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सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस सुनेंगे, संविधान पीठ तय करने का अधिकार भी उनके ही पास रहेगा संविधान पीठ में...

Dainik Bhaskar

Feb 02, 2018, 03:20 AM IST
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सभी जनहित याचिकाएं चीफ जस्टिस सुनेंगे, संविधान पीठ तय करने का अधिकार भी उनके ही पास रहेगा

संविधान पीठ में कौन-कौन से जज शामिल होंगे, यह तय करने का अधिकार भी चीफ जस्टिस के पास ही रहेगा। उल्लेखनीय है कि 12 जनवरी को जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर और कुरियन जोसेफ ने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर काम के बंटवारे में भेदभाव का आरोप लगाया था। इन्होंने संविधान पीठ में भी सिर्फ पहले पांच वरिष्ठ जजों को ही रखने की मांग की थी।

पुराना सिस्टम :

चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री बांटती थी काम: काम आवंटन का कोई क्राइटेरिया नहीं था। चीफ जस्टिस की सलाह से रजिस्ट्री केस बांटती थी। सिर्फ चीफ जस्टिस ही जानते थे कि किसके पास कैसे मामले हैं। वह अपनी मर्जी से किसी के भी पास जनहित याचिका भेज सकते थे।

नई व्यवस्था

क्राइटेरिया तय हुआ, किसके पास जाएगा कौन-सा सब्जेक्ट: व्यवस्था पारदर्शी हो गई। सबको पता होगा कि किस सब्जेक्ट की सुनवाई कौन-सी बेंच करेगी। जनहित याचिकाओं पर सुनवाई सिर्फ चीफ जस्टिस की बेंच ही करेगी। यह सिस्टम कई हाईकोर्ट में पहले से लागू है।

मप्र को केंद्र से मिलेंगे 51 हजार करोड़

यह राशि अगले वित्तीय वर्ष मेंं बढ़कर 58000 करोड़ तक हो सकती है। वित्त मंत्री जयंत मलैया के अनुसार केंद्र से आश्वासन मिलने के बाद प्रदेश सरकार की लंबित योजनाओं के क्रियान्वयन और नई योजनाओं को जमीन पर उतारने में वित्तीय समस्या नहीं आएगी। मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों ने गुरुवार को संसद में पेश बजट पर दिन भर नजर बनाए रखी। एक अफसर के अनुसार फसल के न्यूनतम समर्थन मूल्य को डेढ़ गुना करने, 50 करोड़ लोगों को 5 लाख तक का सालाना मुफ्त इलाज की सुविधा से मध्यप्रदेश के किसानों और गरीबों को अन्य राज्यों से ज्यादा लाभ मिलेगा। यही नहीं पशुपालन और मत्स्य पालन के आधारभूत संरचना के विकास के लिए 10 हजार करोड़ के प्रावधान के अलावा किसानों के कर्ज के लिए 11 हजार करोड़ के फंड का लाभ भी प्रदेश को मिलेगा। प्रदेश की अधिकांश आबादी प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष तौर पर कृषि के क्षेत्र से जुड़ी है और उनकी जीवन इससे होने वाली आमदनी पर निर्भर रहता है। उम्मीद है कि बजट में की गईं घोषणाओं से इस सेक्टर को मदद मिलेगी।

बांस मिशन से मिलेगा फायदा : सरकार ने राष्ट्रीय बांस मिशन बनाने की घोषणा की है। इसके तहत 1500 करोड़ रुपए का आवंटन किया जाएगा। गौरतलब है कि मध्यप्रदेश बांस से बनने वाले उत्पाद लाखों परिवार के रोजगार का माध्यम है। ऐसे में बांस से बनने वाली वस्तुओं पर सरकार के नई घोषणा से मप्र को लाभ मिल सकता है। बता दें कि बांस उत्पादन में मप्र देश के प्रथम पांच राज्यों में शामिल है।

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