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गरीबी ने फांसी लगाने को किया मजबूर, मौत के बाद सरकारी तंत्र ने बदली बॉडी

शहर में एक शख्स ने गरीबी से तंग आकर फांसी लगा ली। इस दौरान एक शर्मनाक वाक्या भी हुआ।

Dainik Bhaskar

Jan 18, 2018, 04:04 AM IST
Poverty forced the execution, after death

भिंड (ग्वालियर). शहर में एक शख्स ने गरीबी से तंग आकर फांसी लगा ली। इस दौरान एक शर्मनाक वाक्या भी हुआ। जब शख्स की डेडबॉडी को लाया गया तो वो भी किसी और की निकली। इस सबके पीछे हॉस्पिटल प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आई। दरअसल, पोस्टमार्टम के बाद डेडबॉडी को घर लाया गया। लेकिन मृतक की पत्नी ने जैसे ही बॉडी का चेहरा देखा तो चीख पड़ी। दरअसल, लापरवाही की वजह से दूसरी शख्स की बॉडी परिवार को सौंप दी गई थी। क्या है मामला...

- टिक्की का ठेला लगाने वाले विशंभर कुशवाह (35) हाल निवासी अटेर रोड ने मंगलवार को गरीबी से तंग आ फांसी लगा ली। सरकारी तंत्र की लापरवाही ने मौत के बाद भी उसका पीछा नहीं छोड़ा।

- पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को जब उसका शव घर पहुंचा तो किसी और का निकला। लाश के चेहरे से कपड़ा हटाते ही पत्नी अनोखी चीख पड़ी। यह तो मेरे पति नहीं कोई और है। अनोखी के तीन मासूम बच्चे विक्रम (8), किशन (5) और पूनम (2) हैं। बाद में पुलिस शव लेकर दोबारा अस्पताल पहुंची और विशंभर का शव लेकर उसके परिजन को सौंपा। लापरवाही के लिए पुलिस और डॉक्टर एक-दूसरे को दोषी बता रहे हैं।

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Poverty forced the execution, after death
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