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पुलिस ने रिपोर्ट नहीं लिखी, तो आबकारी सब इंस्पेक्टर ने खाईं नींद की गोलियां

शराब फैक्ट्री के लोगों के हमले के बाद आबकारी अमले ने एक आरोपी को पकड़कर शहर पुलिस को दिया लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई।

Danik Bhaskar | Jan 09, 2018, 07:32 AM IST

भिंड . शराब फैक्ट्री के लोगों के हमले के बाद आबकारी अमले ने एक आरोपी को पकड़कर शहर पुलिस को दिया लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। इससे नाराज चोटिल कर्मचारियों ने आधी रात को थाना घेर लिया। लेकिन फिर भी देहात थाना टीआई उदयभान सिंह यादव ने आबकारी अमले की फरियाद पर आरोपियों के खिलाफ मुकद्दमा दर्ज नहीं किया। बल्कि उनका आवेदन लेने के बाद यह कहकर मामला टाल दिया कि अभी मामले की जांच होगी। लेकिन जब 48 घंटे गुजरने के बाद भी कुछ नहीं हुआ तो रविवार की रात आबकारी सब इंस्पेक्टर नीरज त्रिवेदी ने नींद की गोलियां खा लीं।

- जैसे ही यह खबर एसपी प्रशांत खरे को लगी तो टीआई ने चंद मिनटों में जांच पूरी कर छह नामजद और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट और शासकीय कार्य में बाधा डालने का मामला दर्ज कर लिया। वहीं सब इंस्पेक्टर त्रिवेदी की हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

तीन दिन पहले चेकिंग के दौरान हुआ था आबकारी अमले पर हमला
- यहां बता दें कि आबकारी सब इंस्पेक्टर त्रिवेदी आरक्षक हरिओम शर्मा, उपेंद्र चौहान, शिरोमणि जाटव और चालक मुन्नेश यादव के साथ अटेर रोड मुडियाखेड़ा पर चेकिंग प्वाइंट लगाए हुए थे।

- इसी दौरान उनका शराब फैक्ट्री के लोगों से झगड़ा हो गया, जिसमें फैक्ट्री के लोगों ने अमले के साथ मारपीट कर दी। इस विवाद की सूचना पाकर शहर कोतवाली एसआई केएन चौधरी भी मौके पर पहुंच गए।

- वहीं मोनू यादव को साथ कोतवाली पकड़ लाए। साथ ही शराब फैक्ट्री के लोगों की एक गाड़ी भी पकड़कर देहात थाना पहुंचा दी। लेकिन यहां से मोनू को छोड़ दिया गया। साथ ही आबकारी अमले के साथ हुई मारपीट की रिपोर्ट देहात थाना ने नहीं लिखी।

- जबकि जब आबकारी अमले ने ज्यादा देर तक कोतवाली में एफआईआर के लिए दबाव बनाया तो उन्हें मेडिकल के लिए भेजा गया। साथ ही उनका अल्कोहल टेस्ट भी कराया गया था।

पल-पल पर पलट रहे बयान
- आबकारी सब इंस्पेक्टर त्रिवेदी पल पल पर बयान बदल रहे हैं। पहले मीडिया को उन्होंने बताया कि रात नौ से 10 बजे के बीच एफआईआर न होने से दुखी होकर गोलियां खाई। लेकिन जब नायब तहसीलदार बयान लेने पहुंची तो बताया कि उन्हें बीपी की बीमारी है। डाॅक्टर ने नींद की गोलियां लिखी थी इसलिए खाई हैं।

मेरी सुनवाई ही नहीं हो रही थी 48 घंटे से ज्यादा हो गए थे
- मेरी सुनवाई ही नहीं हो रही थी। 48 घंटे से ज्यादा हो गए थे। इसलिए मैंने रात नौ से 10 बजे के बीच नींद की गोलियां खा ली। किसी का फोन आया तो मैंने कहा कि मैं सुसाइड कर रहा हूं। यह बात कलेक्टर साहब को पता लगी। तो उन्होंने आधी रात को एफआईआर कराई। हमें तो थाने से भगा ही दिया गया था।
नीरज त्रिवेदी, सब इंस्पेक्टर, आबकारी

रात में ही लिखवा दी थी एफआईआर
- आबकारी सब इंस्पेक्टर की एफआईआर न लिखे जाने का मामला रात में मेरे संज्ञान में आया। जिसके बाद हमने देहात थाना प्रभारी को निर्देशित करके एफआईआर दर्ज करा दी थी। नींद की गोली खाने की बात हमारे सामने नहीं आई थी।
प्रशांत खरे, एसपी, भिंड

पहले जांच में लिया था, बाद में केस दर्ज कर लिया
- आबकारी अमला मारपीट के साथ लूट भी बता रहे थे। इसलिए आवेदन जांच में लिया था। सभी के बयान में यह साबित हो गया कि उद्देश्य सिर्फ मारपीट का था तो हमने एफआईआर दर्ज कर ली।

- उदयभान यादव, देहात थाना प्रभारी