--Advertisement--

1 लाख पर देश में 300 और सहरियाओं में 3200 को टीबी, मायके लौट रहीं बेटियां

ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, श्योपुर में सहरिया आदिवासियों में फैली टीबी (ट्यूबरकुल बेसिलाइ) बीमारी को लेकर सर्वे किया।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 06:51 AM IST

ग्वालियर. इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की जबलपुर स्थित टीम ने ग्वालियर, गुना, शिवपुरी, श्योपुर में सहरिया आदिवासियों में फैली टीबी (ट्यूबरकुल बेसिलाइ) बीमारी को लेकर सर्वे किया। यह सर्वे वर्ष 2013-14 में पूरा हुआ। इसके बाद अगले दो साल तक सहरिया आदिवासियों के बीच फैली टीबी बीमारी को लेकर गहन रिसर्च हुई।

- रिसर्च टीम का हिस्सा रहे आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने दैनिक भास्कर को बताया देश में टीबी बीमारी का रेशियो एक लाख लोगों पर 300 मरीजों का है। लेकिन सहरिया समाज के अंदर एक लाख लोगों में से 3200 लोगों को टीबी बीमारी फैल रही है। यानी नेशनल फिगर से 10 गुना अधिक तेजी से टीबी सहरिया आदिवासियों को अपनी चपेट में ले रही है।

- इस रिपोर्ट को अभी हाल ही में अक्टूबर 2017 को ग्वालियर में हुई एक कॉन्फ्रेंस के दौरान मप्र के आदिवासी विकास मंत्री लाल सिंह आर्य और स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह के समक्ष प्रस्तुत भी किया गया। रिपोर्ट के आधार पर दैनिक भास्कर टीम ने घाटीगांव स्थित सहरिया बहुल ग्रामों बारहमासी, बराहना, रामपुर, बाजना, चुई, आरोन, पाटई, बन्हेरी में पहुंचकर हालात का जायजा लिया। शराब, टीबी और बेरोजगारी के कारण सहरिया जनजाति की औसत आयु 40 से 50 वर्ष रह गई है।

पति को शराबखोरी से दूर करने ले आई मायके

- पति दिनभर शराब में डूबा रहता था। खाने-खाने को मोहताज हो गए थे। क्या करती मैं ससुराल में रहकर। बच्चे बीमार हो रहे थे। इसलिए पति व बच्चों को लेकर मायके आ गई। यहां कम से कम पति को शराब से दूर रखकर काम करने को मजबूर तो कर पा रही हूं। मजदूरी के लिए हम ठेके पर दूसरे जिले जा रहे हैं।

ससुराल में पति के साथ बच्चे भी हो रहे थे बीमार

- रामप्यारी ने बताया कि ससुराल देवई, भितरवार में थी। बेरोजगारी और शराब के सेवन से पति बीमार रहने लगा। बच्चे भी बीमार हो गए। इसलिए मायके में पति व बच्चों को लेकर आई। पति को शराब की लत छुड़ाने की कोशिश कर रही हूं।

बेरोजगारी व शराब ने पति को बीमार कर रखा था

- राजाबेटी बताती हैं कि उनकी मढ़खेरा, शिवपुरी में ससुराल थी। रोजगार नहीं था। पति को शराब की लत थी। हर समय वो बीमार रहते थे। इसलिए पति को लेकर मायके आना पड़ा। यहां वो खदान में मजदूरी करता है।