संयम से सद् भाव में बीता फैसले का दिन

Guna News - शुक्रवार देर शाम को यह खबर आ गई थी कि करीब 12 घंटे बाद अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा। इसके बाद से लोग आशंकाओं...

Nov 10, 2019, 08:01 AM IST
शुक्रवार देर शाम को यह खबर आ गई थी कि करीब 12 घंटे बाद अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आएगा। इसके बाद से लोग आशंकाओं और अनिश्चितताओं के साथ सोच रहे थे कि शनिवार को हमारे शहर में इसकी क्या प्रतिक्रिया होगी? लेकिन शनिवार को फैसला आने से पहले और उसके बाद संयम से शहर का जनजीवन पूरी तरह सामान्य रहा। सुबह 11 बजे जब चैनलों व सोशल मीडिया पर यह सूचना आई कि विवादित जमीन रामलला विराजमान को दी जाती है।

तो उसके कुछ मिनट बाद ही पटाखे चलने की आवाजें आना शुरू हो गईं। यह सिलसिला करीब 20-25 मिनट तक चलता रहा। इसके बाद एसडीएम शिवानी गर्ग खुद एक वाहन में बैठकर शहर के प्रमुख बाजारों से होकर गुजरी। उन्होंने एनाउंसमेंट करके लोगों को याद दिलाया कि धारा 144 लागू है। ।

कहीं बंद नहीं रहा बाजार : प्रदेश में कई जगहों पर संवेदनशीलता को देखते हुए खुद पुलिस व प्रशासन ने ही बाजार बंद कराया पर हमारे पूरे जिले में कहीं भी यह हालात नहीं रहे। सुबह मंडी के कामकाज से लेकर देर शाम तक खुलने वाले बाजारों तक, सब कुछ रोज की तरह रहा। हालांकि शास्त्री पार्क मंडी में सुबह 10 बजे के बाद गांव से आने वाले सब्जी वाले चले गए थे। आम दिनों में यह लोग दोपहर 2-3 बजे तक रुकते हैं। पर उनके अलावा अन्य फड़ सामान्य रूप से रहे।

राघौगढ़ और चांचौड़ा संवेदनशील थे, पर पुलिस ने रात में ही सभी पक्षों के साथ कर ली थी बैठक

सुबह 11 बजे पटाखे चले तो एसडीएम ने याद दिलाया- शहर में धारा 144 लागू है

सबसे नाजुक 3 घंटे गुजरने के बाद ....

फैसला सामने आने के बाद नाजुक 3-4 घंटे गुजर जाने के बाद रघुवंशी समाज के लोगों ने हनुमान चौराहे पर आकर मिठाई बांटी। पर उनके साथ शहर काजी नूरउल्ला युसुफजई, मुस्लिम समाज संगठन के अध्यक्ष मोहम्मद शफीक, जामा मस्जिद के सदर इकरार अहमद भी थे। वहीं दूसरी ओर रघुवंशी समाज के अध्यक्ष अर्जुन सिंह, विक्रम सिंह, बृज रघुवंशी, मनोज रघुवंशी के अलावा नपा उपाध्यक्ष राजू यादव, कांग्रेस नेता सुनील मालवीय और सामाजिक कार्यकर्ता भी थे। सभी ने एक दूसरे को माला पहनाई और बधाइयां दीं।

4 वजहों से शहर में शांति बनी रही

असामाजिक तत्वों को पहले से ही हिदायत : एसपी राहुल लोढ़ा व उनकी टीम ने अशांति फैलाने में सबसे अगुवा रहने वाले तत्वों की पहचान कर ली थी। उन लोगों को हिदायत दे दी गई थी कि अगर किसी भी तरह की गड़बड़ी होती है तो उनको जवाबदेह माना जाएगा। यह काम किसी धरपकड़ किए बिना ही किया गया।

