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सरहद पर देश के लिए शहीद हो गया जवान, 24 घंटे भी चिता की रखवाली न कर सके

Bhaskar News | Last Modified - Feb 07, 2018, 12:42 PM IST

ये फोटो मंगलवार शाम 4:28 बजे ग्वालियर जिले के बरौआ गांव के पास सरकारी स्कूल की है।
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    सोमवार को यहीं पर शहीद रामअवतार का अंतिम संस्कार किया गया था।

    ग्वालियर : ये दृश्य ग्वालियर जिले के बरौआ गांव स्थित सरकारी स्कूल का है। मंगलवार शाम 4:28 बजे। शहीद रामअवतार की चिता की राख बिखरी हुई है। अस्थि संचय होना बाकी है। सोमवार रात 9:30 बजे यहां राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया था। मंगलवार शाम यहां मवेशी घूमते नजर आए। शाम तक यही दृश्य था।


    भास्कर ने जब प्रशासन को सूचना दी तो अफसर हरकत में आए। एसपी डॉ. आशीष ने कहा- तुरंत व्यवस्था करवाता हूं। कलेक्टर राहुल जैन बोले- निगम की टीम को भेज दिया गया है। रात 11:30 बजे तहसीलदार और प्रशासन की टीम वहां पहुंची। शहीद रामअवतार की अस्थियों का संचय बुधवार को किया जाएगा। तब तक टीम यहां तैनात रहेगी।


    मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सोमवार को घोषणा की थी शहीद के परिवार को एक करोड़ रुपए, एक सदस्य को नौकरी, एक फ्लैट या प्लॉट और ग्वालियर में एक प्रतिमा और एक स्मारक स्थल उनके नाम किया जाएगा।


    प्रोटोकाल नहीं, लेकिन शहीद का सम्मान जरूरी
    जब भी किसी शहीद की पार्थिव देह आती है तो सेना उसे पूरे सम्मान के साथ लाती है। शहीद के परिजन को वर्दी, तिरंगा और निशानियां सौंपने के बाद सलामी देकर अंतिम विदाई देती है। इसके बाद की जिम्मेदारी जिला प्रशासन को देखनी चाहिए। लिखित में तो दाह संस्कार के बाद प्रोटोकाल की कोई व्यवस्था नहीं है, फिर भी सैनिक के सम्मान को ध्यान में रखते हुए प्रशासन सुरक्षा व्यवस्था करना चाहिए। - अखिलेंदु अरजरिया, रिटायर्ड कलेक्टर


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    प्रशासन ने शहीद की चिता को गाय से सुरक्षा के इंतजाम किए।
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    अंतिम संस्कार के बाद ही अस्थि संचय कर्म निभाया जाता है। इसके बाद इन्हें नदी में बहा दिया जाएगा।
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Web Title: The Bones Of Ramavatar Lying In This Condition
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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