आरोन से करीब 25 किमी

Guna News - किनारे पर नहाते-नहाते तीनों बच्चे तालाब में ईंट-भट्‌टों के लिए खोदे गए गड्‌ढों में पहुंचे तो मिट्‌टी में धंसकर...

Oct 13, 2019, 06:30 AM IST
किनारे पर नहाते-नहाते तीनों बच्चे तालाब में ईंट-भट्‌टों के लिए खोदे गए गड्‌ढों में पहुंचे तो मिट्‌टी में धंसकर डूबे, बचाने कूदी मां बची, चाची डूबी


आरोन से करीब 25 किमी दूर खेरखेड़ी गांव में जिस परिवार के 3 बच्चे व महिला डूबकर मारे गए, उनका घर उसी तालाब के किनारे से 10 मीटर की दूरी पर है। घर के बच्चे रोजाना ही तालाब में नहाने जाते थे और परिवार के लोग इसे लेकर चिंतित भी नहीं रहते थे। इसकी बड़ी वजह यह थी कि आमतौर पर वे उस हिस्से में नहाते थे, जहां तालाब वह कम गहरा रहता है पर शनिवार को यह बच्चे दूसरे हिस्से में चले गए जहां तालाब की गहराई अनिश्चित थी। गांव के चौकीदार अनवर अली ने बताया कि तालाब के जिस हिस्से में बच्चे डूबे, वहां के कैचमेंट एरिया से ईंट भट्टों के लिए काली मिट्‌टी खोदी जाती थी। बीते 2 साल से कम बारिश होने की वजह से तालाब में बहुत पानी नहीं भरता था। इसलिए यह गड्‌ढे वाले हिस्से अलग दिख जाते थे। पर इस बार रिकॉर्ड बारिश की वजह से 5 साल पहले बना यह तालाब पहली बार लबालब भर गया।

परिवार ही उजड़ा

घटना में मारे गए लोग

1. मोनिका पुत्री रामचरण (10 साल)

2. करण पुत्र रामचरण (7 साल)

3. अनिकेत (10 साल) जिसका पिता मनोज प्रतापति, रामचरण का सगा छोटा भाई है। वह इंदौर में रहता है लेकिन सोयाबीन की कटाई के लिए कुछ दिन से गांव आया हुआ था।

4. सीमाबाई प|ी मिथुन प्रजापति (23 साल)

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चौकीदार के मुताबिक मिट्‌टी खोदे जाने से हुए गहरे हिस्सों में ही बच्चे फंस गए। यहां मिट्‌टी धंसने वाली थी। इसलिए एक बार डूबने के बाद बच्चे और उनकी चाची एक बार भी ऊपर नहीं दिखी। चौकीदार ने बताया कि मारे गए दो बच्चों की मां फूलबाई प|ी रामचरण उम्र 38 साल, भी वहीं फंस गई थी, लेकिन उसे निकाल लिया गया। अंतिम संस्कार के लिए उसे गांव ले आए थे लेकिन देर शाम को अचानक उसकी तबियत बिगड़ने लगी। उसे वापस आरोन अस्पताल ले जाया गया।

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खेरखेड़ी के इसी तालाब में डूबने से चार की मौत हो गई।

डायल 100 को पहुंचने में देर लगी इसलिए चौकीदार अपने वाहन से शवों को लाया

चौकीदार को घटना की जानकारी करीब 15 मिनट बाद मिली। उसने डायल 100 को सूचना दे दी। इस बीच गांव के लोगों ने तालाब में डूबे सभी चार के शव बाहर निकाल लिए थे। घटना आरोन थाने से करीब 25 किमी दूर की थी और ऊपर से सड़कों की हालत भी खराब। इसलिए पुलिस के आने में देर लगी। इस दौरान चौकीदार ने अपने चार पहिया वाहन में ही चारों शव व फूलबाई को रखा और आरोन के लिए रवाना हो गया। उसने बताया कि रास्ते में पुलिस का वाहन भी मिल गया था। अस्पताल पहुंचने पर डाक्टरों ने 4 को मृत घोषित कर दिया।

घटनाक्रम : अचानक बच्चों की आवाज आना बंद हुई तब पता चला कि अनहोनी हो गई

यह घटना दोपहर करीब 12 बजे के आसपास की है। गांव के चौकीदार व अन्य सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बच्चे रोजाना नहाते थे इसलिए किसी को इस अनहोनी की चिंता नहीं थी। पर कुछ देर में अचानक बच्चों की आवाज अाना बंद हो गई तो उनकी चाची सीमाबाई प|ी मिथुन प्रजापति को चिंता हुई। उसने देखा कि बच्चे कहीं नहीं दिख रहे हैं। तालाब में भी किसी तरह की कोई गतिविधि नहीं दिख रही थी। उसने अपने जेठ रामचरण, जिसके दो बच्चे मोनिका व करण इस घटना में मारे गए, को यह बात बताई। वह सोयाबीन कटाई के बाद आराम करने के लिए लेटा हुआ था। उधर सीमा को लग गया था कि कोई अनहोनी हो गई है, इसलिए वह बच्चे डूब गए-बच्चे डूब गए चिल्लाते हुए तालाब में उतर गई। देखते ही देखते वह भी अंदर चली गई। उधर रामचरण ने महज 100 मीटर दूर स्थित गांव के लोगों को बुला लिया। इस दौरान उसकी प|ी फूलबाई भी तालाब में कूद गई थी। उसे जब तक निकाला गया, तब तक उसके पेट में भी पानी भर गया था। हालांकि वह बच गई।

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