गुमनाम शहीद, न उसे राजपाट मिलना है, न सत्ता, फिर भी युद्ध में खून उनका ही बहता है

Guna News - युद्ध होते हैं तो सेनापतियों, राजाओं और महारथियों के तो इतिहास खूब गुणगान करता है लेकिन इसकी असली कीमत चुकाने वाले...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 07:20 AM IST
Guna News - mp news anonymous martyr nor is he to meet the palace nor power yet blood flows in the war
युद्ध होते हैं तो सेनापतियों, राजाओं और महारथियों के तो इतिहास खूब गुणगान करता है लेकिन इसकी असली कीमत चुकाने वाले सैनिकों को कौन याद करता है? उनका बलिदान गुमनाम रह जाता है। न उन्हें कोई राजपाट मिलना है न ही कोई सत्ता। फिर भी युद्ध में सबसे ज्यादा खून उनका ही बहता है।

रविवार शाम को मानस भवन में विनर सोसायटी आर्ट एंड कल्चर द्वारा मंचित श्मशान महापर्व नाटक यही संदेश देता है। कहने को तो यह महाभारत पर आधारित है लेकिन इसका संदेश समकालीन है। यह उन लोगों से सीधा सवाल करता है, जो युद्धोन्माद फैलाने में लगे रहते हैं। नाटक का नायक चांडाल युद्धभूमि से हर शाम को आने वाले सैनिकों के शवों का अंतिम संस्कार करता है। यह उसके रोज का काम है लेकिन वह भी द्रवित हो उठता है। वह भगवान कृष्ण को कहता है - आपने मुझे चांडाल के रूप में जन्म तो दिया लेकिन हृदय भी तो चांडाल का दे देते।

इस नाटक में करीब 30 कलाकारों ने मंच पर अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन कर दर्शकों का मन मोह लिया।

नाटक का निर्देशन मधुर जैन ने किया जो कि मध्यप्रदेश नाट्य विद्यालय से डिप्लोमा प्राप्त प्रशिक्षित रंगकर्मी है और पिछले 8 वर्षों से लगातार रंगकर्म के क्षेत्र में कार्यरत हैं। चांडाल की मुख्य भूमिका में रहे सौरभ जैन (डब्बू) और गांधारी का अहम किरदार निभाया रेणुका बरसैया ने। यह शहर के दर्शकों के लिए पहला अवसर था जब इतने सारे कलाकारों में मंच पर एक साथ अभिनय करते देखा। नाटक के अंत में निर्देशक व कलाकारों ने कहा कि शहर में नाटकों के मंचन के लिए अब कोई ऑडिटोरियम नहीं है। यह दुर्भाग्य की बात है कि एक नगर भवन था, जिसे गिरा दिया गया और आज तक नया नहीं बना।

मानस भवन में विनर सोसायटी आर्ट एंड कल्चर द्वारा मंचित श्मशान महापर्व नाटक का मंचन करते कलाकार।

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