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पत्नी के बनाए खाने में कमी निकालना और रूपरंग पर कमेंट भी घरेलू हिंसा : सीएससपी
महिला दिवस पर पुलिस कंट्रोल रुम में सम्मान समाराेह का आयोजन
महिला दिवस के मौके पर पुलिस कंट्रोल रूम में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इसमें सीएसपी नेहा पच्चीसिया मुख्य वक्ता रहीं। अपने भाषण के दौरान उन्होंने महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव पर कई संवेदनशील एवं रोचक बातें कहीं। इसमें उन्होंने बताया कि घरेलू हिंसा की परिभाषा बहुत विस्तृत है। अक्सर इसे महिलाओं पर होने वाली शारीरिक हिंसा तक सीमित कर दिया जाता है। जबकि एक्ट में मानसिक प्रताड़ना को भी घरेलू हिंंसा की श्रेणी में रखा गया है। इस कार्यक्रम में महिला पुलिसकर्मियों व कर्मचारियों का सम्मान भी किया गया।
सीएसपी ने कहा कि घर में प|ी या अन्य महिला द्वारा बनाए खाने में कोई बार-बार कमी निकालता है ताे यह भी हिंसा है। घर के जरूरी निर्णयों में महिला को शामिल न करना, रूपरंग को लेकर किसी अन्य महिला से तुलना करना आदि सभी कृत्य घरेलू हिंसा के उदाहरण हैं।
प्रकृति लिंग तय करती है लेकिन जेंडर समाज गढ़ता है : उन्होंन लिंग और जेंडर के फर्क पर भी बात की। उन्होंने कहा कि लिंग प्रकृति द्वारा तय होता है लेकिन जेंडर की धारणा सामाजिक पूर्वाग्रहों व मान्यताओं से बनती है। लड़की है तो उसे गुलाबी रंग के कपड़े दिए जाएंगे। उपहार में गुड़िया दी जाएगी। वह बड़ी होगी तो उससे अपेक्षा की जाएगी कि वह घर के काम में रुचि दिखाए। रात होने से पहले घर आ जाए। ऐसे कपड़े पहने ऐसे नहीं। दूसरी ओर लड़के के लिए नीले रंग के कपड़े सिलेक्ट किए जाते हैं।
पुलिस कांट्राेल रूम पर आयोजित कार्यक्रम को सम्बोधित करती सीएसपी नेहा।