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कोलारस विधानसभा उपचुनाव : कांग्रेस की जीत, हार के बाद भी बीजेपी का वोट बैंक 13% बढ़ा

उपचुनाव में जीत दर्ज करके बाद भी कांग्रेस के वोट केवल एक प्रतिशत ही बढ़ा है।

Danik Bhaskar | Mar 01, 2018, 04:07 AM IST
कोलारस उपचुनाव जीतने के बाद रि कोलारस उपचुनाव जीतने के बाद रि

शिवपुरी(मध्यप्रदेश). जिले के कोलारस विस सीट के पहले उपचुनाव में कांग्रेस के महेंद्र यादव 8086 वोटों से चुनाव जीत गए हैं। यहां पर बीजेपी के देवेंद्र जैन की लगातार दूसरी हार है। इससे पहले 2013 में कांग्रेस स्व. रामसिंह यादव ने देवेंद्र को हराया। अब उनके बेटे महेंद्र ने बीजेपी प्रत्याशी देवेंद्र जैन को उपचुनाव में शिकस्त दी है। इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस के वोट काटने के लिए महेंद्र सिंह यादव नाम के 5 अन्य व देवेंद्र नाम के 3 अन्य उम्मीदवार भी मैदान में थे।

कोलारस उपचुनाव में बीजेपी ने भी अाखिरी तक जोर लगाया। यहां बीजेपी को भले ही हार का सामना करना पड़ा लेकिन उसका वोट पिछले साल के मुकाबले 13 प्रतिशत वोट बढ़ा है। वहीं चुनाव जीतने के बाद भी कांग्रेस के वोट केवल एक प्रतिशत ही बढ़ा है। यहां पर बीजेपी ने अपनी पूरी ताकत झौंक दी थी। मुख्यमंत्री ने 50 से ज्यादा और उनके मंत्रिमंडल के सदस्यों ने 500 से अधिक सभाएं की थी लेकिन उसके बाद भी बीजेपी सीट नहीं बचा पाई।वहीं कांग्रेस की ओर से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अकेले मोर्चा संभाला। इस चुनाव में बीएसपी का उम्मीदवार न हाेने का फायदा भी कांग्रेस को मिला क्योंकि बीएसपी का परंपरागत वोटर भी कांग्रेस के खाते में गया। उधर, बीजेपी को आदिवासी वोटरों का साथ नहीं मिल पाया।

किस क्षेत्र में क्या स्थिति

खरही डेहरवारा, तेंदुआ: धाकड़ बाहुल्य क्षेत्र है यह वोटर बीजेपी का माना जाता है। 45 बूथ में से मात्र 15 बूथ ही बीजेपी जीत पाई है, शेष 30 में कांग्रेस का परचम।

भाजपा को मिली लीड : रन्नौद क्षेत्र की 85 बूथ में से आधी बीजेपी के खाते में शेष पर कांग्रेस ने कब्जा जमाया।

यहां कमजोर रही कांग्रेस : बदरवास नगर की 50 पोलिंग में से महज 15 पाेलिंग कांग्रेस ने जीतीं। शेष 35 पर बीजेपी का परचम।

किसकी कितनी सभा और रिजल्ट क्या

सीएम और आधा दर्जन मंत्रियों की मेहनत भी काम न आई

शिवराज सिंह चौहान: 25 दिन में 50 सभाएं की। बीजेपी को ज्यादातर बूथ पर हार मिली।

यशोधरा राजे : 16 दिन में 20 से अधिक सभाएं की, लेकिन राजे भी बड़ा करिश्मा नहीं कर पाईं।

प्रभात झा : ने 20 दिन तक यादव बाहुल्य क्षेत्र में जनसंपर्क किया। इस क्षेत्र की लगभग पूरी पोलिंग पर हार।

कांग्रेस में अकेले सिंधिया ने संभाला मोर्चा, दिलाई जीत

ज्योतिरादित्य सिंधिया: 25 दिन में 70 सभाएं की। 80% ज्यादा पोलिंग पर जीत दर्ज कराई।

केपी सिंह : 10 दिन में सिर्फ 50 से ज्यादा सभाएं की। आदिवासी-यादव क्षेत्रों में कांग्रेस को बड़ी बढ़त।

