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अर्जुन को माध्यम बनाकर भगवान हमें आत्मा का चिंतन करने के लिए प्रेरित करते हैं: त्रिवेदी
एकादशी को महिला मंडल करेगा द्वारा विशेष गीता स्वाध्याय का आयोजन
भास्कर संवाददाता| गुना
स्वधर्म के विरुद्ध जाने पर व्यक्ति पाप में पड़ता है। संसार परिवर्तनशील है परंतु आत्मा अजर-अमर, अविनाशी और अपरिवर्तनशील है। भगवान गीता में आत्मा के चिंतन पर केंद्रित होने का संकेत करते हुए अर्जुन को माध्यम बनाकर हम सभी को आत्मा का चिंतन करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यदि हम ऐसा करने में सफल रहे तो निश्चित ही इंद्रीय बंधन कमजोर होंगे और हम सहज ही अपनी वास्तविक स्थिति का बोध कर पाएंगे।
यह बात पेंशनर्स कालोनी में हुए हितेंद्र सिंह रघुवंशी के निवास पर आयोजित गीता स्वाध्याय में सुभाष त्रिवेदी ने व्यक्त किए। वे श्रीमद् भगवद्गीता के द्वितीय अध्याय के निर्धारित श्लोकों के संदर्भ में बोल रहे थे। इस अवसर पर सात गीता क्षेत्रों में से गीता क्षेत्र मातृपुरम् के गीता स्वाध्याय महिला मंडल का गठन हुआ। जिसके संयोजक का दायित्व आशा रघुवंशी को प्रदान किया गया। विश्व गीता प्रतिष्ठानम की वरिष्ठ एवं जीवन मुक्त आचार्य रमेश कुमार पांडेय की सहधर्मिणी रेखा पांडेय ने महिला मंडल को शुभकामनाएं दीं। जिला महिला मंडल संयोजक हेमलता सक्सेना ने बताया कि एकादशी को महिला मंडल द्वारा विशेष गीता स्वाध्याय का आयोजन भी किया जाएगा।
प्रेरक प्रस्तुतियों के क्रम में रामेश्वर चौबे ने सुभाषित प्रस्तुत करते हुए कहा कि भोग और मोक्ष दोनों एक साथ संभव नहीं है। गुरु द्वारा प्रशस्त मार्ग पर चलते हुए परम सुंदरी माता कुंडलिनी की उपासना से शिष्य सहज ही मुक्त हो कर परमात्मा को प्राप्त कर लेता है।
प्रेरक प्रसंग खंड में देवेंद्र भार्गव ने कथा के माध्यम से बताया कि कैसे महर्षि सांदीपनि द्वारा गुरु की सेवा से प्राप्त पुण्य के रूप में उनने श्रीकृष्ण को शिष्य के रूप में प्राप्त किया। रामसिंह रघुवंशी ने श्रीमद् भगवद्गीता से अमृत वचन उद्धृत करते हुए बताया कि युक्त आहार विहार और कर्मों से ही व्यक्ति सुखी और निरोगी रह सकता है। जो लोग देवी- देवताओं का बहाना लेकर मादक द्रव्यों का सेवन जैसे कृत्य करते हैं उन्हें यह समझना चाहिए कि कालकूट विष का पान करने वाले भगवान शिव की लीला को तत्व से जाने बिना मनमाना आचरण कर वे स्वयं और दूसरों के विनाश का कारण बन रहे हैं।
सूक्ति सुनाते हुए केशव बैरागी ने सनातन धर्म के सर्वे भवंतु सुखिन: के सिद्धांत को पुष्ट किया। चंद्र प्रकाश भट्ट ने गीता भजन द्वारा जीवन की क्षणभंगुरता समझाते हुए प्रत्येक श्वांस में ईश्वर के स्मरण पर बल दिया। सूचना खंड में गुड़ी पड़वा 25 मार्च को सुबह 5 बजे से आयोजित होने वाले नवसंवत्सर अभिनंदन समारोह की जानकारी प्रदान की गई। आगामी रविवारीय गीता स्वाध्याय के क्रम में अशोक त्रिवेदी ने श्रीगीता ग्रंथ की गरिमा मय आगवानी करते हुए हीराबाग कालोनी स्थित स्वनिवास पर रविवार शाम 4 बजे से आरंभ होने वाले गीता स्वाध्याय में धर्म प्रेमी जनों से सहभागिता करने का अाग्रह किया।
गीता स्वाध्याय में भजन-कीर्तन करते श्रद्धालु।