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जूते, सैंडल तो दूर चप्पल भी उतरवा लीं, जबकि गाइड लाइन में नहीं था प्रावधान

5 महीने पहले
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एमपी बाेर्ड परीक्षा में 12वीं का पहला पेपर सोमवार को हुआ। जिले के 61 केंद्रों पर कुल 19 हजार 928 बच्चे इस परीक्षा में बैठे। नकल रोकने के लिए सख्त इंतजाम के चक्कर में कई जगहों पर केंद्राध्यक्ष नियम के परे भी चले गए। इसके चलते बच्चों के जूते-चप्पल उतरवा लिए गए। तो कहीं मेन गेट ताला लटका दिया गया।

जिला शिक्षा अधिकारी आरएल उपाध्याय ने बताया कि पहले दिन किसी तरह का कोई नकल प्रकरण नहीं बना। न ही सामूहिक नकल की कोई शिकायत कहीं से मिली। परीक्षा सुबह 9 बजे से शुरू होना थी और बच्चे 8.30 बजे से ही केंद्र पर पहुंच गए थे।

इस बार समय को लेकर ज्यादा ही सख्ती बरती जा रही थी। तय तय समय के बाद किसी को भी अंदर न आन देने के निर्देश थे। सिर्फ
खास परिस्थितियों में ही परीक्षा आरंभ होने के 15 मिनट बाद
प्रवेश की अनुमति दी जाना थी। हालांकि इसे लेकर भी किसी तरह कोई विवाद पहले दिन सामने नहीं आया।

अरे साहब..ये तो नियम विरुद्ध सख्ती है


{जूते-चप्पल : परीक्षा के दौरान नकल रोकने के लिए जो दिशा निर्देश दिए गए थे, उसमें यह कहीं नहीं लिखा था कि जूते-चप्पल भी बाहर उतरवाना हैं। पर उत्कृष्ट स्कूल और हायर सेकंडरी क्रमांक 2 में परीक्षा देने आए छात्रों पर यह नियम विरुद्ध सख्ती की गई। जूते और सैंडिल के साथ चप्पलें भी बाहर उतरवा ली गईं। खुद डीईओ ने माना कि ऐसा कोई दिशा निर्देश नहीं था। उन्होंने कहा कि अगर बच्चों को जमीन पर बैठकर परीक्षा देना पड़ रही हो तो जूते-चप्पल उतरवाना ठीक रहता है। क्योंकि इससे उन्हें असुविधा होती है। जहां टेबल कुर्सी का इंतजाम है, वहां ऐसा करने की कोई जरूरत नहीं है।

इतनी सख्ती...शिक्षकों के मोबाइल बंद कराए, केंद्राध्यक्ष को अाखिरी 10 मिनट में मिली अनुमति

स्टाफ के मोबाइल रखवाए, केंद्राध्यक्ष को आखिरी 10 मिनट में खोलने की अनुमति

नकल के मामले में अतिसंवेदनशीलता बरते जाने का एक और उदाहरण सभी केंद्रों पर मिला। हालांकि यह गाइड लाइन में शामिल था। इसके तहत परीक्षा में ड्यूटी देने वाले सभी शिक्षकों के मोबाइल केंद्राध्यक्ष द्वारा अपने कब्जे में लिए गए। उन्हें बाकायदा सीलबंद करके रखा गया। यह नियम केंद्राध्यक्ष पर भी लागू था। उन्हें बस इतनी छूट थी कि वे आखिरी 10 मिनट में अपना मोबाइल खोल सकते थे। वह भी इसलिए कि परीक्षा से संबंधित पूरी रिपोर्ट मुख्य कंट्रोल रूम को दे सकें। इसके अलावा परीक्षा शुरू होने से आधे घंटे पहले से सभी को माेबाइल बंद रखना पड़ा।

बोर्ड परीक्षा के दौरान छात्र-छात्राओं के जूते चप्पल उतरवा लिए गए। नंगे पैर परीक्षा देते विद्यार्थी।

{पीएससी की परीक्षा में भी यह प्रावधान खत्म : जूते-चप्पल उतरवाने का प्रावधान तो अब पीएससी, पीएमटी जैसी परीक्षाओं में भी खत्म कर दिया गया है। दो माह पूर्व हुई पीएससी की परीक्षा में जांच के बाद जूते-चप्पल पहनकर परीक्षा हॉल में जाने की अनुमति दे दी गई थी।

{तालाबंदी : इन केंद्रों के मुख्य द्वार पर ताले भी लटके हुए मिले। यह भी नियम विरुद्ध था। किसी भी केंद्र पर ताला लगाया जा सकता है। कारण यह है कि इससे उड़नदस्ते या जांच अधिकारियों को आकस्मिक जांच का मौका ही नहीं मिलेगा। खुद अधिकारियों ने भी माना कि परीक्षा केंद्र पर कहीं भी कोई ताला नहीं लगाया जा सकता है।

ये तो हद है...5वीं-8वीं की परीक्षा में भी नकल फोबिया

उच्च स्तर के अधिकारियों पर नकल का फोबिया कुछ ऐसा सवार है कि 5वीं व 8वीं की परीक्षाओं के मामले में भी इसे लेकर सख्ती बरतने के निर्देंश मिल रहे हैं। दरअसल 2007 के बाद पहली बार इन दोनों कक्षाओं में बोर्ड पैटर्न पर परीक्षा रखी जा रही हैं। यह बुधवार से शुरू होंगी। बोर्ड पैटर्न की बाध्यता भी सिर्फ सरकारी स्कूलों पर थोपी गई है। प्राइवेट स्कूल को इस मामले में पूरी छूट मिली हुई है। राज्य शिक्षा केंद्र के अधिकारियों ने दोनों परीक्षाओं के दौरान नकल रोकने पर सबसे ज्यादा जोर दिया। वहीं स्थानीय अधिकारी हैरान थे कि 5वीं में सरकारी स्कूल का कोई बच्चा नकल करना भी चाहे तो कैसे कर पाएगा। बीते 14 सालों से लगातार बदलते हुए प्रयोगों की वजह से सरकारी स्कूलों में बच्चों के शैक्षणिक स्तर पर बुरी मार पड़ी है। 5वीं व 8वीं के बच्चों की हालत ऐसी है कि वे चाहकर भी नकल नहीं कर सकते।

बोर्ड परीक्षा में पीएएससी से ज्यादा सख्ती...

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