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महिलाओं ने अपने बल पर बदली यहां की तस्वीर, रोजाना 5 हजार लीटर दूध का होता है प्रोड्क्शन

शराब का इलीगल बिजनेस करने वाले पति की पिटाई से तंग आकर एक महिला ने बगावत कर दी।

रविकांत गुप्ता | Last Modified - Jan 15, 2018, 06:06 AM IST

  • महिलाओं ने अपने बल पर बदली यहां की तस्वीर, रोजाना 5 हजार लीटर दूध का होता है प्रोड्क्शन
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    मुरैना(ग्वालियर).शराब का इलीगल बिजनेस करने वाले पति की पिटाई से तंग आकर एक महिला ने बगावत कर दी। महिला ने न केवल पति के इस इलीगल बिजनेस की पुलिस थाने में शिकायत की बल्कि इसके खिलाफ गांव की महिलाओं को एकजुट किया। महिला ने पहले शराब के बिजनेस को बंद कराया साथ ही नशा करने वालों पर जुर्माना लगाने का ऐलान कर दिया। इसके महिलाओं ने मिलकर डेयरी बिजनेस की शुरुआत की। इलीगल शराब के बिजनेस के लिए फेमस रहा यह गांव अब मिल्क प्रोडक्शन में अपनी पहचान बना चुका है। 50 घरों की बस्ती वाले इस गांव में अब रोजाना 5 हजार लीटर मिल्क का प्रोडक्शन हो रहा है।

    - कारोबार करने वाले पति की पिटाई से तंग आकर उमरियापुरा गांव की अनपढ़ चंद्रावली कुशवाह ने शराबबंदी के खिलाफ हल्ला बोल दिया। चंद्रावली ने न केवल पति के अवैध शराब के कारोबार की थाने में शिकायत की बल्कि इसके खिलाफ गांव की महिलाओं को भी एकजुट किया।

    - अन्य महिलाएं भी अपने-अपने पति से पीड़ित थी, इसलिए वे भी जुड़ गईं। पहले शराब का कारोबार बंद कराया और फिर नशा करने वालों पर जुर्माना लगाने का एेलान कर दिया। शराब का कारोबार बंद होने से इनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया। इस
    - उमरियापुरा गांव के हर घर में 6 से 10 भैंसें हैं। चंद्रावली कहती हैं कि पति के शराब का धंधा बंद होने से रोजगार का संकट खड़ा हुआ तो हम लोगों ने दूध का कारोबार करने का मन बनाया। देखते ही देखते दो साल में स्थिति यह बन गई कि हर घर में छह से दस भैंसें हैं।

    - हमारे गांव में रोजाना पांच हजार लीटर दूध का उत्पादन हो रहा है। इस दूध को बेचकर घर का खर्च तो चला ही रहे हैं, हम लोगों ने पक्के मकान भी बनवा लिए हैं। अाज मैं और गांव की महिलाएं अपने पैरों पर खड़ी हैं तो पति भी मदद करते हैं।

    भैंस खरीदने के लिए लिया कर्ज भी दूध बेचकर चुकाया
    - उमरिया में 50 घरों की बस्ती में 500 से अधिक भैंसें हैं। इनकी देखभाल महिलाएं ही करती हैं। गांव की राजश्री कुशवाह बताती हैं कि भैंसें खरीदने के लिए हमने चिलर सेंटरों से पैसे उधार लिए और उन्हीं चिलर सेंटरों को दूध बेचकर कर्ज पटा दिया। आज हम रोजाना पांच हजार लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं।

    दो साल से थाने में दर्ज नहीं हुआ गांव का एक भी केस | दो साल से इस गांव में एक भी केस थाने में दर्ज नहीं हुआ। दिमनी थाना प्रभारी शिवकुमार शर्मा कहते हैं कि घरेलू हिंसा तो छोड़िए, अब छोटे-मोटे झगड़े के मामले भी नहीं आते। महिलाओं का प्रयास सचमुच रंग लाया।

    अशिक्षित महिलाओं की बदौलत आया सामाजिक-आर्थिक बदलाव
    ^उमरियापुरा गांव सामाजिक व आर्थिक बदलाव की मिसाल है। यहां अवैध शराब का कारोबार दूध में तब्दील हो गया। लोग सम्पन्न हो रहे हैं। गांव की अशिक्षित महिलाओं ने ही यह संभव कर दिखाया है।
    -अजय रिठौरिया, नायब तहसीलदार दिमनी

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Web Title: A Woman Rebuked By The Businessmans Beating
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