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भास्कर इंटरव्यू: जेयू में कुलपति से विवाद के कारण चर्चा में वित्त नियंत्रक

Bhaskar News | Last Modified - Jan 08, 2018, 07:34 AM IST

राज्य वित्त सेवा के ज्वाइंट डायरेक्टर महक सिंह का 21 साल की सर्विस में 17 बार ट्रांसफर किया जा चुका है।
  • भास्कर इंटरव्यू: जेयू में कुलपति से विवाद के कारण चर्चा में वित्त नियंत्रक

    ग्वालियर.राज्य वित्त सेवा के ज्वाइंट डायरेक्टर महक सिंह का 21 साल की सर्विस में 17 बार ट्रांसफर किया जा चुका है। ट्रेजरी ऑफिस को छोड़कर हर विभाग में वह 3 से 15 महीने ही काम कर पाए। जिस विभाग में गए, वहां के विभाग प्रमुख से टकराव हुआ। किसी से उनकी पटरी नहीं बैठी। सिंह विभाग प्रमुखों पर शासन के नियमों को तोड़ने-मरोड़ने को टकराव का अहम कारण बताते हैं तो वहीं उनके विरोधी उन पर मनमानी करने के आरोप लगाते रहे हैं।

    - चाहे मामला संगीत विश्वविद्यालय का हो या कृषि विश्वविद्यालय का, दोनों ही जगह कुलपतियों से उनका टकराव खबरों की वजह बना। जीवाजी विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. संगीता शुक्ला से उनके मतभेद सबके सामने हैं। इससे पहले जेएएच में मेरोपेनम घोटाले की परतें भी खोल चुके हैं। दैनिक भास्कर ने उनसे बिंदुवार बातचीत की।


    वित्त नियंत्रक का आरोपकुलपति नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं

    आपकी पोस्टिंग जहां की जाती है, उसी विभाग प्रमुख से आपके टकराव की खबरें आने लगती हैं?
    -बिल्कुल गलत। मैं साडा, ट्रेजरी ऑफिस, एलएनआईपीई, मप्र हाईकोर्ट में रहा। कहीं मेरा विवाद नहीं हुआ।
    संगीत विवि, कृषि विवि के बाद अब जीविवि के कुलपति से आपका टकराव हो रहा है, क्यों?
    -जिसे आप टकराव कह रहे हो, उसे मैं अपनी ड्यूटी कहता हूं। अगर शासन के निर्धारित मापदंड तोड़कर, नियमों की धज्जियां उड़ाकर विश्वविद्यालयों में कामकाज होगा तो क्या मैं चुपचाप देखता रहूं। शासन क्या मुझे यहां ये सब देखने या इन लोगों का भागीदार बनने के लिए बैठाता है।
    कौन से नियम टूटे? क्या इन विश्वविद्यालयों में कुलपतियों ने गलत काम किए?
    -संगीत विवि में रोक के बावजूद दैवेभों की भर्ती होती रहीं। जो कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं थे, उनके नाम पर वेतन निकाला गया। कृषि विवि में निर्माण कार्यों में सुपरविजन चार्ज 6 से बढ़ाकर 10 फीसदी कर संबंधित एजेंसी को लाभ पहुंचाया गया, जिससे विवि को 6 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। शासन को भेजी गई मेरी आपत्ति के बाद विवि के तत्कालीन कुलपति को बैकफुट पर आना पड़ा। जीवाजी विवि में भी परीक्षा रिजल्ट संबंधी, आउटसोर्सिंग पर रखे जाने वाले कर्मचारियों और केमिकल खरीदी को लेकर जानबूझकर टेंडर लेट किए गए, जिससे संबंधित ठेकेदारों को लाभ पहुंचाया जा सके। मैंने विरोध किया तो बुरा बन गया।
    कृषि विवि के तत्कालीन कुलपति एके सिंह ने आपको गैर जिम्मेदार और संस्थान हित में नहीं होना बताया। जेयू में तो आप पर ही आउटसोर्स कर्मचारियों का वेतन हड़पने के आरोप भी लगे?
    -इनमें से कितने आरोप मुझ पर साबित हुए। एक भी नहीं। दरअसल, मैं जो कुछ करता हूं। उसकी पूरी रिपोर्ट शासन को जाती है। मैं गलत होता तो शासन मुझे रोकता। मुझे न कभी रोका न टोका। क्योंकि शासन जानता है, मैं गलत नहीं कर रहा हूं।
    अगर आप ईमानदारी से काम कर रहे हैं तो शासन ने किसी विभाग में आपको टिकने क्यों नहीं दिया?
    -इसमें शासन को दोष देना ठीक नहीं है। उन्हें जहां ठीक लगा, वहां मुझे भेज दिया।
    अगर आप नियम-कायदों से काम करने वाले अफसर हैं तो 21 साल में 17 ट्रांसफर कैसे हुए?
    -मुझे इसकी कोई शिकायत नहीं है। हम सरकारी नौकर है, मालिक नहीं और टकराव तब शुरू होता है जब विभाग प्रमुख खुद को मालिक और सिस्टम को नौकर समझना शुरू कर देते है।

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Web Title: Finance Controller In Discussions Due To Dispute
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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