मध्यप्रदेश / 39 साल पहले पिता थे आमने-सामने, अब बेटे



39 years ago Father was face to face, now son
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39 years ago Father was face to face, now son

  • ग्वालियर लोकसभा सीट पर इस बार अजब संयोग

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 05:53 AM IST

भगवान उपाध्याय | ग्वालियर . 39 साल बाद ग्वालियर लोकसभा सीट पर अजीब संयोग बना है। 1980 के लोकसभा चुनाव में इस सीट से जनता पार्टी के उम्मीदवार नारायण कृष्ण शेजवलकर के सामने कांग्रेस के राजेंद्र सिंह खड़े थे। शेजवलकर लगभग 25 हजार वोट से चुनाव जीते। संयोग यह कि इस बार शेजवलकर के पुत्र विवेक शेजवलकर भाजपा से और राजेंद्र के पुत्र अशोक सिंह कांग्रेस से उम्मीदवार हैं। विवेक का यह पहला लोकसभा चुनाव है। वे दो बार ग्वालियर के महापौर रह चुके हैं।

 

विवेक के पिता नारायण दो बार सांसद रहे, पर सिंधिया से हारे : संघ में गहरी पैठ रखने वाले विवेक के पिता लगभग चार दशक तक सक्रिय राजनीति में रहे। वह दो बार ग्वालियर से सांसद रहे। 1977 में उन्होंने कांग्रेस के सुमेर सिंह को हराया था। 1980 में कांग्रेस के ही राजेंद्र सिंह को परास्त किया। 1991 के लोकसभा चुनाव में नारायण  कांग्रेस के माधवराव सिंधिया से लगभग 1 लाख वोटों से हार गए थे। 


राजेंद्र प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे-अशोक सिंह के पिता राजेंद्र सिंह 1980 में लोकसभा चुनाव हारने के बाद वर्ष 2003 में विधानसभा का चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। हालांकि राजेंद्र 1972 में ग्वालियर ग्रामीण से विधानसभा चुनाव जीते थे। वे 1975 से 1977 तक प्रदेश सरकार में मंत्री भी रहे। अपने पिता की विरासत संभालने वाले अशोक तीन बार लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली।

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