सद्भाव का संदेश : वहीं प्रशासनिक तंत्र ने सामाजिक कार्यकर्ताओं के साथ मिलकर आम नागरिकों के बीच यह संदेश पहुंचाया कि शहर में किसी भी स्थिति में सद्भाव नहीं बिगड़ेगा। इसके अलावा स्वच्छता को लेकर मिशन 10 जैसी गतिविधियों के जरिए कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार ने शहर के लोगों को सृजनात्मक कामों से जोड़ा रखा। यह एक ऐसा मंच बना, जिसमें हर वर्ग की भागीदारी थी और आपसी संवाद भी था।

छुट्‌टी का दिन : सेकंड सटरडे होने की वजह से छुट्‌टी का माहौल रहा। स्कूल व कॉलेज बंद रखने के आदेश भी जारी हो चुके थे। इससे शहर में ज्यादा भीड़ भाड़ नहीं रही।

शराब की दुकान बंद : पहली बार ऐसा हुआ कि चुनाव व चुनिंदा ड्राइ डे के अलावा शराब की दुकानों को बंद रखा गया। शहर सहित पूरे जिले में इन दुकानों को बंद रखने के आदेश देर शाम को जारी हो गए थे।

फैसले के बाद एक दूसरे को माला पहनाते मुस्लिम आैर रघुवंशी समाज के लोग।

आज भी परीक्षा का दिन : चार जगहों पर खास नजर

रविवार को हजरत मोहम्मद का जन्मदिवस ईद मिलाद उन नबी के रूप में मनाया जा रहा है। प्रशासन और पुलिस के सामने यह पर्व भी एक चुनौती की तरह रहेगा। आमतौर पर इस दिन बड़ा जुलूस निकाला जाता है। इसकी तैयारियां भी एक दिन पहले से ही शुरू कर दी गई हैं। उधर चांचौड़ा, बीनागंज, कुंभराज और मृगवास को सबसे ज्यादा संवेदनशील मानते हुए एसडीएम ने एक दिन पहले ही वहां शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए कार्यपालिक दंडाधिकारी तैनात कर दिए हैं।

फ्लेश बैक

अयोध्या मामले को लेकर कभी भी शहर में कर्फ्यू लगाने के हालात नहीं बने

खास बात यह है कि अयोध्या मामले को लेकर शहर में कभी भी ऐसे हालात नहीं बने कि कर्फ्यू लगाना पड़े। चाहे वह रथयात्रा के दौरान पूरे देश में बने तनावपूर्ण हालात रहे हों या फिर मस्जिद तोड़े जाने की घटना।

1992 : तब एसपी ने खुद खुलवाईं थी दुकानें : बाबरी मस्जिद को ढहाए जाने की खबर देर शाम साढ़े 7 बजे के आसपास शहर में फैली थी। देखते ही देखते पूरा बाजार बंद हो गया। आनन-फानन में दुकानें बंद कर दी गईं। पर आधे घंटे बाद ही तत्कालीन एसपी मैथिलीशरण गुप्त अपने वाहन में आए और फिर पैदल ही पूरे बाजार में घूमे। उन्होंने हर दुकान को वापस खुलवाया। उसके बाद अगले 10 दिन तक तनाव तो रहा, लेकिन शहर के लोगों ने अपनी परंपरा को कायम रखा।

2002 : गुजरात में साबरमती अग्निकांड के बाद भी तनाव के हालात बने थे। लेकिन शहर में एक बार भी ऐसी स्थिति नहीं आई कि धारा 144 भी लगाना पड़े।

2010 : इलाहबाद हाईकोर्ट ने अयोध्या को लेकर फैसला सुनाया था। तब भी 2019 के फैसले वाला माहौल बनाने की कोशिश की गई थी। आशंकाएं और अनिश्चितता फैली। अफवाएं फैलती रहीं कि समुदायों के गुटों ने एक दूसरे पर हमले की तैयारी कर रखी हैं। पर दूसरे दिन शहर में किसी तरह का कोई घटनाक्रम नहीं हुआ।

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