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स्टूडेंट ने बनाई ऐसी डिवाइस, जो ब्लड सैंपल की जांच से बता देगी कि तीन माह में हार्ट अटैक तो नहीं आने वाला

पीएचडी रिसर्च के दौरान हासिल की यह उपलब्धि, राष्ट्रपति ने भी किया सम्मानित

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 07:24 AM IST
सौरभ अग्रवाल सौरभ अग्रवाल

इंदौर. आईआईटी मुंबई से पीएचडी कर रहे इंदौर के एक छात्र ने ऐसी डिवाइस बनाई है, जो ब्लड सैंपल के जरिए बता देगी कि संबंधित व्यक्ति को तीन माह के भीतर हार्ट अटैक तो नहीं आने वाला है। सैंपल लिए जाने के महज 20 से 30 मिनट के भीतर लैब में जांच के बाद रिपोर्ट तैयार हो जाएगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि मरीज को आने वाले तीन माह में हार्ट संबंधित कोई छोटी-बड़ी बीमारी की आशंका तो नहीं है।

इंदौर के श्री गोविंद राम सेक्सरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टक्नोलॉजी ऑफ साइंस (एसजीएसआईटीएस)से बीई की पढ़ाई पूरी करने के बाद आईआईटी मुंबई से पीएचडी कर रहे जानकी नगर निवासी सौरभ पिता कमलकिशोर अग्रवाल ने अपनी सहयोगी छात्रा के साथ मिलकर यह डिवाइस तैयार की है। खास बात यह है कि इस डिवाइस के लिए सौरभ को राष्ट्रपति ने जीवाईटीआई (गांधीयन यंग टेक्नोलॉजी इनोवेशन) अवाॅर्ड से सम्मानित किया है।


एक साल तक रिसर्च की, तब मिली सफलता

एसजीएसआईटीएस से बॉयोमैट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद सौरभ उसी संस्थान में विजिटिंग फैकल्टी के तौर पर भी सेवाएं दे चुके हैं। इसके बाद इनका चयन आईआईटी मुंबई से एमटेक प्लस पीएचडी के लिए हो गया था। सौरभ ने सहयोगी छात्रा के साथ सालभर से भी ज्यादा समय तक की रिसर्च के बाद यह डिवाइस तैयार की और प्रयोग भी सफल रहा। यह स्मार्ट फोन बेस्ड इंपीडीमैट्रिक डिस्पोजेबल बायो सेंसर फॉर डिटेक्शन अॉफ कार्डियक बॉयोमॉरकर डिवाइस है।

बीमारी का पता पहले चलेगा तो ये होगा फायदा
सौरभ के अनुसार इस डिवाइस के जरिए अगर संबंधित व्यक्ति के ब्लड की जांच में किसी भी तरह की हार्ट से जुड़ी समस्या सामने आती है तो वे स्पेशलिस्ट डॉक्टर से जांच करवाकर नियमित दिनचर्या में बदलाव या दवाइयों के जरिए ठीक हो सकते हैं।

छह महीने पहले भी मिल सकेगी जानकारी

सौरभ का कहना है कि लैब लेवल पर इसका टेस्ट सफल हो चुका है। उसी आधार पर मैंने अवाॅर्ड के लिए आवेदन किया था। चयन भी हुआ और अवाॅर्ड भी मिला। अब इस बात पर काम होगा कि फायदा देश को कैसे मिले। इसके लिए योजना तैयार की जा रही है। साैरभ के अनुसार यह डिवाइस तैयार करना किसी चुनौती से कम नहीं था, लेकिन हमने हार्ट से संबंधित एक-एक बीमारी का बारीकी से अध्ययन किया। हमारे सामने यह चुनौती थी कि अधिकतम कितने समय पहले यह पता किया जा सकता है कि संबंधित व्यक्ति को हार्ट से जुड़ी कोई बड़ी समस्या हो सकती है। वैसे अधिकतम छह माह पहले भी हम इस जांच के जरिए जानकारी पता कर सकेंगे।