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अब सर्दी-खांसी के मरीजों की ओपीडी अलग होगी

एक वर्ष पहले
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जिले में अभी तक एक भी मरीज में कोराेना वायरस की पुष्टि नहीं, 4 की रिपोर्ट भेजी

नए कलेक्टर एस. विश्वनाथन ने शुक्रवार को पदभार संभालने के बाद जिला अस्पताल का दौरा किया। इस दौरान जब वे आेपीडी का जायजा ले रहे थे तो उन्होंने एक बड़ी खामी को पकड़ा। उन्हाेंने देखा कि सामान्य मरीजों के साथ सर्दी-खांसी की शिकायत वाले भी लाइन में लगे हैं। उन्होंने सीएमएचओ व अन्य डॉक्टरों से कहा कि अगर इनमें कोई कोरोना वायरस से पीड़ित हो तो? जांच में पुष्टि होने से पहले तक तो वह कई लोगों को संक्रमित कर चुका होगा। दरअसल कोरोना वायरस से पीड़ित मरीज के शुरूआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही रहते हैं। जैसे सर्दी-खांसी, बुखार आदि। गहन जांच के बाद ही डॉक्टर दोनों के फर्क को समझ पाते हैं।

जिला अस्पताल में अब तक इस बात की ओर ध्यान ही नहीं दिया गया कि फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों के लिए अलग से ओपीडी बनाई जाए। जब कलेक्टर ने टोका तो अस्पताल प्रबंधन ने भी ली सुध। तय किया गया कि इन मरीजों के लिए अब अलग ओपीडी बनाई जाएगी। जहां आेपीडी के पर्चे बनते हैं उसके पास ही एक कमरे में उन्हें अलग से देखा जाएगा।

नए मेडिकल वार्ड की बिल्डिंग में नर्स की एक्टिवा देखकर हुए नाराज

निरीक्षण के दौरान उन्होंने नए मेडिकल वार्ड भवन भी देखा। वहां बिल्डिंग के अंदर एक एक्टिवा गाड़ी को खड़ी देखकर वे चौंक गए। उन्होंने कहा कि भवन के अंदर यह गाड़ी किसने रखी? पता चला कि यह शालिनी नामक किसी नर्स की थी। नर्स ने सफाई दी कि बाहर रखने पर गाड़ी चोरी होने का खतरा रहता है। इस पर कलेक्टर ने कहा कि आज से आपकी गाड़ी बाहर ही रखी जाएगी।

एंबुलेंस से सीधे पहुंचने का रास्ता भी अलग

कलेक्टर ने कोरोना वायरस के लिए अलग से बनाए गए वार्ड का भी जायजा लिया। इसमें 10 बेड रखे गए हैं। साथ ही अगर कोई मरीज आता है तो उसे सीधे इस वार्ड तक पहुंचाने का इंतजाम भी किया गया है। डाॅक्टरों ने बताया कि मरीजों को सीधे एंबुलेंस से यहां तक लाया जा सकेगा।

123 साल पुराने कानून का इस्तेमाल, सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद रहेंगे

गुना | मप्र में भले ही अब तक कोरोना वायरस का एक भी मामला सामने न आया हो लेकिन सरकार एहतियात बरत रही है। इसके चलते शिक्षा विभाग ने शुक्रवार को आदेश जारी कर सभी स्कूलों में छुट्‌टी घोषित कर दी है। इसके मुताबिक आगामी आदेश तक सभी स्कूल बंद रहेंगे। हालांकि सरकारी स्कूलों के शिक्षकों व अन्य स्टाफ को इससे अलग रखा गया है। वहीं 10वीं, 12वी, 8वीं एवं 5वीं की परीक्षाएं भी यथावत चलती रहेंगी।

कई निजी स्कूलों में लोकल परीक्षा भी चल रही हैं। इन्हें लेकर आदेश में कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए हैं। इसके अलावा निजी स्कूलों को यह छूट भी दी गई है कि वे अपने स्टाफ के उपस्थित रहने या न रहने के संबंध में अपने विवेकानुसार फैसला ले सकते हैं।

शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश के मुताबिक यह व्यवस्था कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर बने खतरे को देखते हुए लिया गया है।

अब अस्पताल प्रबंधन ने ली सुध : सर्दी-खांसी के मरीजों में हो सकते हैं काेरोना वायरस के मामले, इसलिए की व्यवस्था

भास्कर नॉलेज

1897 में लागू हुआ था महामारी रोग कानून

कानून के जानकार बताते हैं कि कोरोना वायरस की कथित महामारी ने 123 साल पुराने कानून को फिर से जिंदा कर दिया है। अंग्रेजों ने 1897 में महामारी रोग कानून लागू किया था। इसी के प्रावधानों का इस्तेमाल करके कोरोना वायरस की महामारी से बचाव के लिए निषेधाज्ञा लागू की जा रही हैं। इसके तहत अधिकारी शिक्षण संस्थाओं को बंद कर सकते हैं। साथ ही किसी इलाके में आवाजाही को रोका जा सकता है। यही नहीं कानून के प्रावधान के मुताबिक संक्रमण फैलाने वाली बीमारी से ग्रस्त व्यक्ति को उसके घर या अस्पताल में उसकी इच्छा के विरुद्ध भी रख सकते हैँ।

अचानक एसडीएम कार्यालय पहुंच गए

ऐसा कम ही होता है कि नए कलेक्टर कार्यालयीन समय से पहले ही चार्ज ले लें। आमतौर पर सरकारी दफ्तर सुबह 10 बजे के बाद ही खुलते हैं। पर नए कलेक्टर ने इससे पहले ही चार्ज ले लिया। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक चार्ज के बाद उन्हें जिला अस्पताल का दौरा करना था। पर वे वहां न जाकर एसडीएम कार्यालय पहुंच गए। एसडीएम शिवानी गर्ग वहां मौजूद मिली।

एसडीएम ने साथ जाने की अनुमति मांगी तो बोले-आप वहां क्या करेंगी

कलेक्टर एसडीएम कार्यालय के निरीक्षण के बाद अस्पताल की ओर रवाना होने लगे। इस दौरान एसडीएम शिवानी गर्ग ने उनसे पूछा कि क्या वे भी साथ चल सकती हैं। इस पर कलेक्टर ने उनसे कहा कि आप क्या करेंगी? एसडीएम बोली कि वहां पर गेल के सहयोग से कुछ प्रोजेक्ट चल रहे हैं। वे चाहती हैं कि निरीक्षण के दौरान उन पर भी एक निगाह डाल ली जाए।

डाॅक्टरों ने गुलदस्ता पेश किया तो कलेक्टर ने पूछा आप कौन हैं

अस्पताल में जब कलेक्टर पहुंचे तो उनकी आगवानी में मौजूद डाॅक्टरों ने मास्क लगा रखा था। उन्होंने जब गुलदस्ता पेश किया तो कलेक्टर ने उनसे पूछा कि आप कौन हैं। पहले परिचय तो हो जाए। इसके बाद सीएमएचओ पी. बुनकर और अन्य डाक्टरों ने अपना परिचय दिया। इस मौके पर सिविल सर्जन डॉ. एसके श्रीवास्तव नहीं थे। बताया जाता है कि वे छुट्‌टी पर हैं।

जिला अस्पताल में पर्चे बनवाने के लिए अब सर्दी खांसी के मरीजों को अलग से लाइन में लगना पड़ेगा।
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