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किराए की गाड़ी में खुद घर-घर जाकर बेच रहे सब्जी, रोजना 8 हजार रुपए मुनाफा

माइक पर 'मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती धुन के साथ' बेचते हैं सब्जियां।

रामकृष्ण उपाध्याय | Last Modified - Jan 23, 2018, 09:34 AM IST

किराए की गाड़ी में खुद घर-घर जाकर बेच रहे सब्जी, रोजना 8 हजार रुपए मुनाफा

ग्वालियर. बनवार के विश्वंभर सिंह गुर्जर मंडी में मटर बेचने गए। जिस व्यापारी ने उनकी मटर एक हजार रुपए प्रति क्विंटल में खरीदी। उनके सामने ही दिल्ली के एक व्यापारी को 1500 रुपए क्विंटल में बेच दी। बस यहीं उन्होंने बिचौलियों को सब्जी न बेचकर घरों में सीधे सस्ती और ताजी सब्जी उपलब्ध करवाने की ठान ली। वे अपने तीन अन्य साथियों के साथ जैविक तरीके (देशी खाद) से उगाईं सब्जियों की डोर-टू-डोर सेलिंग कर रहे हैं।

इस काम में और किसानों को अपने साथ जोड़ते जाएंगे

- ठेलों पर सब्जी जिस कीमत पर मिल रही है उनसे कम कीमत पर दे रहे हैं। विश्वंभर सिंह गुर्जर एमएससी (हार्टिकल्चर) तक पढ़े हैं। उन्होंने एक साल पहले ही फर्टिलाइजर कंपनी से नौकरी छोड़ने के बाद वैज्ञानिक ढंग से खेती को अपनाया। खेती के साथ डोर-टू- डोर सेलिंग के लिए उन्होंने बनवार के बालकिशन कुशवाह(8वीं पास), बिरखाराम माहोर(5वीं पास) और हिम्मतगढ़ के नाहरसिंह कुशवाह(8वीं पास) को अपने साथ जोड़ा है।

- सब्जी बेचने के लिए किसानों ने एक हजार प्रतिदिन के हिसाब से गाड़ी किराए पर ली है। बावजूद इसके चारों लोगों को सब्जी बेचकर एक दिन के दो-दो हजार रुपए मुनाफे के मिल जाते हैं। इनका कहना है वे इस काम में और किसानों को अपने साथ जोड़ते जाएंगे।

अभी ये सब्जी ला रहे किसान

किसान इस समय मटर, सेम फली, आलू, बैंगन, टमाटर लेकर आ रहे हैं। थोक मंडी में व्यापारी मटर 10 रुपए किलो में खरीद रहे हैं। हाथ ठेले वाले इसे 30 रुपए किलो बेच रहे हैं। किसान मटर 20 रुपए किलो बेच रहे हैं। जिस सेमफली को व्यापारी 18 रुपए में खरीद रहा है। ठेले वाले 40 रुपए में बेच रहे हैं। किसानों ने कीमत 30 रुपए रखी है। ठेले पर 30 वाला बैंगन 20 रुपए और 20 वाला टमाटर 15 रुपए किलो में बेच रहे हैं।

पॉलीथिन के इस्तेमाल से बचने का भी दे रहे संदेश

ताजी सब्जी बेचने के साथ ही ये किसान पॉलीथिन के इस्तेमाल से बचने का संदेश भी लोगों तक पहुंचा रहे हैं। इसके लिए बाकायदा गाड़ी पर माइक लगा रखा है। जिस पर मेरे देश की धरती सोना उगले, उगले हीरे-मोती धुन के साथ पॉलीथिन के इस्तेमाल से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों को भी बताया जा रहा है।

4 घंटे में बिक रही पूरी सब्जी किसान

सुबह 7 बजे हर दिन शहर की अलग-अलग कॉलोनी में पहुंच जाते हैं। सुबह 11 बजे तक खत्म कर वापस गांव चले जाते हैं। मसलन सोमवार को आठ क्विंटल मटर, एक क्विंटल सेम, एक क्विंटल आलू, 25 किलो बैंगन, 20 किलो टमाटर बेचे। अब फोन नंबर मांगते हैं लोग: किसानों को सब्जी बेचते हुए 4 दिन हो गए। वे बताते हैं कि पढ़े-लिखे लोग ताजी सब्जी पसंद कर रहे हैं। हर दिन आने तथा फोन नंबर देने की बात कहते हैं। कुछ लोग मोल भाव ज्यादा करते हैं और तोल पर झिकझिक करते हैं।

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Web Title: kiraae ki gaaadei mein khud ghr-ghr jaakar bech rahe sabji, rojnaa 8 hazaar rupaye munaafaa
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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