ग्वालियर

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कॉलेज में एग्जाम के दौरान मुलाकात के बाद की थी शादी, स्टूडेंट्स ने बताई ये कहानियां

पढ़ाई के दौरान जिन जूनियर्स की रैगिंग ली वही आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं।

Danik Bhaskar

Jan 28, 2018, 08:01 AM IST

ग्वालियर. स्कूल और कॉलेज दोनों से ही लाइफ में टर्निंग प्वाॅइंट आता है, लेकिन मुझे तो जिदंगी ही यहां से मिली। जिस हमसफर की तलाश मुझे थी, वह आखिर मुझे मेरे ही इंस्टीट्यूट में मिल गई। पॉलिटेक्निक से पढ़ाई करने के बाद एक मल्टीनेशनल कंपनी में मेरा प्लेसमेंट हो गया और इंस्टीट्यूट में बतौर एक्सपर्ट जब मैं 1998 में प्रायोगिक परीक्षा के लिए गया तो यहां मेरी मुलाकात दीप्ति से हुई।

पहले एक तरफा प्यार फिर उसकी तरफ से इकरार और कुछ समय बाद हम लोग शादी के बंधन में बंध गए। यह कहना है भीमराव अंबेडरकर कॉलेज के टेक्सटाइल डिपार्टमेंट की एल्युमिनी मीट में साउथ अफ्रीका के पास जम्बिया से आए दुर्गेश दुबे का। वह सिटी रिपोर्टर से इंस्टीट्यूट से जुड़े अनुभव साझा कर रहे थे। इस मीट का शुभारंभ केन्द्रीय मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने किया।

इंस्टीट्यूट की यह दूसरी मीट

इंस्टीट्यूट की अभी तक दो एल्युमिनी मीट हुई है। पहली मीट वर्ष 2015 में हुई। इसके बाद दूसरी मीट शनिवार को हुई। इसमें देश-विदेश से करीब 132 ओल्ड स्टूडेंट्स शामिल हुए। मीट में शामिल एल्युमिनाई ने स्टूडेंट्स को कैंपस प्लेसमेंट और जॉब आप्चुनिटी से जुड़े अनुभव साझा किए।

400 रुपए लेकर निकला, सैलरी के बाद लौटा तो फैमिली ने लगाया गले

टेक्सटाइल कमिश्नर ऑफिस के असिसटेंट डायरेक्टर अरुण शुक्ला ने बताया कि हमारे समय में आए दिन मारपीट हुआ करती थी। जिसकी वजह से मुझे दो बार सजा भी मिली। पास आउट होने के बाद 400 रुपए लेकर घर से गया। उसके बाद निरंतर एक्जाम दिया और जब जॉब लग गई, तब घर लौटा।

जिनकी रैंगिंग ली वही हैं अच्छे दोस्त

ग्वालियर एक्साइड इंस्पेक्टर तीर्थराज भारद्वाज ने बताया कि टेक्सटाइल विभाग में 1999 में पास आउट होने के बाद चार साल अलग अलग कंपनियों में जॉब करने के बाद निरंतर परीक्षाएं दी। पढ़ाई के दौरान जिन जूनियर्स की रैगिंग ली वही आज मेरे सबसे अच्छे दोस्त हैं। वह कहते हैं कि कॉलेज से एक चीज सीखने को मिली वो है निरंतर मेहनत करते रहने की।

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