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रेत से ओवरलोड ट्रक को टीआई ने खनिज अफसर को सौंपा था, लेकिन बिना कार्रवाई के छोड़ा

Guna News - गुना | जिले में बड़े पैमाने पर हो रहे खनिज के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सिटी कोतवाली पुलिस ने रेत से भरा 22 चका...

Nov 22, 2019, 07:56 AM IST
गुना | जिले में बड़े पैमाने पर हो रहे खनिज के अवैध कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए सिटी कोतवाली पुलिस ने रेत से भरा 22 चका ट्रक को पकड़कर खनिज विभाग के हवाले किया था, लेकिन इस मामले में कोई कार्रवाई न किए जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। खनिज विभाग ने ट्रक को बिना जुर्माने के छोड़ दिया है। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि रॉयल्टी थी तो जुर्माना किस बात का? उधर पुलिस का कहना है कि ट्रक ओवरलोड था, जितनी अधिक रेत भरी थी, उसी आधार पर कार्रवाई होनी चाहिए थी। इस मामले में पुलिस और खनिज विभाग आमने-सामने हैं। क्योंकि पुलिस कह रही है कि हमने सही कार्रवाई की, तो ट्रक क्यों छोड़ा? विभाग का दावा है कि पुलिस ने गलत कार्रवाई की, जब रॉयल्टी थी तो ट्रक पकड़ना ही नहीं चाहिए था।

16 नवंबर को जब्ती की थी : सिटी कोतवाली पुलिस ने 16 नवंबर की रात ट्रक क्रमांक आरजे 206बी 7674 को पकड़ा था। यह ट्रक शहर में ही खाली हो रहा था। पुलिस ने देखा कि यह ओवरलोड है तो जब्त कर दूसरे दिन ही खनिज विभाग को पत्र के माध्यम से सौंप दिया था। इसमें उचित कार्रवाई का अनुरोध किया गया था। टीआई अवनीत शर्मा का कहना है कि रॉयल्टी 45 घन मीटर की थी, लेकिन यह ओवरलोड था। एसपी के संज्ञान में लाने के बाद इसे विभाग को सौंप दिया था।

ट्रक को छोड़ने की चर्चाएं : पुलिस द्वारा जब्त ट्रक को खनिज विभाग ने बिना कार्रवाई के छोड़ दिया है। खनिज अधिकारी आरके खातरकर का कहना है कि इटारसी से गुना ट्रक रेत लेकर आया था, उसके पास रॉयल्टी थी, फिर पुलिस ने इसे जब्त क्यों किया? इस वजह से हमने ट्रक को छोड़ा है। 45 घनमीटर से ज्यादा माल नहीं था। इसकी रॉयल्टी थी। पुलिस हमसे ज्यादा थोड़ी जानकारी रखती है।

सवाल हुए खड़े : ट्रक को जब्ती और बाद में छोड़े जाने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि जब ट्रक के माल को लेकर विवाद था तो खनिज अधिकारी को वरिष्ठ अधिकारियों के संज्ञान में प्रकरण को लाना था। पुलिस ने ट्रक जब्त किया था, अगर गलत कार्रवाई की गई थी तो टीआई को बुलाकर उनके सामने माल की घन क्षमता का आकलन होना चाहिए था। बिना पुलिस को सूचना दिए बिना ही यह तय कर लिया कि ट्रक में माल की क्षमता सही थी। इसके अलावा यह प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में भी भेजा जा सकता था।

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