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1500 किसान बुलाए, आए 1000, खाली कुर्सियों पर बोले- कृषि उपसंचालक टेंट वाले ने ज्यादा लगा दीं

Guna News - किसानों को लाई कुछ बसें लौटी ही नहीं, 2 घंटे तक करना पड़ा इंतजार भास्कर संवाददाता | गुना प्रदेश सरकार के...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:50 AM IST
1500 किसान बुलाए, आए 1000, खाली कुर्सियों पर बोले- कृषि उपसंचालक टेंट वाले ने ज्यादा लगा दीं
किसानों को लाई कुछ बसें लौटी ही नहीं, 2 घंटे तक करना पड़ा इंतजार

भास्कर संवाददाता | गुना

प्रदेश सरकार के फ्लैगशिप कार्यक्रम कृषक समृद्धि योजना के तहत सोमवार को आयोजित कार्यक्रम में तमाम इंतजामों के बावजूद बहुत कम किसान पहुंचे। पीजी कॉलेज स्टेडियम में हुए कार्यक्रम में किसानों के लिए रखी गईं 2 हजार से ज्यादा कुर्सियां खाली पड़ी रहीं। हालांकि कृषि विभाग के अधिकारी ने इसके लिए टेंट हाउस संचालक को दोषी ठहरा दिया। उनका कहना था कि हमने तो 1500 किसान ही बुलाए थे, लेकिन कुर्सियां 3000 से ज्यादा रखवा दी गईं। कार्यक्रम में जब सीएम के भाषण का प्रसारण हो रहा था, तब तो वहां मौजूद किसानों की संख्या एक हजार भी नहीं थी। यह स्थिति तब थी, जबकि जिलेभर से किसानों को लाने के लिए बाकायदा बसों का इंतजाम किया गया था। कार्यक्रम में गुना विधायक पन्नालाल शाक्य के अलावा चांचौड़ा विधायक ममता मीणा भी थीं। हालांकि विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले के 6618 किसानों के खातों में योजना के तहत 15.62 करोड़ रुपए की राशि पहले ही भेजी जा चुकी है। कार्यक्रम में कलेक्टर राजेश जैन, भाजपा जिलाध्यक्ष राधेश्याम पारीक आदि भी मौजूद थे।

सबक: इससे पहले हुए कार्यक्रम में जब सीएम के भाषण का प्रसारण हो रहा था तब अतिथि मंच पर चाय की चुस्कियां ले रहे थे, कलेक्टर ने सभी को नीचे बैठने को कहा था

जनता के लिए बड़ी स्क्रीन, मंचासीनों ने अपने लिए अलग टीवी लगवाया

कार्यक्रम के दौरान सीएम के भाषण का प्रसारण भी दिखाया जाना था। आमतौर पर इसके लिए एक बड़ी स्क्रीन लगाई जाती है। आम लोगों के अलावा कार्यक्रम के गणमान्य अतिथि भी भाषण के दौरान मंच से नीचे उतरकर इस स्क्रीन पर ही प्रसारण देखते हैं। पर इस कार्यक्रम में मंचासीनों को नीचे उतरना न पड़े, इसके लिए वहीं पर एक अलग टीवी का इंतजाम कर दिया गया था। गणमान्यों ने मंच पर ही बैठकर भाषण देखा व सुना।

जब 1500 किसान बुलाए तो 3000 कुर्सियां किसके लिए मंगाई गईं

भारी भरकम खर्च

इस कार्यक्रम की तैयारियों को देखकर लगता है कि इस पर भारी खर्च किया गया था। विभाग के अधिकारी सीधे तौर पर यह जानकारी नहीं दे रहे हैं। पर लंबे-चौड़े शामियाने, किसानों को लाने व वापस ले जाने के लिए बसों की व्यवस्था, उनके भोजन का इंतजाम आदि पर मोटे तौर पर 10 से 15 लाख रुपए खर्च हुए होंगे।

किसानों को छोड़कर गायब हुईं बसें

किसानों को लाने और वापस उनके गांव तक छोड़कर आने की जिम्मेदारी कृषि विस्तार अधिकारियों को दी गई थी। हालत यह हुई कि किसानों को लाने वाली कई उन्हें छोड़ने के बाद गायब हो गईं। राघौगढ़, पीलीघटा, चांचौड़ा इलाके से आए कई कार्यक्रम के बाद डेढ़ से दो घंटे तक बसों का इंतजार करते रहे।

क्या कहा अतिथियों ने

जलसंरक्षण पर जोर दें




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