पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

सिंधिया की राह पर पदाधिकारी

एक वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस छाेड़ भाजपा का दामन थामा ताे कांग्रेस में इस्तीफाें की झड़ी लगी, प्रदेश कांग्रेस महासचिव, जिलाध्यक्ष सहित 90% पदाधिकारियों ने दिए इस्तीफे

भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा - पार्टी में सभी का स्वागत, मिस कॉल करके भी बन सकते हैं सदस्य

पूर्व सांसद ज्योतिरादित्य के मंगलवार को कांग्रेस से इस्तीफे के साथ ही उनकी राजनीति के केंद्र बिंदु रहे गुना में तुरंत ही असर दिखना शुरू हो गया। कुछ ही घंटे के भीतर जिला कांग्रेस के अध्यक्ष सहित 90 फीसदी से ज्यादा पदाधिकारियों ने पदों के साथ पार्टी से इस्तीफा दे दिया। वहीं बुधवार को श्रीसिंधिया के भाजपा की सदस्यता लेने के कुछ घंटे बाद ही कांग्रेस नेताओं ने श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया के निवास पर बैठक की। इसके बाद उनके निवास पर भाजपा का झंडा लहराया गया।

इसके सबके बावजूद देर शाम तक किसी भी कांग्रेस पदाधिकारी या नेता ने आधिकारिक रूप से भाजपा की सदस्यता नहीं ली थी। भाजपा की सदस्यता के सवाल पर पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष बिट्‌ठलदास मीना ने कहा कि जहां हमारे नेता हैं वहीं हम। उन्होंने कहा कि जल्द ही आधिकारिक रूप से भी सदस्यता ली जाएगी। वहीं प्रदेश कांग्रेस के पूर्व महासचिव योगेंद्र लुंबा का भी यही जवाब था। उन्होंने कहा कि हम अपने नेता के साथ हैं। इधर भाजपा के जिलाध्यक्ष गजेंद्र सिंह सिकरवार ने बताया कि बुधवार शाम तक किसी भी कांग्रेस नेता ने आधिकारिक रूप से सदस्यता के लिए संपर्क नहीं किया। उन्होंने कहा कि वैसे अब तो मिस कॉल करके भी सदस्य बना जा सकता है।

स्थानीय राजनीति पर असर


इस बदलाव से क्या होगा सिंधिया समर्थकों का

इस समय राजनीतिक बदलाव के शोरगुल में फिलहाल यह सवाल दरकिनार हो रहा है। सिंधिया समर्थक पूरी ताकत से यही नारा लगा रहे हैं कि जहां हमारा नेता वहीं हम। पर कुछ समय बाद सिंधिया के लिए कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं के भविष्य का सवाल उठेगा। तब यह चुनौती रहेगी कि इन नेताओं को कहां एडजस्ट किया जाए क्योंकि दोनों पार्टियों की कार्यशैली बहुत अलग है।

आगे की राजनीति

अब दिग्विजय गुट का जिला कांग्रेस पर होगा दबदबा

बीते दो दशकों से जिला कांग्रेस पर सिंधिया का गुट का दबदबा रहा है पर अब हालात बदल जाएंगे। स्वभाविक रूप से पूरा संगठन दिग्विजय गुट के हाथ में चला जाएगा। इनमें पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुमेर सिंह गढ़ा, पूर्व विधायक कैलाश शर्मा, पूर्व महामंत्री हरिशंकर विजयवर्गीय जैसे बड़े नेताओं और उनके परिवार के युवा सदस्यों को अब अहम भूमिकाएं दी जा सकती हैं।

शिवपुरी जिले में इनके हुए इस्तीफे

{शिवपुरी: शहर कांग्रेस (उत्तर) शैलेंद्र टेड़िया, शहर कांग्रेस (दक्षिण) सिद्धार्थ लड़ा, शिवपुरी (ग्रामीण) से भरत राव आिद।

गुना जिले में इनके हुए इस्तीफे

{गुना: प्रदेश कांग्रेस महासचिव योगेंद्र लुंबा, प्रदेश महिला कांग्रेस की कार्यकारी अध्यक्ष वंदना मांडरे, जिलाध्यक्ष विट्‌ठलदास मीना, कार्यकारी अध्यक्ष रविंद सिंह रघुवंशी, ब्लॉक अध्यक्ष सूर्यकांत जगताप, एनएसयूआई के जिलाध्यक्ष कविंद्र सिंह चौहान, युवा कांग्रेस नेता अमित सोनी, विधायक पद के उम्मीदवार रहे नीरज निगम और चंद्रप्रकाश अहिरवार, नपा में पूर्व नेता प्रतिपक्ष अनिल जैन, जिला महिला कांग्रेस अध्यक्ष अलका बिंदल, पूर्व नपाध्यक्ष देवेंद्र गुप्ता के अलावा सुनील अग्रवाल, पूर्व पार्षद कैलाश धाकड़ अादि हैं।

इन तीन कारणों से समझिए बदलाव का असर...

