समाज में जात-पात खत्म होना चाहिए : आभा दहीभाते
वर्तमान में सबसे बड़ी विडंबना है कि जो लोग जानते हैं, वे भी चुप हैं। जबकि उन्हें बोलना चाहिए। ऐसे में महिलाओं को ही जागरुक होने की जरूरत है। क्योंकि आज लोकतंत्र की सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है। इसके लिए हमें आवाज उठाना होगी।
यह विचार मेघा लाक्षाकार ने भारतीय महिला फेडरेशन इकाई की ‘’आज के परिदृश्य में भारतीय लोकतंत्र एवं संविधान की रक्षा’’ विषय पर रखी गई परिचर्चा में बतौर मुख्य अतिथि के रूप में कही। विशिष्ट अतिथि आभा दहीभाते थीं, अध्यक्षता विनीता विजयवर्गीय द्वारा की गई। परिचर्चा में फेडरेशन की पूर्व प्रांतीय सचिव रिखी शर्मा ने संविधान की प्रस्तावना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सभी को इसे पढ़ना चाहिए। इसके बाद नूर अख्तर ने संविधान के ऊपर मंडराते खतरे और सरकार की लोकतंत्र विरोधी नीतियों पर अपनी बात रखी। वहीं रामदुलारी शर्मा ने ‘’हमारी नागरिकता’’ कविता का वाचन किया। विशिष्ट अतिथि श्रीमती दहीभाते ने कहा कि समाज में जात-पात खत्म होना चाहिए। यही संविधान की मूल भावना है। अध्यक्षता करते हुए श्रीमती विजयवर्गीय ने कहा कि मुझे खुशी है कि महिला हीन नहीं है, कमजोर नहीं है। यह बड़ी बात है कि महिलाएं आज संविधान बचाने जैसे विषय पर चर्चा कर रही हैं। संचालन कृष्णा दुबे ने किया, जबकि आभार रेखा पलिया ने माना।