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असीमानंद बरी, फैसला सुनाने के बाद जज ने इस्तीफा दिया

11 साल पुराने मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद समेत पांच आरोपियों को स्पेशल एनआईए कोर्ट ने सोमवार को...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 17, 2018, 02:50 AM IST

असीमानंद बरी, फैसला सुनाने के बाद जज ने इस्तीफा दिया
11 साल पुराने मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में स्वामी असीमानंद समेत पांच आरोपियों को स्पेशल एनआईए कोर्ट ने सोमवार को बरी कर दिया। कोर्ट ने कहा कि एनआईए एक भी आरोप साबित नहीं कर पाई। फैसला सुनाने के कुछ घंटे के बाद ही एनआईए के स्पेशल जज रवींद्र रेड्‌डी ने इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इस्तीफे के पीछे निजी वजह बताई है, लेकिन इसकी टाइमिंग पर विवाद शुरू हो गया। उल्लेखनीय है कि चार सौ साल पुरानी मक्का मस्जिद में 18 मई 2007 को जुमे की नमाज के वक्त हुए ब्लास्ट में नौ लोग मारे गए थे। 58 घायल हुए थे। ब्लास्ट के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शनों को नियंत्रित करने में पुलिस की गोली से 5 और लोग मारे गए थे। शेष | पेज 4 पर





पुलिस, सीबीआई और फिर एनआईए, सभी ने की जांच

ब्लास्ट की शुरुआती जांच हैदराबाद पुलिस ने की थी। उसके बाद सीबीआई को जांच सौंप दी गई थी। 2011 में एनआईए ने यह केस संभाला। इस केस में सीबीआई ने एक चार्जशीट दाखिल की थी, जबकि एनआईए ने दो सप्लीमेंटरी चार्जशीट दाखिल की थीं। पांचाें आरोपियों के बरी होने पर एनआईए ने कहा कि फैसले की कॉपी मिलने के बाद अगले कदम पर फैसला लिया जाएगा।

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“हिंदू आतंकवाद’ के दूसरे मामले में असीमानंद बरी, समझौता ब्लास्ट केस में अभी जमानत पर:

हिंदू आतंकवाद के नाम पर यूपीए सरकार के वक्त गिरफ्तार किए गए स्वामी असीमानंद को दूसरे मामले में राहत मिली है। 2007 के अजमेर दरगाह ब्लास्ट केस में भी पिछले साल मार्च में जयपुर की अदालत ने उसे बरी कर दिया था। अभी 2007 के समझौता ब्लास्ट केस में वह आरोपी है। असीमानंद को सीबीआई ने 2010 में गिरफ्तार किया था। 2017 में उसे जमानत मिल गई।

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कुल 10 आरोपी; पांच बरी हुए, एक की हत्या, दो अब तक फरार:

मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस में 10 आरोपी थे। मुकदमा सिर्फ पांच पर चला। मुकदमे के बाद वनवासी कल्याण आश्रम के प्रमुख स्वामी असीमानंद, बिहार के आरएसएस प्रचारक देवेंद्र गुप्ता, मध्यप्रदेश के आरएसएस कार्यकर्ता लाेकेश शर्मा के अलावा भरत मोहनलाल रातेश्वर उर्फ भरत भाई और राजेंद्र चौधरी को बरी कर दिया गया। एक आरोपी सुनील जोशी की हत्या कर दी गई। दो आरोपी संदीप वी डांगे और रामचंद्र कालसंगरा अभी फरार हैं। दाे आरोपियों के खिलाफ अभी जांच जारी है।

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गृह मंत्रालय के पूर्व अधिकारी बोले- हिंदू आतंकवाद का एंगल नहीं था:

गृह मंत्रालय के पूर्व अवर सचिव आरवीएस मणि ने कोर्ट के फैसले के बाद कहा, “मुझे इसी फैसले की उम्मीद थी। सारे सबूत मनगढ़ंत थे। इस केस में हिंदू आतंकवाद जैसा कोई एंगल नहीं था।’ उल्लेखनीय है कि मणि ने 2016 में दावा किया था कि यूपीए सरकार के दौरान उन पर दबाव डालकर इशरत जहां केस में दूसरा हलफनामा दाखिल करवाया गया था, जिसमें इशरत और साथियों के लश्कर से संबंधों की बात हटा दी गई थीं।

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रवींद्र रेड्‌डी

असीमानंद ने बयान में कहा था- हिंदू धर्मस्थलों पर हमलों से गुस्से में थे, अदालत में मुकरा; यहीं से कमजोर हुआ एनआईए का केस

असीमानंद का 2010 में दिल्ली में मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष दिया इकबालिया कबूलनामा चार्जशीट का एक अहम हिस्सा था। दावा था कि हिंदुओं और उनके मंदिरों पर हमलों से आरोपी गुस्से में थे। बदले के लिए मुस्लिम धर्मस्थलों पर हमलों की साजिश रची। हालांकि, बाद में वह अपने इस बयान से मुकर गया था। इस केस में 226 चश्मदीदों के बयान दर्ज किए गए थे। 411 दस्तावेज भी पेश किए गए।

पहले मक्का मस्जिद ब्लास्ट में आतंकी संगठन हरकत उल जमात ए इस्लामी यानी हूजी पर शक था। 70 युवकों को हिरासत में भी लिया गया था। बाद में आंध्रप्रदेश अल्पसंख्यक आयोग ने ऐसे 61 युवकों को बेगुनाही का सर्टिफिकेट भी दिया था। सरकार ने इन्हें मुआवजा भी दिया था।

सियासत शुरू : भाजपा बोली- माफी मांगें सोनिया-राहुल

एनआईए कोर्ट का फैसला आने के बाद भगवा आतंकवाद को लेकर एक बार फिर सियासत छिड़ गई। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि पी चिदंबरम और सुशील शिंदे जैसे नेताओं ने भगवा आतंकवाद शब्द का इस्तेमाल कर हिंदुओं का अपमान किया था। इसके लिए सोनिया और राहुल गांधी माफी मांगें। वहीं, कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद ने कहा कि दर्जनों गवाह मुकर गए हैं। इस पर सवाल तो खड़े होते ही हैं। इसी बीच, एआईएमआईएम के नेता और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि एनआईए ने सही पैरवी नहीं की।

असीमानंद के वकील जेपी शर्मा के मुताबिक सबूतों को जांचने के बाद कोर्ट ने कहा कि आरोप साबित नहीं होता। असीमानंद का बयान कबूलनामा नहीं था। भगवा आतंकवाद की थ्योरी के लिए बयान जबरन दिलवाया था। कोर्ट ने भी यह माना। संत समाज की छवि बिगाड़ने के लिए सीबीआई ने इन लोगों को फंसाया। एनआईए के गवाह ले. कर्नल श्रीकांत पुरोहित भी गत फरवरी में अपने बयान से मुकर गए थे।

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