टकराव...

कांग्रेसियाें के पार्टी में अाने का भाजपाई समर्थन कर रहे हैं लेकिन स्वीकार्यता को लेकर टकराव हो सकता है। चुनाव के समय दावेदारी होगी, तब टकराव के हालात बनेंगे।

इन बातों से बढ़ती गई नाराजगी

1. सिंधिया के 10 साल से रुके प्रोजेक्ट कांग्रेस शासन में भी आगे नहीं बढ़े

सिंधिया का सबसे बड़ा ड्रीम प्रोजेक्ट स्टेडियम का था। करीब 10 पहले उन्होंने इसका प्रस्ताव रखा था। पर भाजपा के शासनकाल में इस पर रोड़े अटकाए जाते रहे। कांग्रेस के सत्ता में आने के बाद भी इस पर अमल नहीं हो पाया।

महा-राजनीति: 20 साल बाद जिले में दिग्विजय गुट का होगा दबदबा, आनन फानन में कलेक्टर बदले

राजनीतिक भूचाल से पहले जिले में 3 संकेत मिले थे ...

द ग्रेट एमपी पॉलिटिकल ड्रामा

श्रम मंत्री महेन्द्र सिंह सिसौदिया के घर पर पहंुचे कार्यकर्ताओं ने बीजेपी का झंडा लहराया और सिंधिया की जय के नारे लगाए।

गद्दारी सिंधिया जी ने नहीं की बल्कि कांग्रेस और कमलनाथ जी ने की है: श्रम मंत्री: श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने कांग्रेस और कमलनाथ जी पर आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि यह गद्दारी ज्योतिरादित्य सिंधिया जी ने नहीं की बल्कि कांग्रेस पार्टी और कमलनाथ जी ने की है। सवाल खड़े करते हुए कहा कि एक और बात करते हैं कि खजाना खाली है, वहीं करोड़ों के काम छिंदवाड़ा विधानसभा में किए जाते हैं। क्या बाकी विधायक और मंत्री झक मार रहे हैं।

...और उस रात गार्डों को घर जाकर सोने को कह दिया था: सिंधिया समर्थकों के अचानक गायब होने की सूचना लीक न होने की बड़ी वजह यह रही कि उन्होंने अपने सुरक्षा गार्डों को भी इसकी भनक नहीं लगने दी गई। श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया देर रात को घर से रवाना हुए थे। इससे पहले उन्होंने अपने दोनों गार्डों को कहा कि वे सोने के लिए अपने घर चले जाएं।

एक मुलाकात जो तय होकर भी नहीं हो पाई: दूसरा बड़ा संकेत तब मिला था जब लोकसभा चुनाव में अपनी हार के डेढ़ साल बाद श्री सिंधिया का गुना में पहला रोड शो हुआ। उसी दिन पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने भी अपना गुना दौरा तय किया था। उन्होंने अपने दौरा कार्यक्रम में श्री सिंधिया के साथ बातचीत को शामिल किया था। इसके मुताबिक सर्किंट हाउस में दोनों नेताओं की मुलाकात होना थी। श्री सिंधिया देर से आए और दिग्विजय सिंह को इंदौर जाना था, इस चक्कर में चर्चा नहीं हो पाई।

सिंधिया की अनदेखी हुई तो संकट के घने बादल छाएंगे: प्रदेश की राजनीति में आए भूचाल का पहला पूर्व संकेत गुना से ही आया था। श्री सिंधिया के इस्तीफे से 2 दिन पहले ही श्रम मंत्री महेंद्र सिंह सिसौदिया ने एक अहम बयान दिया था। तब श्रम मंत्री ने कहा था कि सरकार को कोई खतरा नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार को अभी तो कोई खतरा नहीं है लेकिन अगर हमारे नेता श्री सिंधिया की उपेक्षा की तो संकट के ऐसे घने बादल छाएंगे कि मैं कुछ नहीं कर पाऊंगा।

