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कैदी और मजदूरों के बच्चे कर रहे खेती, डेढ़ साल में पैदा की 170 किलो मशरूम

गरीब मजदूर परिवारों और कैदियों के बच्चे मशरूम पैदा कर रहे हैं। बच्चों को यह ट्रेनिंग सचिन तेंदुलकर मार्ग पर स्थित शारदा

अनुराग चतुर्वेदी| Last Modified - Feb 12, 2018, 06:14 AM IST

Prisoners and laborers doing farming
कैदी और मजदूरों के बच्चे कर रहे खेती, डेढ़ साल में पैदा की 170 किलो मशरूम
ग्वालियर. गरीब मजदूर परिवारों और कैदियों के बच्चे मशरूम पैदा कर रहे हैं। बच्चों को यह ट्रेनिंग सचिन तेंदुलकर मार्ग पर स्थित शारदा बाल ग्राम में दी जा रही है। यहां रहकर 150 बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें 100 लड़के और 50 लड़कियां हैं। इन बच्चों में मजदूर व अनाथों के अलावा ऐसे बच्चे भी हैं जिनके माता-पिता जेल में हैं। टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर, आगरा, मथुरा, दिल्ली, बिहार, हैदराबाद और पश्चिम बंगाल के ये बच्चे डेढ़ साल से आस्टर मशरूम पैदा कर रहे हैं। यहां बने विशेष कमरे में भूसे को केमिकल के 200 लीटर पानी में 12 से 14 घंटे के लिए डाल देते हैं। भूसे को निकालकर 6 फीसदी पानी रहने तक सुखाते हैं। इसके बाद पॉलीथिन में भूसे की लेयर बनाकर बीज डाल देते हैं। ऐसी सात लेयर बनाई जाती हैं। जहां-जहां बीज डाला जाता है, वहां पर छेद कर देते हैं।
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