ग्वालियर

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ज्योतिरादित्य सिंधिया भी हैं इनके यजमान, इन्हें कंठस्थ हैं अपने यजमानों के गांव

पंडाओं ने प्रदेश के साथ उप्र,गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के गांव व क्षेत्र को बांट रखा हैं।

Danik Bhaskar

Jan 22, 2018, 08:54 AM IST

दतिया. अगर आपको अपनी पुरानी छह पीढ़ियों की जानकारी नहीं है तो वह कस्बा उनाव के सूर्य मंदिर में पंडागीरी का काम कर रहे पंडाओं के पास आसानी से मिल सकती है। उनाव के पंडा मंदिर पर आने वाले यजमानों के नाम केदारनाथ, इलाहबाद व जगन्नाथपुरी की तर्ज पर अपनी बही में दर्ज करते हैं। पूर्व केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, दतिया का पूर्व राजघराना, पूर्व मंत्री केपी सिंह, झांसी के वर्तमान विधायक रवि शर्मा आदि की पांच से छह पीढ़ियों की जानकारी पंडाओं की बहियों में दर्ज हैं।


वर्तमान में मंदिर पर लगभग सौ परिवार इस काम को अंजाम दे रहे हैं। पंडाओं ने अपने अपने क्षेत्र व गांव बांट रखे हैं। उसी आधार पर वह मंदिर में पूर्व में आए आपके बुजुर्गों व पीढ़ी के सदस्यों के नाम आसानी के साथ बता देते हैं।
बता दें कि उनाव का सूर्य मंदिर देश में आस्था व श्रद्धा का केन्द्र हैं। कुष्ठ रोग सहित सूर्य ग्रह की शांति के लिए लोग यहां आते हैं।


यहां आने वाले श्रद्धालु पंडाओं के यजमान होते हैं। पूर्व में सात परिवार यहां पंडागीरी का काम करते थे। समय के साथ परिवार बढ़ते और अलग होते गए। ऐसे में वर्तमान में मंदिर पर यजमानी करने वाले पंडाओं की संख्या का आंकड़ा सौ से ज्यादा हो गया है।

कंठस्थ याद हैं अपने यजमानों के गांव, 500 वर्ष पुरानी है परंपरा

पंडाओं ने प्रदेश के साथ उप्र,गुजरात सहित अन्य प्रदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के गांव व क्षेत्र को बांट रखा हैं। पंडाओं की अपनी यजमानी वाले गांव कंठस्थ याद है। जैसे ही संबंधित क्षेत्र या गांव से कोई श्रद्धालु पहुंचता है। पंडा दर्शन से लेकर पूजा अर्चना तक का काम कराते हैं। उसके बाद विधिवत रूप से बही में आने की तारीख सहित साथ में आए परिवार के सदस्यों के नाम बही में दर्ज करते हैं। लगभग पांच सौ वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है। परिणाम यहां के पंडाओं के पास अपने यजमानों की पांच से छह पीढ़ियों का रिकार्ड दर्ज हो गया।

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