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उम्र के सबूत के लिए वोटर आईडी मान्य नहीं किया तो दावेदारों ने रातों-रात तलाशीं बाेर्ड की मार्कशीट

Guna News - भारतीय जनता पार्टी के चुनाव के लिए शनिवार को रायशुमारी की गई। इस बार कुछ चीजें पहली बार हुईं। इसमें पहली बार आयु...

Dec 01, 2019, 08:30 AM IST
Guna News - mp news if the voter id is not valid for proof of age then the claimants searched the mark sheets of the board overnight
भारतीय जनता पार्टी के चुनाव के लिए शनिवार को रायशुमारी की गई। इस बार कुछ चीजें पहली बार हुईं। इसमें पहली बार आयु सीमा का तय होना। बाकायदा उम्र का सर्टिफिकेट मांगा जाना आदि अहम रहा। रायशुमारी की प्रक्रिया दो अलग-अलग जगहों पर हुई। एक जगह वरिष्ठ नेताओं से बात हुई तो दूसरी जगह मंडल अध्यक्ष व जिला प्रतिनिधियों से बात हुई। प्रक्रिया सीधी साधी थी। कुल मिलाकर 50 से 70 लोगों से उनके पसंदीदा 3 नाम लिखवाए गए। यह नाम बंद लिफाफे में चुनाव अधिकारी ने अपने पास लेकर रख लिए। यह प्रक्रिया तो पदाधिकारियों, पूर्व व वर्तमान जनप्रतिनिधियों के संबंध में अपनाई गई। वहीं लंबे समय से पार्टी में सक्रिय और जिला स्तर के अन्य पदाधिकारियों से उनकी राय सीधे तौर पर ली गई। उनकी राय एक रजिस्टर में दर्ज की गई। चुनाव अधिकारी ने वन टू वन चर्चा की। 2 या 3 दिसंबर को अध्यक्ष का नाम सामने आ जाएगा। 5 दिसंबर को प्रदेश अध्यक्ष अध्यक्ष के नाम की घोषणा की जाएगी।

वरिष्ठ पदाधिकारियों का मानना कि रायशुमारी में से निकले नामों में से ही किसी एक पर मुहर लगेगी

वन टू वन चर्चा : बंद लिफाफे में 3-3 नाम लिए गए, वरिष्ठ पदाधिकारियों की राय रजिस्टर में दर्ज की

जानिए कौन और क्यों है जिलाध्यक्ष का दावेदार

1. गजेंद्र सिंह सिकरवार, मौजूदा जिलाध्यक्ष : 1965 में जन्मे मौजूदा जिलाध्यक्ष 54 साल के हो गए हैं और अगर उम्र को लेकर रियायत न मिलती तो वे दौड़ से बाहर हो जाते। सिर्फ एक साल के फर्क की वजह से वे ही अब सबसे बड़े दावेदार भी माने जा रहे हैं। इसकी बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि मंडल अध्यक्षों के चुनाव के दौरान उन्होंने अलग-अलग विधानसभाओं के बड़े नेताओं की पसंद को ही तरजीह दी। अपनी ओर से उन्होंने इसमें ज्यादा दखलंदाजी नहीं की। दूसरे वे सबसे कम विवादित हैं। वरिष्ठों के बीच उनका विरोध भी कम है।

2. अशोक शर्मा : बड़े दावेदारों में इनका नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। सूत्र बताते हैं कि पूर्व जिलाध्यक्ष और नपाध्यक्ष सहित कुछ पूर्व नेताओं ने इनके नाम को आगे बढ़ाया है। जातिगत आधार पर देखा जाए तो मंडलों में सवर्णों का दबदबा रहा है। खासतौर पर 4-5 पद ब्राह्मण समुदाय से आने वाले नेताओं के हाथ में हैं। पर यह समीकरण नुकसान भी पहुंचा सकता है। वरिष्ठ नेता यह देखेंगे कि एक ही समुदाय के बीच इतने सारे पदों का बंटवारा किया जाए या नहीं।

