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बेटियों को मारने के लिए बदनाम भिंड में इस साल प्रदेश में सबसे ज्यादा जन्मीं लाड़लीं

बेटी को बोझ समझकर उसे कोख में ही मारने के लिए देशभर में बदनाम भिंड जिले के लोगों की मानसिकता अब बदल रही है।

Danik Bhaskar | Jan 10, 2018, 06:00 AM IST

भिंड (ग्वालियर) . बेटी को बोझ समझकर उसे कोख में ही मारने के लिए देशभर में बदनाम भिंड जिले के लोगों की मानसिकता अब बदल रही है। जिस भिंड जिले का एक गांव एशिया में सबसे कम बेटियों के लिए बदनाम रहा हो, उस जिले में इस साल प्रदेश में सबसे ज्यादा बेटियां जन्मी हैं। जिले में महज नौ महीनों में (अप्रैल से दिसंबर 2017) 13,797 बेटियों ने जन्म लिया। इतना ही नहीं बेटा और बेटियों के बीच का अंतर भी घट गया है।


- एक साल पहले बेटा-बेटी में अंतर 1684 का था, अब सिर्फ 1084 का बचा है। इधर, गोहद तहसील का खरौआ गांव, जो एशिया में सबसे कम बेटियों के लिए चर्चित था, आज यहां भी लड़के और लड़कियों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं है।

- इस बदलाव की मुख्य वजह प्रदेश सरकार द्वारा बेटियों वाले माता-पिता को प्रोत्साहन और गर्भधारण से लेकर प्रसव तक महिला के निशुल्क इलाज की सुविधा है। खरौआ गांव के गंगा सिंह कहते हैं कि बेटियों की पढ़ाई-लिखाई और उनके लालन-पालन के लिए लाड़ली लक्ष्मी जैसी योजनाएं माता-पिता के मन से बेटा-बेटी का भेद खत्म करने में मददगार साबित हुई हैं।

- मालूम हो कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने बेटी बचाओ अभियान की शुरुआत 10 अक्टूबर 2011 को चंबल संभाग से ही की थी। उस समय भिंड जिले में बालक-बालिकाओं का अनुपात 1000:855 था, लेकिन अब 1000:929 हो गया है।