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फ्रांस, मध्यप्रदेश के एक्सपर्ट जुटा रहे हजारों साल पुराने शैलचित्रों की जानकारी

इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज (इंटेक) प्रदेश के पहाड़ों की चट्टानों पर मौजूद शैलचित्रों का संरक्षण करे

Bhaskar News | Last Modified - Dec 20, 2017, 07:24 AM IST

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    ग्वालियर.इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चर हेरिटेज (इंटेक) प्रदेश के पहाड़ों की चट्टानों पर मौजूद शैलचित्रों का संरक्षण करेगा। पहले चरण में प्रदेश के शहरों के आस-पास के जंगलों में मौजूद शैलचित्रों की जानकारी जुटाई जा रही है। यह काम भोपाल की डाॅ. मीनाक्षी पाठक और फ्रांस के 84 वर्षीय डाॅ.जान क्लाथ मिलकर कर रहे हैं। यह टीम तीन दिन से ग्वालियर में कैंप किए हुए है। प्रदेश के जंगलों में 8 से 10 हजार साल पुराने शैलचित्र मौजूद हैं।

    - संरक्षण नहीं होने के कारण वक्त के साथवह मिटते जा रहे हैं। इंटेक ने इन्हें सहेजने के लिए एक साल का प्रोजेक्ट शुरू किया है। इसलिए एक्सपर्ट की टीम सबसे पहले गुप्तेश्वर मंदिर और मराठों का बाड़ा बाबा साहब की समाधि पर शैल चित्रों को देखने पहुंची, जहां ये लगभग खत्म हो गए हैं। मोहना के टिकोला के जंगलों में 20 साइट्स पर शैलचित्र मिले हैं। यहां गेरू से बने जानवरों के चित्रों के अलावा लड़ाई के दृश्य भी नजर आए। साथ ही हाथी पर सवारी के अलावा बुद्धिस्ट से जुड़े चित्र मिले हैं। इसी तरह के शैलचित्र मुरैना के पहाड़गढ़ में मिले हैं। ये आदिमानव काल के बताए गए हैं।

    ऐसे होगा संरक्षण

    - शैलचित्रों के आसपास स्टील की जालियां लगाने का प्रावधान हैं, जिससे वहां पहुंचने वाले लोग शैलचित्रों के ऊपर कोई दूसरी आकृति नहीं बना सकें।
    - शैलचित्रों का रासायनिक उपचार भी किया जाएगा, जिससे वे साफ और उभरकर पर्यटकों को दिखाई दे सकें।
    - स्थलों पर सूचनाएं लगाई जाएंगी, ताकि कोई भी शैलचित्रों को मिटाए नहीं।

    आदिवासियों को कर रहे जागरूक
    - एक्सपर्ट शैलचित्रों पर अध्ययन करने के अलावा आस-पास रहने वाले आदिवासियों को भी जागरूक कर रही है। क्योंकि ये लोग ही शैलचित्रों के नजदीक हैं। उन्हें इनके संरक्षण आदि के बारे में जानकारियां दी जा रही हैं।


    ये शहर शामिल

    - ग्वालियर, मुरैना के अलावा प्रदेश के शहरों में रायसेन, सीहोर, पचमढ़ी, पन्ना, छतरपुर, सतना, बैतूल, मंदसौर, होशंगाबाद, भोपाल आदि शामिल हैं। जहां पर इंटेक की ओर से नियुक्त उक्त टीम शैलचित्रों के संरक्षण के लिए प्राथमिक स्टेज पर काम करेगी।

    एक साल में प्रोजेक्ट पर काम कर रिपोर्ट सौंपेंगे
    - हम प्रदेश में मौजूद शैलचित्रों के संरक्षण के लिए काम कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट इंटेक ने हमें दिया है। अभी ग्वालियर-चंबल संभाग में आए हैं। एक साल में प्रोजेक्ट पर काम कर रिपोर्ट सौंपना है।
    डा. मीनाक्षी पाठक और डाॅ. जान क्लाथ, शैलचित्र एक्सपर्ट

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