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युवा इंजीनियर ने बनाया बायो गैस प्लांट का मॉडल, सीएनजी के रूप में करेंगे इस्तेमाल

बायो गैस भविष्य की जरूरत है क्योंकि पैट्रोल-डीजल कम होता जा रहा है और सीएनजी के दाम धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं।

bhaskar news | Last Modified - Jan 14, 2018, 05:38 AM IST

  • युवा इंजीनियर ने बनाया बायो गैस प्लांट का मॉडल, सीएनजी के रूप में करेंगे इस्तेमाल

    मुरैना.मुरैना जिले के सिहौंनियां क्षेत्र के युवा इंजीनियर अनिल सिंह तोमर ने अपनी योग्यता व अनुभव के आधार पर बायो गैस मॉडल तैयार किया है। इस मॉडल में लोग गोबर और खेती के अपशिष्ट पदार्थों का उपयोग करके बायो गैस बना सकते हैं। बायोगैस सीएनजी की तरह काम करेगी इससे वाहन चलाए जा सकेंगे और घरों में खाना पकाया जा सकेगा। बायो गैस भविष्य की जरूरत है क्योंकि पैट्रोल-डीजल कम होता जा रहा है और सीएनजी के दाम धीरे-धीरे बढ़ रहे हैं।


    आईआईटी से बी-टेक उत्तीर्ण इंजीनियर अनिल सिंह तोमर इन दिनों नई दिल्ली के साइंस एवं टैक्नोलॉजी विभाग के सहयोग से बायोगैस प्लांट स्थापित करने के लिए काम कर रहे हैं। मध्यप्रदेश में पहला बायोगैस प्लांट भोपाल में स्थापित किया जा रहा है। उसका अगला आयाम चंबल संभाग होगा। इंजीनियर अनिल तोमर का कहना है कि एक हजार क्यूबिक मीटर क्षमता का गैस प्लांट एक से डेढ़ करोड़ रुपए की लागत में स्थापित किया जा सकता है। इसके लिए बैंक उच्च शिक्षित युवाओं को लोन उपलब्ध कराती हैं। किसी भी सोसाइटी के लिए बायो गैस की उपलब्धता में बायोगैस प्लांट उपयोगी साबित हो रहा है। पुणे से लेकर राजस्थान के कई शहरों में इसकी सफलता आसानी से देखी जा सकती है।


    मीथेन गैस को 95% शुद्ध करता है प्लांट
    बायो गैस प्लांट मीथेन गैस को 95प्रतिशत तक शुद्ध करता है। मीथेन गैस के शुद्ध होने के बाद उसका उपयोग सीधे सीएनजी वाहनों में इंजन के बिना किसी बदलाव के साथ किया जा सकता है। बायोगैस सीएनजी की तुलना में दस से 15 रुपए लीटर सस्ती मिलती है।

    ईको फ्रेंडली ईधन है बायोगैस अपशिष्ट पदार्थ भी उपयोगी
    आईआईटी दिल्ली में सेंटर फोर रूरल डवलपमेंट एंड टैक्नोलॉजी के विभागाध्यक्ष डाॅ. रामचंद्रन का कहना है कि बायोगैस प्लांट अपनी तरह का अनोखा प्लांट हैं। इसे स्थापित करने के लिए ऐसी जगह चुनना चाहिए जहां अधिक मात्रा में गोबर और कृषि के अपशिष्ट पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो सकें। बायोगैस वर्तमान का सबसे ईको फ्रेंडली ईधन हैं। सामान्य सीएनजी, पैट्रोलियम ट्यूबवैल से निकाली जाती है जो ईधन का रिन्युएबल सोर्स नहीं है। जबकि इस प्लांट से मिलने वाली बायो सीएनजी में 95प्रतिशत तक मीथेन गैस होती है। गैस बनने के बाद बचा हुआ अपशिष्ट पदार्थ भी बायो फर्टीलाइजर की तरह उपयोग में लाया जा सकता है।

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