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भास्कर इंटरव्यू- कलेक्टर: विरोध का अंदेशा, लेकिन संपत्ति वैध करने यही एकमात्र विकल्प

आधा ग्वालियर अवैध है। इसकी 1 लाख संपत्तियां नजूल जमीन पर हैं। इनसे 20 हजार करोड़ का नजूल राजस्व वसूल सकते हैं।

Danik Bhaskar | Dec 04, 2017, 08:25 AM IST

ग्वालियर. आधा ग्वालियर अवैध है। इसकी 1 लाख संपत्तियां नजूल जमीन पर हैं। इनसे 20 हजार करोड़ का नजूल राजस्व वसूल सकते हैं। यही नहीं 1500 करोड़ रुपए का लीज रेंट हर साल अलग से शासन को मिलेगा। नजूल राजस्व को लेकर यह नई कार्ययोजना जिला प्रशासन ने बनाई है। यह तथ्य अपने आप में बड़े हैं और आधे शहर के लिए चिंता की बात है। मप्र में महाकौशल को छोड़कर किसी भी संभाग व अन्य बड़े शहर में नजूल का रिकॉर्ड नहीं है। 6 महीने पूर्व आए कलेक्टर राहुल जैन ने यह बात पकड़ी है और वे इस पर अमल शुरू करा चुके हैं। लेकिन इतनी बड़ी राशि की वसूली आसान नहीं है। इसे लेकर कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं, जवाब भास्कर ने कलेक्टर से ही पूछे।

पूर्व कलेक्टरों ने इस दिशा में काम नहीं किया तो क्या मैं भी नहीं करूं

आधा शहर अवैध है। यह बात चौकाती है। प्रशासन के इस दावे पर भरोसा कैसे करें।
- ग्वालियर में नजूल नक्शे बनाने का काम नहीं हो पाया। इसलिए लोग सरकारी जमीनों पर कब्जे करते रहे। रिकॉर्ड न होने से चिन्हित नहीं हुए। अब हम यह काम शुरू कर रहे हैं। इससे अवैध कब्जाधारी लोग वैध होंगे और सरकार को राजस्व मिलेगा।

जब रिकॉर्ड ही नहीं है तो फिर संपत्तियों की संख्या और वसूली का आंकलन कैसे किया?
- हमने नगर निगम और बंदोबस्त के रिकॉर्ड चेक किए। निगम ने बताया उनके क्षेत्र में दो लाख संपत्ति हैं। फिर हमने राजस्व रिकॉर्ड चेक कराया तो उसमें 260 नजूल लीजें मिलीं। इसके बाद बंदोबस्त का रिकॉर्ड चेक कर देखा कि शहरी क्षेत्र में कितनी सरकारी जमीन है। उसके आधार पर यह अंदाजा लगाया कि नगरीय क्षेत्र की दो लाख संपत्तियों में से एक लाख संपत्ति नजूल जमीन पर है। फिर इस जमीन की वर्तमान मार्केट वैल्यू देखी। इसके आधार पर अनुमान लगाया कि नजूल जमीन पर मौजूद एक लाख संपत्तियों से 20 हजार करोड़ रूप्ए का एकमुश्त टैक्स शासन को मिल जाएगा, अगर हम उन्हें लीज दे दें।

20 हजार करोड़ की वसूली कैसे होगी?
- हमें अंदेशा है कि शुरू में हमें लोगों का विरोध झेलना पड़ सकता है। लेकिन आज नहीं तो कल उन्हें सरकारी जमीन पर बनी अपनी संपत्तियों को वैध कराना ही होगा। अभी करा लेंगे तो भविष्य में विकास योजनाओं के रास्ते में आने पर घर-दुकान टूटने का डर उन्हें नहीं रहेगा।

नजूल की जमीन पर संपत्ति 5 से 6 बार खरीदी-बेची जा चुकी होगी। इसमें वर्तमान कब्जेदार का क्या दोष?
अब लीज लेकर टैक्स तो उसे ही देना होगा, जो वर्तमान में काबिज है। उससे पहले के लोगों को लेकर क्या करना है, शासन से मार्गदर्शन लेंगे।

सरकारी जमीन पर कब्जा आपके अधिकारियों की लापरवाही है। उनकी जवाबदेही क्यों नहीं?
- पॉलिसी बन रही है। शासन के मार्गदर्शन के हिसाब से कार्रवाई करेंगे।
2018 में चुनाव है। भाजपा सरकार के खिलाफ इस मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां लामबंद हो सकती हैं।
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हमें इसका आभास है। इसलिए हम पहले उन इलाकों को चुन रहे हैं, जहां लोगों में टैक्स चुकाने की क्षमता अधिक है। जब वे टैक्स देंगे तो संदेश शहर के दूसरे इलाकों में जाएगा।
पूर्व कलेक्टरों ने आपके इस कदम को रिस्की माना है। जनता विरोध करेगी तो क्या करेंगे।
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पूर्व कलेक्टरों ने इस दिशा में काम नहीं किया तो क्या मैं भी नहीं करूं। यह काम रिस्की है तो यह उनका लुकआउट है। जनता हमारी बात को समझे, हम रणनीति बना रहे हैं।
क्या रणनीति बना रहे हैं।
- {हम पूरे 66 वार्डों में एक साथ नहीं जाएंगे। मैंने अपने नजूल अधिकारियों (लश्कर, झांसी रोड, मुरार, ग्वालियर सिटी क्षेत्र के एसडीएम)को बोला है कि वे अगले 15 दिन में अपने-अपने क्षेत्र में एक-एक वार्ड चुनें। वहां सर्वे करें और इसके साथ ही कैंप करें। लोगों के बीच जाएं और उन्हें समझाएं कि भले ही वे 50-60 साल से काबिज हैं लेकिन वे शासन की नजर में आज भी अतिक्रमणकारी ही हैं। लीज लेंगे तो उन्हें भी वैध मालिकाना हक मिल सकेगा।