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श्मशान की जगह पिता की अर्थी लेकर जीआरएमसी पहुंची बेटियां, की देहदान

मेरे बाबा (पिताजी) विमल घटक (74 साल) लंबे समय यह कहते थे कि मेरे शरीर को जलाने की बजाय मेडिकल कॉलेज को दे दिया जाए।

Bhaskar News | Last Modified - Dec 31, 2017, 06:47 AM IST

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    ग्वालियर.मेरे बाबा (पिताजी) विमल घटक (74 साल) लंबे समय यह कहते थे कि मेरे शरीर को जलाने की बजाय मेडिकल कॉलेज को दे दिया जाए। एक साल पहले मोहल्ले के कुछ लोगों देहदान के फार्म भरे तो बाबा भी फार्म भर आए। उन्होंने हमसे कहा कि मैं समाज के लिए कुछ करना चाहता हूं। इसलिए मेरे मरने के बाद शरीर और नेत्र दान कर देना। इसके लिए मैंने फार्म भर दिया है।

    - इसके साथ-साथ उन्होंने अपने भाइयों और मित्रों से भी यही कहा कि मेरा जब अंत हो तो मेरे शरीर को जलाना नहीं उसे मेडिकल कॉलेज को दान कर देना,जिससे मेरे मरने के बाद भी मेरा शरीर समाज के काम आ सके।

    - वे यहां पर जीवाजीगंज पीजीवी कॉलेज के पास किराए के मकान में अकेले रहते थे। उन्हें सांस की परेशानी थी और बीमार चल रहे थे। लिहाजा हम बाबा को देखने के लिए शुक्रवार को ग्वालियर आए।

    - शुक्रवार की रात बाबा ने अंतिम सांस ली। उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए हमने उनके नेत्र रतन ज्योति नेत्रालय की आईं बैंक को शुक्रवार की रात को दान कर दिए। शनिवार को अर्थी तैयार की और परिजन के साथ बाबा की शव यात्रा जीआरएमसी लाए। जीआरएमसी के एनाॅटोमी विभाग को बाबा की देह दान कर दी। बाबा रंग कर्मी थे लिहाजा हमेशा से ही समाज के लिए कुछ करने की सोचते रहते थे।
    -दिवंगत विमल घटक की पुत्री ज्योति चटर्जी ने जैसा दैनिक भास्कर को बताया।

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