इस्तीफों की झड़ी: एनएसयूआई के ब्लॉक अध्यक्ष ने भी छाेड़ी कांग्रेस, 2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार चंद्रप्रकाश अहिरवार और नीरज निगर ने दिया इस्तीफा।

{अशोकनगर: जिलाध्यक्ष कन्हैयाराम लोधी, नारायण प्रसाद शर्मा प्रदेश महासचिव, धर्मेन्द्र चौधरी प्रदेश महासचिव, ब्लॉक अध्यक्ष अशोकनगर मनोज शर्मा, चंदेरी ब्लॉक अध्यक्ष महेन्द्र सिंह बुंदेला, पूर्व विधायक गजराम सिंह यादव, अशोक कुशवाह ब्लॉक अध्यक्ष राजपुर, राजकुमार नगेश्री, दिग्विजय सिंह, आशुतोष देवलिया प्रवक्ता, जेपी अग्रवाल प्रदेश महासचिव, हरिओम नायक जिला महामंत्री, अरविंद जैन युवक कांग्रेस जिलाध्यक्ष शहरी, दीपक पालीवाल ब्लॉक अध्यक्ष मुंगावली, राहुल शेषा मंडलम अध्यक्ष चंदेरी आिद ने इस्तीफे दिए।

अब भाजपा के सामने चुनौती

2. तबादलों पर भी असंतोष

तबादलों के मामले में भी सिंधिया समर्थकों को असंतोष रहा। खासकर शिक्षा विभाग के मामले में। यह मंत्रालय सिंधिया समर्थक मंत्री के हाथ में ही था। पर दिग्विजय गुट के नेताओं की आपसी खींचतान से शासन ने प्रशासनिक तबादलों की पूरी की पूरी सूची ही लटका दी।

चुनाैती...

इस बदलाव के बाद नगरीय निकाय और पंचायत के चुनावों का सामना करना होगा। इन चुनावों के नतीजों से स्पष्ट होगा कि यह बदलाव सही रहा या गलत।

चिंता...

भाजपाइयों को चिंता है कि कांग्रेसियों से आने वाले चुनावों में टिकट कटने का खतरा रहेगा। बड़े नेताओं को अपनी जमीन की चिंता है कि कहीं उनके पद न छिन जाएं।

1993: माधवराव सिंधिया ने कांग्रेस से अलग होकर मप्र विकास कांग्रेस पार्टी बनाई थी

2020 : ज्याेतिरादित्य ने भाजपा ज्वाइन कर कांग्रेस सरकार के लिए मुश्किल खड़ी की

चार पीढ़ी से कांग्रेसी श्रममंत्री की कोठी पर लहराया कमल का ध्वज

श्रम मंत्री के निवास पर भाजपा का झंडा लहराना भी एक बड़े बदलाव का प्रतीक रहा। उनके परिवार की चौथी पीढ़ी यानि उनकी बेटी भी कांग्रेस से ही जुड़ी हैं। उनके दादा सागर सिंह सिसौदिया स्वतंत्रता सेनानी रहे और चांचौड़ा से विधायक भी चुने गए। पिता भी आजीवन कांग्रेस के सदस्य रहे।

इनसाइड स्टोरी: गुना लोकसभा सीट पर सिंधिया परिवार का रहा है दबदबा

चुनाव मंे दावेदार बढ़ेंगे, भाजपा नेताओं को अपनी जमीन की चिंता

भाजपा में संगठन के स्तर पर कांग्रेस से आने वाले नेताओं से बड़ी चुनौती खड़ी नहीं होगी। पर चुनावी राजनीति में दावेदारों की संख्या बढ़ जाएगी। खासकर बमोरी जैसे विधानसभा क्षेत्रों में जहां भाजपा नेताओं के बीच ही आपसी प्रतिस्पर्धा तीखी रही है। गुना विधानसभा के मामले में तो भाजपा नेताओं पर कांग्रेसी पृष्ठभूमि वाले नेताओं का दावा कहीं ज्यादा मजबूत होगा। बीते 20 साल से इस सीट पर भाजपा जीत रही है लगातार हार रहे कांग्रेस उम्मीदवार इस सीट पर अपना दावा करेंगे।

खबरें और भी हैं...