मध्य प्रदेश / गुना-शिवपुरी लोकसभा क्षेत्र में ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए अब तक का सबसे चुनौतीपूर्ण चुनाव



6th phase poll  guna shivpuri
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6th phase poll  guna shivpuri

  • ज्योतिरादित्य ने 22 दिन में 97 तो प्रियदर्शिनी राजे ने 34 दिन में 105 चुनावी सभाएं की हैं
  • विजियाराजे सिंधिया, माधवराव और ज्योतिरादित्य ने अपने जीवन का पहला चुवान यहीं से लड़ा

May 08, 2019, 04:16 PM IST

गुना/शिवपुरी। क्या इस बार गुना-शिवपुरी लोकसभा सीट पर इस बार चुनाव कांग्रेस प्रत्याशी ज्योतिरादित्य सिंधिया के लिए मुश्किल भरा है? इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा रहा है कि पति से ज्यादा क्षेत्र में इस बार उनकी पत्नी सक्रिय हैं। ज्योतिरादित्य ने 22 दिन में 97 तो प्रियदर्शिनी राजे ने 34 दिन में 105 चुनावी सभाएं की हैं। और ये सिलसिला शुक्रवार की शाम प्रचार थमने तक जारी रहेगा। भाजपा ने यहां से डॉ.केपी यादव को मैदान में उतारा है। 

 

स्थानीय लोग बताते हैं कि इस चुनाव से पहले जितने भी चुनाव हुए सिंधिया परिवार का कोई सदस्य इतना एक्टिव नहीं रहा। इस बार चुनाव तो ज्योतिरादित्य लड़ रहे हैं लेकिन उनसे ज्यादा मेहनत उनकी पत्नी प्रियदर्शिनी राजे कर रही हैं। प्रियदर्शिनी पिछले 34 दिनों से शिवपुरी, कोलारस, पिछोर, गुना, बमोरी, चंदेरी, मुंगावली और अशोकनगर विस सीट पर मोर्चा संभाले हुए हैं। जबकि ज्योतिरादित्य महज 22 दिन ही दौरे पर रह पाए, क्योंकि उनके पास उप्र का भी प्रभार है। यानी ज्योतिरादित्य के मुकाबले उनकी पत्नी 12 दिन ज्यादा क्षेत्र में रहीं। 


यहां सिंधिया नाम ही काफी है: मध्य प्रदेश की गुना संसदीय क्षेत्र के बारे में कहा जाता है कि यहां पार्टी कोई भी हो जितेगा वही जिसके नाम के पीछे सिंधिया लिखा होगा। सिंधिया घराने की राजनीतिक मैदान में उतर चुनाव लड़ने की शुरुआत भी गुना से ही हुई। राजमाता  विजियाराजे सिंधिया, माधवराव सिंधिया और ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जीवन का पहला चुवान यहीं से लड़ा। 

 

जनसंघ के टिकट पर जीते थे माधवराव: सन 1957 में यहां हुए पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के टिकट पर सिंधिया राजघराने की महारानी विजिया राजे ने पहला चुनाव लड़ा। 1971 में विजयाराजे के बेटे माधवराव सिंधिया ने भी पहला चुनाव यहीं से जनसंघ के टिकट पर लड़ा और जीता। माधवराव के निधन के बाद उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जीवन के राजनीतिक करियर की शुरुआत 2002 में हुए उपचुनाव में यहीं से की। पिछले 4 चुनावों से इस सीट पर कांग्रेस के ज्योतिरादित्य सिंधिया को ही जीत मिली है। 

 

स्वतंत्रता पार्टी से लड़ीं विजयाराजे : 1957 में विजयाराजे सिंधिया ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा और हिंदू महासभा के विष्णूपंत देशपांडे को शिकस्त दी। 1962 में हुए चुनाव में कांग्रेस ने रामसहाय पांडे मैदान ऊतारा। उन्होंने हिंदू महासभा के वीजी देशपांडे को मात दी। उपचुनाव में यहां से कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। स्वतंत्रता पार्टी के जेबी कृपलानी को जीत मिली। 1967 में हुए लोकसभा चुनाव में स्वतंत्रता पार्टी की ओर कांग्रेस की पूर्व नेता विजयाराजे सिंधिया चुनाव मैदान में उतरी। उन्होंने कांग्रेस के डीके जाधव को यहां पर शिकस्त दी। 


