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बिखरी कांग्रेस का पहला ज्ञापन; सिर्फ 5 कार्यकर्ता पहुंचे

एक वर्ष पहले
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पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होने के बाद कांग्रेस में हुई टूट फूट का पहला नजारा गुरुवार को देखने मिला। असंतुष्ट विधायकों से मिलने पहुंचे प्रदेश के मंत्री जीतू पटवारी के साथ कर्नाटक पुलिस द्वारा कथित तौर पर किए गए दुर्व्यवहार के विरोध में गुरुवार को कांग्रेस की ओर से ज्ञापन दिया गया। ज्यादातर पदाधिकारियों द्वारा इस्तीफा दे दिए जाने के बाद बचे व बिखरे हुए कांग्रेस संगठन का यह प्रतीक बन गया।

पूर्व पार्षद हर्ष मेर की अगुवाई में कुल 5 कार्यकर्ता इस दौरान दिखाई दे रहे थे। वे ज्यादातर युवा चेहरे थे। दिग्विजय खेमे के प्रमुख चेहरों में एक जीतू पटवारी के साथ हुई कथित घटना को लेकर विरोध जताने के लिए कोई वरिष्ठ नेता नहीं पहुंचा। हालांकि पूर्व पार्षद ने बताया कि उनके साथ कुल 12 लोग थे। पर डिप्टी कलेक्टर के पास कम समय था। इसलिए बाकी लोग सामने नहीं आ पाए। हमने आनन-फानन में ज्ञापन सौंप दिया।

अभी संगठन का कोई चेहरा ही नहीं : सिंधिया गुट की टूटन के बाद फिलहाल जिला कांग्रेस का कोई चेहरा नहीं बन पाया है। यही वजह है कि जीतू पटवारी प्रकरण जैसे बड़े घटनाक्रम के विरोध में पार्टी की ओर से तगड़ा विरोध प्रदर्शन नहीं हो पाया। जबकि ऐसे घटनाक्रमों को लेकर तुरंत ही रैली, पुतला दहन जैसे विरोध के तरीके सामने आते हैं। हालत यह है कि यह है कि तीन दिन पहले तक कांग्रेस की फ्रंट लाइन के जितने भी नेता थे वे सिंधिया गुट से ही हैं। दिग्विजय गुट के ज्यादातर नेता बीते दो दशकों से हाशिए पर हैं।

जमीनी राजनीति से उनका जुड़ाव लगभग खत्म सा है। इनमें भी सर्व स्वीकार्यता वाले युवा चेहरा तो न के बराबर हैं।

पूर्व पार्षद हर्ष मेर के नेतृत्व में कांग्रेसियों ने दिया पहला ज्ञापन।

सिंधिया समर्थकों की दुविधा, अब कहां जाएं

कांग्रेस से अलग होने के बाद सिंधिया समर्थक और भी बड़ी दुविधा में हैं। कई वरिष्ठ नेता मानते हैं कि हमारे लिए राजनीतिक शून्यता जैसे हालात बन गए हैं। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि 15 साल विपक्ष में रहकर भी हम राजनीतिक रूप से खुद को मजबूत मानकर चलते थे। क्योंकि हम एक बड़े राजनीतिक संगठन का हिस्सा थे। पर अभी हमारी स्थिति बहुत विचित्र हो गई है। कांग्रेस से हमने नाता तोड़ लिया है और भाजपा में हमारे लिए कोई जगह नहीं है।
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