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सदाचरण से संस्कारों की शिक्षा प्राप्त होती है : मुनि निर्णय सागर

गुना | पाठशाला के बच्चों को सदैव प्रोत्साहन देते रहना चाहिए। इससे बच्चों को पाठशाला आने की प्रेरणा प्राप्त होती है...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 02, 2018, 03:00 AM IST

गुना | पाठशाला के बच्चों को सदैव प्रोत्साहन देते रहना चाहिए। इससे बच्चों को पाठशाला आने की प्रेरणा प्राप्त होती है । गुना के विभिन्न जिनालयों में सांयकाल संचालित धार्मिक शिक्षण पाठशालाएं संस्कार प्रदान करने का कार्य कर रही हैं। इससे बच्चे ही नहीं बड़े भी लाभान्वित होते हैं। उक्त धर्मोपदेश मुनि निर्णय सागर ने विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए चौधरी मोहल्ला स्थित सभाग्रह में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि पाठशाला का एक संस्कारों से भूषित बालक अन्य कई को अपने सदाचरण से सद् संस्कारों की शिक्षा प्रदान कर सकता है। इस बात को स्पष्ट करने के लिए उन्होंने एक रोचक कहानी सुनाई। इसके पूर्व मुनि पदम सागर ने कहा कि विगत वर्ष जेष्ठ एवं श्रेष्ठ मुनि समय सागर मुनिराज एवं चतुर्विद संघ के मंगलमय सानिध्य में पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव संपन्न हुआ। गुना नगर के समस्त जिनालय एक से बढ़कर एक हैं। प्रत्येक जैन धर्मावलंबियों को इन जिनालयों एवं जिन प्रतिमाओं के दर्शन कर अपने जीवन को धन्य करना चाहिए। प्रत्येक जैन को श्रावक के छह आवश्यकों का पालन करना चाहिए। प्रवचन सभा में उपस्थित आनंद कुमार जैन ने बताया प्रवचनों के पूर्व धार्मिक शिक्षण पाठशालाओं के बच्चों द्वारा अष्ट द्रव्य से आचार्य विद्यासागर महाराज का पूजन किया गया। प्रवचन सभा में प्रबंधकारिणी समिति सहित बड़ी संख्या में जैन धर्मावलंबी उपस्थित रहे।

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