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अस्पताल के गेट पर तड़पती रही महिला, मेटरनिटी गेट पर दिया बच्चे को जन्म

जिला अस्पताल की बिल्डिंग का निर्माण तो कर दिया है लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी बदहाल हैं।

Danik Bhaskar | Jan 29, 2018, 06:33 AM IST

दतिया (ग्वालियर). प्रदेश सरकार ने करोड़ों रुपए खर्च कर आम आदमी को बेहतर इलाज देने के लिए जिला अस्पताल की बिल्डिंग का निर्माण तो कर दिया है लेकिन स्वास्थ्य सेवाएं अभी भी बदहाल हैं। रविवार सुबह सात बजे एक गर्भवती महिला प्रसव के लिए जिला अस्पताल पहुंची। उसने मेटरनिटी गेट पर ही बच्चे को जन्म दे दिया। प्रसव के बाद भी महिला करीब आधा घंटे तक डॉक्टर के इंतजार में तड़पती रही। लेकिन उसे डॉक्टर देखने तक नहीं पहुंचे। बाद में गेट पर प्रसव होने की सूचना के बाद आनन-फानन में माैके पर पहुंचे डॉक्टरों ने उसे झांसी रैफर कर दिया।

नवजात बच्चा एसएनसीयू में भर्ती
- नवजात बच्चे को जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया है। इधर, महिला के साथ आए उसके जेठ ने कहा कि अगर समय रहते डॉक्टर देख लेते तो रैफर करने की नौबत नहीं आती। उसकी जेब में पांच रुपए भी नहीं हैं और डॉक्टरों ने प्रसूता को मेडिकल कॉलेज रैफर कर दिया। वहां बिना पैसों के इलाज कैसे कराएंगे।

प्रसूता का जेठ बोला- जेब में पांच रुपए नहीं, झांसी में कैसे कराऊंगा इलाज

- ग्राम झड़िया निवासी पूजा (20) पत्नी राजेश अहिरवार को पहली डिलीवरी होना थी। रविवार की सुबह उसे अचानक पेट दर्द हुआ। परिजन ने गांव से टैक्सी बुलाई और उसमें बिठाकर महिला को जिला अस्पताल ले गए।

- मेटरनिटी गेट तक पहुंचने के बाद महिला को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए उसके जेठ और अन्य परिजन ने कर्मचारियों से गुहार लगाई। इसी बीच महिला ने मेटरनिटी के गेट पर बच्चे को जन्म दे दिया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ने लगी, तब भी डॉक्टर वहां नहीं आए।

- महिला की हालत जब ज्यादा बिगड़ने लगी नर्स देखने पहुंची। महिला की हालत देखने के बाद पता चला कि बच्चे की नाड़ी फंस जाने से स्थिति गभीर होती जा रही है। डॉक्टरों ने प्रसूता की हालत नाजुक देखते हुए उसे झांसी मेडिकल कॉलेज के लिए रैफर कर दिया जबकि बच्चे को एसएनसीयू में भर्ती कर दिया। उधर प्रसूता को रैफर करने पर परिजन ने हंगामा कर दिया। अस्पताल चौकी पर तैनात पुलिस कर्मी और डॉ. मधुबाला गुप्ता ने परिजन को समझाया तब परिजन मेडिकल कॉलेज झांसी ले गए।

सीएमएचओ को जानकारी नहीं

इस संबंध में सीएमएचओ डॉ. आरएस गुप्ता से बात की तो उन्होंने मामले की जानकारी न होना बताया।