेगा। शासन द्वारा किसानों को उपकरणों पर भारी सब्सिडी दी जा रही है। अब जरूरी यह है कि किसानों को उन्हें अपनाने के लिए तैयार किया जाए। उत्पादकता, मिट्टी परीक्षण आदि में हमारी स्थिति मप्र में काफी बेहतर है। -यूएस तोमर, उपसंचालक कृषि

इस तरह मिलेंगे नंबर

सबसे ज्यादा 30-30 फीसदी अंक शिक्षा एवं स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए रखे गए हैं। यानि 60 फीसदी अंक इन दोनों क्षेत्रों में की जाने वाली तरक्की पर निर्भर हैं। इन दो सेक्टर में कुल 21 सूचकांक बनाए गए हैं, जिनके आधार पर तरक्की का मापन होगा। वहीं कृषि व सिंचाई के 20, बुनियादी ढांचे और वित्तीय समावेशन के 10-10 फीसदी अंक रहेंगे। इन पांच सेक्टर में कुल 49 सूचकांक बनाए गए हैं।

शिक्षा (19वीं रैंकिंग)

उम्र के मुताबिक बच्चों के ज्ञान का स्तर कम है। कक्षा तीन में 42 फीसदी बच्चों की गणित में दक्षता कमजोर है। जबकि भाषा में 69 फीसदी बच्चे कमजोर हैं। 5वीं में स्थिति और भी खराब है। करीब 54 फीसदी बच्चे गणित में कमजोर हैं। इसी तरह आठवीं में भी 40 फीसदी बच्चे गणित और 57 फीसदी भाषा में कमजोर हैं।

ड्रॉप आउट रेट बहुत ज्यादा है। कक्षा एक में प्रवेश लेने वाले 100 में से सिर्फ 43 बच्चे ही हायर सेकंडरी स्तर पहुंच पाते हैं।

करीब 40 फीसदी महिलाएं अब भी निरक्षर हैं, जो सबसे बड़ी चुनौती है।

शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करेंगे

हमारी कोशिश होगी कि प्राइमरी व मिडिल स्कूल के स्तर पर शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित हो। अगले सत्र ई-अटेंडेंस व्यवस्था लागू हो रही है। इससे काफी फर्क पड़ेगा। आने वाले दिनों में हम सघन मॉनिटरिंग पर जोर देंगे। इसके अलावा निरीक्षण के दिन तय किए जाएंगे।-संजय श्रीवास्तव, डीईओ

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