कांतिलाल भूरिया: बदरवास क्षेत्र में तीन सभाएं ली। सहरिया आदिवासी वोटरों को लुभाने में कामयाब।

ये हैं इस विधानसभा का पूरा चुनावी ब्यौरा

कुल वोट मिले पिछली बार के मुकाबले फीसदी में
कांग्रेस 82523 1%+ 48 %
बीजेपी 74437 13%+ 43%
नोटा 756 1 % - 0.4 %

सबसे बड़ी जीत : 32112 वोटों से 2003 के चुनाव में बीजेपी के ओमप्रकाश खटीक ने कांग्रेस की अंगूरी को हराया

सबसे छोटी जीत : 238 वोटों से 2008 के विस चुनाव में बीजेपी के देवेंद्र जैन जीते थे।

कोलारस सीट पर हर पार्टी लगातार 2 चुनाव जीती : 1998 में कांग्रेस के पूरन सिंह बेड़िया के चुनाव को छोड़ दिया जाए तो इस सीट पर हुए अब तक के सभी चुनावों में हर पार्टी दो-दो चुनाव जीती है। इस चुनाव में भी यह रिकॉर्ड बरकरार रहा है।

कांग्रेस के महेंद्र को 5 निर्दलीय महेंद्र से मिली चुनौती : इस चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह यादव के अलावा 5 निर्दलीय और इसी नाम और जाति के मैदान में थे। जितने की जीत हुई लगभग उतने ही वोट काटे।

5 कारण कांग्रेस की जीत के

1 महेंद्र सिंह यादव को पिता रामसिंह की जमीनी पकड़ - सहानुभूति लहर का लाभ।

2 कांग्रेस के परंपरागत वोटर आदिवासी, जाटव, मुस्लिम यादवों ने साथ दिया।

3 कांग्रेस ने पूरी लड़ाई शिवराज v/s सिंधिया के रूप में पेश की। यह गढ़ सिंधिया का होने से फायदा कांग्रेस को मिला।
4 बसपा ने प्रत्याशी खड़ा नहीं किया जिसका फायदा कांग्रेस को मिला।

5 प्रदेश सरकार के खिलाफ महंगाई, कर्मचारियों-किसानों की नाराजगी और एंटी इनकमबेंसी के कारण जीत कांग्रेस के खाते में आई।

5 कारण बीजेपी की हार के

1 चुनाव की तारीख के ऐलान से पहले बीजेपी ने प्रचार में पूरी ताकत झोंकी जिसे उनके कार्यकर्ताओं ने पसंद नहीं किया।

2 यशोधरा राजे को प्रचार में लाने में देरी भी रही हार की वजह।

3 आदिवासी वोटरों से बीजेपी को काफी उम्मीदें थी लेकिन यहां भी निराशा मिली।

4 बीजेपी ने जातियों को साधने के लिए बुलाए सम्मेलनों में जुटी भीड़ वोट में नहीं बदली।

5 बीजेपी ने जिन मंत्रियों और बाहरी नेताआें को चुनावी कमान सौंपी उनका क्षेत्र में न तो कोई प्रभाव था न ही जनता के बीच कोई पकड़।

सीएम ने रन्नोद तहसील बनाने की घोषणा की तो मिली जीत
सीएम ने 21 दिसंबर को रन्नोद में आयोजित अंत्योदय मेले के दौरान घोषणा की थी कि रन्नोद को तहसील बनाया जाएगा। माना जा रहा है कि सीएम की इस घोषणा को मतदाताओं ने हाथों हाथ लिया और बीजेपी को इस क्षेत्र से जीत मिली। रन्नोद की 6 पोलिंग में बीजेपी को कम्रश: 366,450,399,289,353 और 282 मत मिले जबकि कांग्रेस को 280,155,250,150,46,245 वोट मिले।यहां कांगेस को हार मिली।

समाज का सम्मेलन शिवराज के बेटे कार्तिकेय ने किया पर बढ़त नही मिली
सीएम शिवराज सिंह बेटे कार्तिकेय ने कोलारस में धाकड़ समाज के सम्मेलन में भागीदारी की थी। लेकिन धाकड समुदाय बाहुल्य इन पोलिंगों में बीजेपी को उतनी बढ़त नहीं मिली जितने की उम्मीद जताई जा रही थी। इनमें से ज्यादातर पर पोलिंग पर हार का सामना करना पड़ा।