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0वीं सदी की 12 दुर्लभ प्रतिमाएं, इनमें दो जैन तीर्थंकर, शेष नायिका

शहर से 40 किमी दूर मितावली पड़ावली के नजदीक ऐतिहासिक मूर्तियां खुदाई के दौरान निकली हैं।

रूपाली ठाकुर | Last Modified - Dec 31, 2017, 06:39 AM IST

  • 0वीं सदी की 12 दुर्लभ प्रतिमाएं, इनमें दो जैन तीर्थंकर, शेष नायिका

    ग्वालियर .शहर से 40 किमी दूर मितावली पड़ावली के नजदीक ऐतिहासिक मूर्तियां खुदाई के दौरान निकली हैं। ये मूर्तियां 10वीं से 11वीं सदी के बीच की बताई जा रही हैं। इनमें कुछ मूर्तियां जैन धर्म के पहले तीर्थंकर स्वामी ऋषभनाथ की हैं, जबकि कुछ नायिकाआें कीं, जो महिलाओं के नारी सौंदर्य का प्रदर्शन कर रही हैं।

    - खास बात यह है कि पड़ावली में अधिकतर विष्णु और शिव प्रतिमाओं के भंडार मिले हैं। ऐसे में जैन धर्म की मूर्तियों का पाया जाना महत्वपूर्ण है। यैलो सैंडस्टोन से बनी ये मूर्तियां पड़ावली से 100 मीटर की दूरी पर स्थित एक गांव में मिली हैं।

    - इन मूर्तियों की संख्या कुल 12 है। ग्रामीणों का कहना है कि वे गांव में मकान बनाने के लिए खुदाई कर रहे थे, तो कुछ मूर्तियों से उनकी कुदाली टकराई। इसके बाद उन्हें पहले दो बड़ी मूर्तियां मिली और बाद में एक के बाद एक कुल 10 मूर्तियां प्राप्त हुईं।

    - उन्होंने लगातार खुदाई जारी रखी, कि शायद कोई खजाना मिल जाए। लेकिन उन्हें सिर्फ मूर्तियां ही हाथ लगीं। इसके बाद यह सूचना पूरे गांव में फैल गई और लोग इन्हें देखने के लिए इकट्ठे हो गए। फिर इन मूर्तियों को एक पेड़ के नीचे साफ करके रख दिया गया।

    मूर्तियों की बनावट से पता लगाई इनकी उम्र
    - इस क्षेत्र में मूर्तियों पर रिसर्च करने वाले आर्कियोलॉजिस्ट शिवम दुबे ने बताया कि जब वे मितावली पड़ावली की मूर्तियों पर अपने दो साथी ममता खोखर और देव त्रिपाठी के साथ रिसर्च कर रहे थे। तो इस दौरान उन्होंने वहां गांव में लोगों को मूर्तियों के चारों ओर इकट्ठा होते हुए देखा। वे भी वहां पहुंच गए। उसके बाद उन्होंनें उन मूर्तियों को उठाकर पेड़ के नीचे रखवाया।

    - ग्रामीणों को यह नहीं पता था कि ये मूर्तियां किन देवी-देवताओं की हैं। वे उन्हें अपने कुल देवी-देवता के रूप में मान रहे थे। लेकिन तभी उन्होंनें मूर्तियों का डॉक्यूमेंटेशन किया और उनकी बनावट के आधार पर बताया कि ये मूर्तियां 10वीं से 11वीं सदी की हैं और जैन धर्म के स्वामी ऋषभ देव की हैं।

    - शिवम दुबे नोएडा के शब्दचित्रा आर्कियोलॉजी रिसर्च सेंटर के रिसर्च स्कॉलर हैं और वे ग्वालियर रीजन के पुरावशेष पर पिछले एक साल से शोध कर रहे हैं। अब उनका यह रिसर्च पेपर पटना यूनिवर्सिटी के रिसर्च जर्नल में अगले एक माह में प्रकाशित होने वाला है।

    12 मूर्तियों में ये हैं खास
    - स्वामी ऋषभदेव: खुदाई में जैन तीर्थंकर ऋषभदेव की दो प्रतिमाएं मिली हैं। दोनों के ही सर नहीं हैं। इसमें ये दोनों ही प्रतिमाएं दो-दो फीट की हैं।
    - नायिकाएं: नायिकाओं व गंधर्व की कुल 9 मूर्तियां हैं। ये मूर्तियां एक फीट व डेढ़ फीट की हैं। इसमें क्रीड़ा करती महिलाओं के सौंदर्य को दिखाया है।
    - फ्लोरल मोटिफ: कई जगह से खंड़ित और ढाई फीट लंबा। फूल पत्तियों,बेल-बूटों को उकेरा गया है।

    - मितावली-पड़ावली में हर 50 कदम की दूरी पर पुरावशेषों की भरमार है। अब इनमें से कुछ मूर्तियों को गढ़ी पड़ावली में बन रही स्कल्प्चर गैलरी में पेडस्टल पर रखा जाएगा। साथ ही कुछ मूर्तियां एएसआई म्यूजियम में सहेजी जाएंगी।
    जुल्फीकार अली, सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट, एएसआई

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Web Title: Statues Of The Century, In Which Two Jain Tirthankaras
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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