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अंतिम समय पिता के पास नहीं था बेटा, कहा- कुछ भी करो, बुजुर्ग माता-पिता के साथ रहो

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2017, 08:02 AM IST

एमपीईबी के रिटायर्ड इंजीनियर वीके गुप्ता (70) पत्नी शकुंतला(65) के साथ अकेले रहते थे।

Last time Father did not have a son

ग्वालियर. माधौगंज के सात भाई की गोठ में एमपीईबी के रिटायर्ड इंजीनियर वीके गुप्ता (70) पत्नी शकुंतला(65) के साथ अकेले रहते थे। वे लिवर की बीमारी से पीड़ित थे। गुरुवार-शुक्रवार रात 3 बजे अस्पताल में उनकी मौत हो गई। उनकी पत्नी जब एंबुलेंस से शव लेकर आईं तो पता चला चोर उनके आने से 15 मिनट पहले घर के ताले तोड़ चोरी कर ले गए। उनके छोटे बेटे रॉबिन गुप्ता रायपुर से शनिवार को घर पहुंच गए। पिता के बीमार होने से लेकर मौत के समय तक वह लगातार फोन पर मां से बात कर रहे थे, लेकिन उन्हें अफसोस है कि वह अंतिम समय में अपने पिता के साथ नहीं थे। वह कहते हैं कि बुजुर्ग माता-पिता को साथ ही रखना चाहिए। वह चाहते थे कि माता-पिता उनके साथ रहें, वह भी तैयार थे। लेकिन बीमारी की वजह से उन्हें साथ नहीं ले जा पाए। उनके एक भाई अमेरिका में हैं, जो रविवार को ग्वालियर आ जाएंगे।

मैं मां-पिता को साथ में ले जाना चाहता था, उनका जुड़ाव इस घर से था, बाद में वह जाने के लिए राजी भी हो गए थे

- आप माता-पिता के पास रहते हैं तो उनकी चिंता ज्यादा नहीं रहती है। लेकिन अगर आप दूर रहते हैं तो चिंता बढ़ जाती है। मैं माता-पिता से पूरी तरह से जुड़ा था। हर दिन फोन पर बात होती थी। हाल-चाल लेता था।

- पिताजी की तबीयत बिगड़ी, मां अस्पताल ले गईं। मेरी उनसे बात हुई थी। रात को अस्पताल में रहते हुए भी लगातार बात करता रहा था। मैं उस रात नहीं सोया। 3 बजे पिता की मौत की खबर मां ने दी। मैं माता-पिता को अपने साथ ले जाना चाहता था।

- पहले वह अपने घर से जुड़ाव की वजह से नहीं जाते थे। बाद में वह साथ चलने के लिए राजी हो गए थे। मैं भी उन्हें साथ ले जाने की तैयारी में था लेकिन कुछ समय से उनकी तबीयत खराब रहने लगी इसलिए नहीं ले जा पाए।

- अंतिम समय मैं पिता के साथ नहीं था, इसका मुझे अफसोस है। मेरे जैसे कई युवा नौकरी-काम के सिलसिले में बाहर रहते हैं। वह माता-पिता को साथ ही रखें। चोर हमारे यहां से रुपयों, एफडीआर के साथ दादी के समय के सिक्के और चांदी के जेवरात ले गए हैं।

- भाभी की शादी की साडियां और कुछ अन्य मेमोरिबल सामान है, बस वह मिल जाए।
(जैसा दिवंगत वीके गुप्ता के बेटे रॉबिन ने बताया, वह छत्तीसगढ़ स्टेट पॉवर डिस्ट्रीब्यूशन में असिस्टेंट इंजीनियर हैं और रायपुर में पदस्थ हैं)

कैमरे की लो क्वालिटी के कारण चोरों के चेहरे, बाइक का नंबर फुटेज में साफ नहीं

- दिवंगत वीके गुप्ता के यहां चोरी की वारदात सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई। कितने चोर आए, यह पता लगा लेकिन बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर और चोरों के चेहरे स्पष्ट नहीं हो पाए।

- अगर यह कैमरा अच्छी क्वालिटी का होता तो उसमें रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ चेहरे भी स्पष्ट होते। एक्सपर्ट का कहना है कि शहर में हजारों कैमरे सुरक्षा की दृष्टि से घरों-दुकानों के बाहर लगाए गए हैं, लेकिन इनमें ज्यादातर एनालॉग कैमरे हैं। एक तिहाई ही मैगा पिक्सल कैमरे हैं।

- मैगा पिक्सल कैमरे से पिक्चर स्पष्ट आती है। कैमरा कारोबार से जुड़े संजय माहेश्वरी का कहना है, इन दिनों तीन तरह की क्वालिटी के कैमरे आ रहे हैं।

- 700 से 1600 रुपए तक के कैमरों में फोटो क्वालिटी अच्छी नहीं आती है। 1600 से 2200 रुपए तक के कैमरे में क्वालिटी कुछ ठीक होती है लेकिन 20 मीटर से ज्यादा दूरी का विजन साफ नहीं आता है। 2200 से 6500 रुपए तक कीमत के कैमरे 1 से 5 मैगा पिक्सल तक की फोटो क्वालिटी देते हैं। इनमें पिक्चर स्पष्ट आती है। बाइक का नंबर तक आ जाता है।

- चौराहों पर लगे कैमरों से बाइक का नंबर देखने की कोशिश: श्री गुप्ता के घर के नजदीक स्थित मैदान में बाहरी लोगों के इकट्ठे होने की जानकारी पुलिस तक पहुंची है।

- इस मैदान कौन-कौन आता है, इसकी सूची पुलिस बना रही है। जिस सीसीटीवी कैमरे से रात की रिकॉर्डिंग पुलिस ने देखी है, उसकी दिन की रिकॉर्डिंग भी देखी जाएगी ताकि रैकी करने वाले का चेहरा स्पष्ट हो सके। पुलिस माधौगंज चौराहे पर लगे कैमरों की घटना के बाद की फुटेज भी देखेगी। संभवत: चोर इसी रास्ते भागे हैं और यहां लगे कैमरों से बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर और चेहरे स्पष्ट हो सकते हैं।

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