माधवराव ने जनसंघ से जीता था पहला चुनाव : 1971 में विजयाराजे के बेटे माधवराव सिंधिया जनसंघ के टिकट पर जीत हासिल की। 1977 के चुनाव में वह यहां से निर्दलीय लड़े और 80 हजार वोटों से भारतीय लोकदल के गुरुबख्स सिंह को हराया। 1980 में कांग्रेस के टिकट पर यहां से जीते। 1984 में माधवराव ग्वालियर से चुनाव लड़े और गुना से कांग्रेस ने महेंद्र सिंह को टिकट दिया। उन्होंने भाजपा के उद्धव सिंह को हराया। 1989 में यहां से विजयाराजे सिंधिया एक बार फिर यहां से लड़ीं और तब के कांग्रेस के सांसद महेंद्र सिंह को शिकस्त दी। इसके बाद लगातार विजियाराते चार चुनाव यहां से जीतीं। विजियाराजे के निधन के बाद माधवराव सिंधिया यहां से चुनाव लड़े और जीते। 


माधवराव के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया : 2001 में माधवराव सिंधिया के निधन के बाद 2002 में हुए उपचुनाव में उनके बेटे ज्योतिरादित्य सिंधिया यहां से लड़े। ज्योतिरादित्य 2002 से 2014 के बीच हुए सभी लोकसभा चुनाव में जीते। इस सीट से कांग्रेस जहां 9 बार जीत दर्ज कर चुकी है तो ये सीट जनसंघ की झोली में 4 बार ये सीट गई है। 1 बार जनसंघ को यहां से जीत मिली है। भाजपा इस सीट पर तभी जीत सकी है जब जब विजयाराजे सिंधिया उसके टिकट पर चुनाव लड़ीं। 


चार पर भाजपा और चार पर कांग्रेस: गुना लोकसभा सीट के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं. यहां पर शिवपुरी, बमोरी, चंदेरी, पिछोर, गुना, मुंगावली, कोलारस, अशोक नगर विधानसभा सीटें हैं. यहां की 8 विधानसभा सीटों में से 4 पर बीजेपी और 4 पर कांग्रेस का कब्जा है। 

 

लोकसभा क्षेत्र की स्थिति

सन जीते हारे
1957 विजयाराजे सिंधिया(कांग्रेस) वीजी देशपांडे(हिंदू महासभा)
1962 रामसहाय पांडे(कांग्रेस) विष्णूपंत देशपांडे(हिंदू महासभा)
1967 विजयाराजे सिंधिया(स्वतंत्रता पार्टी) डीके जाधव(कांग्रेस)
1971 माधवराव सिंधिया(कांग्रेस) देवराव कृष्ण जाधव(कांग्रेस)
1977 माधवराव सिंधिया(कांग्रेस) गुरुबख्स सिंह(भारतीय लोकदल)
1980 माधवराव सिंधिया(कांग्रेस) नरेश जोहरी(जनता पार्टी)
1984 महेंद्र सिंह(कांग्रेस) उद्धव सिंह(भाजपा)
1989 विजयाराजे सिंधिया(भाजपा) महेंद्र सिंह(कांग्रेस)
1991 विजयाराजे सिंधिया(भाजपा) शशिभूषण(कांग्रेस)
1996 विजयाराजे सिंधिया(भाजपा) केपी सिंह(कांग्रेस)
1998 विजयाराजे सिंधिया(भाजपा) देवेंद्र सिंह(कांग्रेस)
1999 माधवराव सिंधिया(कांग्रेस) राव देशराज सिंह(भाजपा)
2004 ज्योतिरादित्य सिंधिया(कांग्रेस) हरिवल्लभ शुक्ला(भाजपा)
2009 ज्योतिरादित्य सिंधिया(कांग्रेस) नरोत्तम मिश्रा(भाजपा)
2014 ज्योतिरादित्य सिंधिया(कांग्रेस) जयभान सिंह पवैया(भाजपा)

 

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