3. अरुण चतुर्वेदी : संगठन में इनकी सक्रियता लंबे समय से है। छात्र राजनीति से लेकर युवा और जिलास्तर के पद पर वे रह चुके हैं। कुछ वरिष्ठ नेता भी उनका साथ दे सकते हैं। केंद्रीय राजनीति में सक्रिय कुछ बड़े नेताओं से भी उनकी करीबी है। पर जमीनी स्तर पर उनकी पकड़ बीते कई सालों से दिखी नहीं है। यह बात उनके खिलाफ जा सकती है।

4. महेंद्र किरार : इनका कार्यक्षेत्र मुख्यत: बमोरी का है। वहां पहले से ही इतनी आंतरिक उठा-पटक है कि उनकी दावेदारी को उनके सबसे मजबूत क्षेत्र से ही व्यापक समर्थन मिलना मुश्किल होगा। इसके अलावा अभी उनका अनुभव भी काफी नहीं है। तीसरे उनके पिता को इस बार तमाम विरोधों व बगावतों के बावजूद विधानसभा का टिकट भी मिला था। इसलिए उनका नाम चला तो है लेकिन संभावनाएं कम हैं।

संघ की राय भी ली जाएगी

सूत्र बताते हैं कि तीन प्रमुख दावेदारों का नाम संघ के स्थानीय पदाधिकारियों के सामने भी रखा जाएगा। उनमें से किसी एक पर संघ अपनी मुहर भी लगाएगा। इस बात की संभावना कम है कि पार्टी की रायशुमारी से निकले तीन-चार नामों में कोई अलग नाम संघ की ओर से प्रस्तावित हो जाए। पार्टी के जानकार बताते हैं कि रायशुमारी में से निकले नामों में से ही किसी एक पर संघ की मुहर लगेगी।

भाजपा जिला अध्यक्ष चुनाव के लिए रायशुमारी करते पदाधिकारी।

इन तीन वजहों से अलग रही इस बार की रायशुमारी

1. उम्र सीमा : जिलाध्यक्ष पद के दावेदारों के लिए अधिकतम आयु सीमा 55 साल तय की गई। हालांकि पहले यह 50 साल थी लेकिन विरोध के बाद 5 साल की रियायत दे दी गई।

2. आयु प्रमाणपत्र : दूसरे उम्र के सबूत के लिए आधार, वोटर आईडी जैसे दस्तावेजों को भी मंजूर नहीं दी गई। दावेदारों से बोर्ड परीक्षा की मार्कशीट मांगी गई। राजनीति में सक्रिय 45-50 साल के व्यक्ति के लिए यह दस्तावेज लगभग अप्रासंगिक हो जाते हैं। पर जब जरूरत आन पड़ी तो उन्हें रातों-रात इनकी तलाश करनी पड़ी। दबे पड़े पुराने टीन के बक्सों को खंगाला गया। उनमें से मार्कशीट निकाली गई, जो किसी प्राचीन पांडुलिपी का रूप धारण कर चुकी थी। उन्हें लेमिनेट कराकर किसी तरह चुनाव अधिकारी के सामने पेश करने लायक बनाया गया।

3. जगह : रायशुमारी के लिए दो अलग-अलग जगह तय की गईं। पहले चरण के तहत एक होटल में 14-15 वरिष्ठ नेताओं को बुलाया गया। इसमें पूर्व जिलाध्यक्ष, महामंत्री, वर्तमान व पूर्व विधायक, जिपं अध्यक्ष, नपाध्यक्ष आदि शामिल थे। इसके बाद होटल से लगभग 8 किमी दूर शहर के सीमांत पर स्थित एक गार्डन पर मंडल अध्यक्ष व जिला प्रतिनिधियों को बुलाया गया।

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