कम बारिश की आशंका से 60 दिन में पकने वाली सोयाबीन बोई पर सितंबर की बारिश ने कटाई का मौका ही नहीं दिया

Guna News - भास्कर टीम | गुना/आरोन/ राघौगढ़/ बमोरी सितंबर में हुई बारिश से खरीफ की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। अब तक...

Bhaskar News Network

Sep 14, 2019, 07:33 AM IST
Guna News - mp news september rains did not give a chance of harvesting on 60 days of soybean sowing due to lack of rain
भास्कर टीम | गुना/आरोन/ राघौगढ़/ बमोरी

सितंबर में हुई बारिश से खरीफ की फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है। अब तक प्रशासनिक स्तर पर कोई सर्वे नहीं हुआ है, इसलिए नुकसान के आधिकारिक आंकड़े नहीं है।

पर भास्कर ने अलग-अलग इलाकों में जो ग्राउंड रिपोर्ट की है, उससे सोयाबीन के मामले में दो स्तर पर प्रभाव पड़ने की बात सामने आ रही है। जिन किसानों ने 60 दिन में पकने वाली किस्म 9560 की बोवनी की थी, उनकी 90 फीसदी तक फसल तबाह हो गई है।

करीब 45 से 50 फीसदी किसान इसकी बोवनी करते हैं। जबकि 80 से 90 दिन में पकने वाली किस्म सम्राट (9305) को 50 से 60 फीसदी तक नुकसान है। यानि इसकी उत्पादकता में 50 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। इस साल 2.15 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बोवनी की गई थी। इस लिहाज से एक लाख हेक्टेयर में बोई गई फसल तो लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गई है। खरीफ सीजन की कुल बोवनी का 75 फीसदी यही फसल होती है।

पक चुकी सोयाबीन 90%तबाह, लेट वाली किस्म में प्रति हेक्टेयर में 20 की जगह 10 क्विंटल ही निकलेगी उपज

इस तरह बिगड़ा किसान का गणित

आरोन के कृषि विज्ञान केंद्र के विशेषज्ञों से मिली जानकारी के अनुसार अगर अच्छी स्थिति रहती तो प्रति हेक्टेयर उड़द का उत्पादन औसतन 10 क्विंटल होता। पर अब यह 3-4 क्विंटल तक सिमट सकता है। ऐसे में जो उत्पादन 6 लाख क्विंटल तक होने की उम्मीद थी, वह 1 से 1.25 लाख क्विंटल तक रह सकता है। इसी तरह सोयाबीन की औसत उत्पादकता 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है। सवा दो लाख हेक्टेयर में इससे 60 लाख क्विंटल उत्पादन होने की संभावना थी। पर अब इसके उत्पादन में 30 से 40 लाख क्विंटल की कमी आ सकती है।

जामनेर क्षेत्र के खेतों में खड़ी सोयाबीन की फसल में लगी फली के बीज अकुंरित हो गए।

कब होगा सर्वे : दो मंत्रियों के निर्देेश के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कोई काम नहीं

किसान करीब 15 दिन से लगातार नुकसान की बात कर रहे हैं। इस दौरान दो मंत्री खुद खेतों में जाकर नुकसान का जायजा ले चुके हैं। दोनों मंत्रियों ने प्रशासन को नुकसान का जायजा लेने के निर्देश दिए थे। पर जमीनी स्तर पर अभी तक नुकसान का कोई आंकड़ा सामने नहीं आया है। कलेक्टर भास्कर लाक्षाकार से शुक्रवार को संपर्क करने की कोशिश की गई। पर वे ग्वालियर में प्रदेश के मुख्य सचिव के साथ मीटिंग में थे। हालांकि उन्होंने मैसेज किया कि सर्वे कराया जा रहा है।

फलियां खेत में ही अंकुरित

जोरदार बारिश से किस तरह का नुकसान झेल रही है सोयाबीन

1. पुन: अंकुरण :
9560 किस्म वाली फसल लगभग कटने के स्तर पर थी। म्याना के पास खासखेड़ा गांव के प्रगतिशील किसान हरिसिंह रघुवंशी ने बताया कि फलियां पक चुकी थीं और इसे पानी की बिल्कुल जरूरत नहीं थी। अब लगातार बारिश से पकी फलियों के बीज फिर से अंकुरित होने लगे हैं। यह बड़ा नुकसान है। उन्होंने बताया कि 45 से 50 फीसदी किसान इसी की बोवनी करते हैं, क्योंकि यह कम अवधि में और कम पानी में पक जाती है।

2. अफलन : लंबी अवधि वाली 9305 किस्म की सोयाबीन में अफलन की स्थिति देखने मिल रही है। जामनेर के किसान रामसिंह भील, हरनारायण धाकड़, भैयालाल धाकड़ आदि ने बताया कि सितंबर के प्रारंभिक हफ्ते में इसमें फलियां आना शुरू होती हैं। वर्तमान में यह कमजोर अवस्था में थीं। बारिश की मार से यह झड़ गईं। इससे अफलन की समस्या आ रही है।

3. गलन : सोयाबीन और मक्का की चाहे जो भी किस्म हो, उसे इस समस्या से जूझना पड़ रहा है। यह गलने लगी हैं। कई किसानों का दावा है कि उड़द, मूंग, अरहर जैसी फसलें तो गलकर पूरी तरह से तबाह हो गई हैं।

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